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कर ले शृंगार चतुर नवेली साजन के घर जाना है...
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 06 Nov 2016 01:22 AM IST
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वाराणसी में कबीरा महोत्सव
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संत कबीर के दोहों, साखियों, पदों और भजनों को शनिवार की रात सुरों से सजाया गया। उनके जीवन दर्शन से देश-दुनिया के लोगों को परिचित कराने के लिए गायन के साथ ही धरोहरों की यात्राओं और परिचर्चाओं का सहारा लिया गया। देर रात अस्सी घाट पर सजे भव्य मंच पर पद्मभूषण पं. राजन साजन मिश्र ने कबीर के दोहों पर अलाप लिया तो लोग झूमने लगे।
अस्सी घाट पर गंगा आरती के बाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई। सबसे पहले उस्ताद नाथू लाल सोलंकी ने नगाड़े की थाप से मुग्ध किया। इनके बाद विद्या शाह ने संत कबीर के पदों का गायन किया। मन लागा मोरा यार फकीरी में... के बाद उन्होंने मेरे मन बस गए साहेब तुम कबीर... और फिर जतन बताए जइहो कइसे दिन कटिहें... की प्रस्तुति की। मीर मुख्यियार अली ने राजस्थानी लोक और शास्त्रीय भावों के मिश्रण के साथ कबीर के भजनों का गायन किया। पद्मभूषण पं. राजन -साजन मिश्र ने शुरुआत की दोहों से।
बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिलिया कोय... के बाद उन्होंने भजन की प्रस्तुति की। बोल थे-माला फेरी तिलक लगाया लंबी जटा बढ़ाता है..। इसके बाद - मत कर मोह को हरि भजन को... और अंत में निर्गुण की प्रस्तुति की। बोल थे- कर ले शृंगार चतुर नवेली साजन के घर जाना है...। तबले पर पं. राजेश मिश्र, बांसुरी पर अतुल शंकर और हारमोनियम पर सुमित मिश्र ने संगत की। इससे पहले सुबह सात बजे दरभंगा घाट पर अतुल शंकर की बांसुरी से शुरुआत हुई। इन्होंने राग भूपेश्वरी की अवतारणा की। तबले पर कुशाल कृष्ण ने संगत की। फिर शबनम विरमानी और विपुल रिखी ने कबीर के भजनों की प्रस्तुति की। यह कायक्रम महिंद्रा कबीर फेस्टिवल के तहत किया गया। रविवार की शाम छोटा नागपुर वाटिका में संगीत प्रस्तुति होगी।
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अस्सी घाट पर गंगा आरती के बाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई। सबसे पहले उस्ताद नाथू लाल सोलंकी ने नगाड़े की थाप से मुग्ध किया। इनके बाद विद्या शाह ने संत कबीर के पदों का गायन किया। मन लागा मोरा यार फकीरी में... के बाद उन्होंने मेरे मन बस गए साहेब तुम कबीर... और फिर जतन बताए जइहो कइसे दिन कटिहें... की प्रस्तुति की। मीर मुख्यियार अली ने राजस्थानी लोक और शास्त्रीय भावों के मिश्रण के साथ कबीर के भजनों का गायन किया। पद्मभूषण पं. राजन -साजन मिश्र ने शुरुआत की दोहों से।
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बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिलिया कोय... के बाद उन्होंने भजन की प्रस्तुति की। बोल थे-माला फेरी तिलक लगाया लंबी जटा बढ़ाता है..। इसके बाद - मत कर मोह को हरि भजन को... और अंत में निर्गुण की प्रस्तुति की। बोल थे- कर ले शृंगार चतुर नवेली साजन के घर जाना है...। तबले पर पं. राजेश मिश्र, बांसुरी पर अतुल शंकर और हारमोनियम पर सुमित मिश्र ने संगत की। इससे पहले सुबह सात बजे दरभंगा घाट पर अतुल शंकर की बांसुरी से शुरुआत हुई। इन्होंने राग भूपेश्वरी की अवतारणा की। तबले पर कुशाल कृष्ण ने संगत की। फिर शबनम विरमानी और विपुल रिखी ने कबीर के भजनों की प्रस्तुति की। यह कायक्रम महिंद्रा कबीर फेस्टिवल के तहत किया गया। रविवार की शाम छोटा नागपुर वाटिका में संगीत प्रस्तुति होगी।
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