कारगिल में शहीद जवान के घर आज तक नहीं पहुंची सरकारी सुविधाएं, पिता को शहादत पर गर्व
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलिया जिले के पूर्वी छोर पर घाघरा नदी किनारे इब्राहिमाबाद नौबरार (अठगावा) पंचायत के दलेल टोला निवासी अवनीश यादव ने 20 साल पहले कारगिल में शहादत दी थी। शहीद के नाम पर सरकार की ओर से कई घोषणाएं की गईं लेकिन आज भी ये पूरी नहीं हो सकी हैं।
कारगिल शहीद के पिता शिवजी यादव ने दर्द भरे शब्दों में कहा कि हमने यह दर्द झेला है जब बेटे शहीद होते हैं तो इन सरकारों द्वारा शहीदों के परिजनों को तमाम वादों के पुलिंदे बांधकर बहला दिया जाता है। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है वैसे-वैसे वादों के सारे पुलिंदे समाप्त हो जाते हैं और उनके परिजनों का हाल जानना भी मुनासिब नहीं समझा जाता। लेकिन हमें गर्व है कि हमारे बेटे ने भारत मां की रक्षा के लिए शहादत दी है।
बता दें कि शहीद जवानों के आश्रितों को सेवायोजित करने और शहीद सैनिकों के गांव को शहीद ग्राम घोषित करते हुए तोरण द्वार और शहीद सैनिक की मूर्ति लगाने की घोषणा प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस साल अपने बजट में की थी लेकिन उस पर अमल अभी तक नहीं हुआ। इसका एक उदाहरण क्षेत्र के इब्राहिमाबाद नौबरार ग्राम पंचायत ही है।
इसी पंचायत के दलेल टोला निवासी कारगिल शहीद हैं अवनीश कुमार यादव। उनके गांव में पिछली सरकारों की भी तमाम घोषणाएं अभी भी धूल फांक रही हैं। गांव के अस्तित्व को मिटाने में घाघरा ने भी कोई कसर बाकी नहीं रखी है।
गांव के कई टोलों के लगभग 300 से भी ज्यादा आलीशान मकान वर्ष 2014 में ही घाघरा में समा गए। उसी गांव के दलेल टोला में है कारगिल शहीद अवनीश कुमार यादव का घर। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान, कई दुश्मनों को मार गिराने के बाद वह खुद भी दुश्मनों की गोलियों का निशाना बन गए थे। शहीद अवनीश कुमार यादव के परिजन आज भी उस दिन को याद करके रो पड़ते हैं।
देश के लिए अपने बेटे को कुर्बान करने वाले माता-पिता तब से ही शहीद की एक प्रतिमा और उसके नाम पर एक प्रवेश द्वार की मांग करते रह गए, लेकिन उनकी मुराद आज तक पूरी नहीं हुई। बहुत से रहनुमाओं ने शहीद के नाम पर बहुत कुछ करने को कहा था, लेकिन समय के सांथ सब कुछ ओझल हो गया।
शहीद के माता-पिता आज भी उसी आस में अपनी बची हुई जिंदगी काट रहे हैं। अमर शहीद अवनीश यादव के परिजनों ने जब योगी सरकार की इस घोषणा को सुना था तब वे काफी खुश हुए थे। शहीद अवनीश की माता सोमारो देवी, भाई रविंद्र यादव, योगेंद्र यादव आदि ने भी खुशी का इजहार किया था लेकिन उस घोषणा के बाद भी आज तक किसी ने कोई खोज-खबर नहीं ली।