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बनारस से ‘कबीर दास’ गए दिल्ली, सूना हुआ हस्तकला संकुल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 02 Apr 2018 11:02 AM IST
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हस्तकला संकुल में यहां लगी थी मूर्ति
- फोटो : अमर उजाला
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बनारस के दीनदयाल हस्तकला संकुल में कुछ दिनों पूर्व रखी कबीर दास जी की जिस आदमकद प्रतिमा की चर्चा विभिन्न देशों की मीडिया कर रही थी अब वह मंच सूना हो गया है।
प्रतिमा में कुछ कमियां मिली हैं जिसे दूर करने के लिए इसे दिल्ली भेजा गया है। प्रवेश द्वार पर रखी प्रतिमा को भी कमी के चलते हटा दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी, फ्रांस-जर्मनी के राष्ट्रपति के आगमन के दौरान खासी चर्चा में रही कबीर दास जी की प्रतिमा में कई खामियां सामने आई हैं।
सूत्रों की मानें तो दिल्ली की जिस कंपनी ने इसको बनाया था क्लेम के तहत उसको कमियां दूर करने के लिए कहा गया है और उसे दिल्ली भेजा गया है। हालांकि हैंडलूम विभाग के अधिकारी यह बता पाने में असमर्थता जता रहे हैं कि इन्हें मेंटेनेंस के लिए कहां भेजा गया है और कमी कितने दिन में दूर हो पाएगी।
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हस्तकला संकुल की व्यवस्था देख रहे असिस्टेंट डायरेक्टर अनिल सिंह ने बताया कि प्रतिमा में कुछ बदलाव किए जाने हैं जिसके लिए इसे संबंधित कंपनी को भेजा गया है।
वहीं गर्मी के मौसम में हस्तकला संकुल पहुंच रहे सैलानियों को प्यास की समस्या से दो चार होना पड़ रहा है। इस बड़े परिसर में घूमते-घूमते लगभग हर सैलानी को प्यास लग रही है।
अगर पानी लेकर आया है तो ठीक वरना यहां ढूंढने से भी पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में उसे लगभग आधे किलोमीटर दूर बाजार में जाकर पैसे से खरीदकर पानी पीना पड़ रहा है। यहां के कर्मचारियों की भी प्यास ऐसे ही बुझ रही है।
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प्रतिमा में कुछ कमियां मिली हैं जिसे दूर करने के लिए इसे दिल्ली भेजा गया है। प्रवेश द्वार पर रखी प्रतिमा को भी कमी के चलते हटा दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी, फ्रांस-जर्मनी के राष्ट्रपति के आगमन के दौरान खासी चर्चा में रही कबीर दास जी की प्रतिमा में कई खामियां सामने आई हैं।
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सूत्रों की मानें तो दिल्ली की जिस कंपनी ने इसको बनाया था क्लेम के तहत उसको कमियां दूर करने के लिए कहा गया है और उसे दिल्ली भेजा गया है। हालांकि हैंडलूम विभाग के अधिकारी यह बता पाने में असमर्थता जता रहे हैं कि इन्हें मेंटेनेंस के लिए कहां भेजा गया है और कमी कितने दिन में दूर हो पाएगी।
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हस्तकला संकुल की व्यवस्था देख रहे असिस्टेंट डायरेक्टर अनिल सिंह ने बताया कि प्रतिमा में कुछ बदलाव किए जाने हैं जिसके लिए इसे संबंधित कंपनी को भेजा गया है।
वहीं गर्मी के मौसम में हस्तकला संकुल पहुंच रहे सैलानियों को प्यास की समस्या से दो चार होना पड़ रहा है। इस बड़े परिसर में घूमते-घूमते लगभग हर सैलानी को प्यास लग रही है।
अगर पानी लेकर आया है तो ठीक वरना यहां ढूंढने से भी पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में उसे लगभग आधे किलोमीटर दूर बाजार में जाकर पैसे से खरीदकर पानी पीना पड़ रहा है। यहां के कर्मचारियों की भी प्यास ऐसे ही बुझ रही है।