काशी में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य की चयन प्रक्रिया शुरू, जानिए कैसे होती है नियुक्ति

amarujala.com- Written by: अनूप ओझा Updated Thu, 16 Nov 2017 02:04 PM IST
Jyotishpeeth shankaracharya selection process in kashi
ज्योतिष पीठ
धर्मनगरी काशी में ज्योतिष पीठ के अगले शंकराचार्य की नियुक्ति प्रक्रिया आरंभ हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर शंकराचार्य के चयन के लिए नामित भारत धर्म महामंडल ने द्वारिका-शारदा पीठ, शृंगेरी पीठ और पुरी पीठ के शंकराचार्यों से नए शंकराचार्य के नाम पर अनुशंसा मांगी है। मंगलवार शाम हुई महामंडल की बैठक में निर्वाचक मंडल का गठन करने पर चर्चा की गई।

इस बीच काशी विद्वत परिषद नए शंकराचार्य के नाम पर सहमति बनाने के लिए 28 नवंबर को विद्वानों की बैठक करेगी। बीते 22 सितंबर को हाईकोर्ट ने कहा था कि भारत धर्म महामंडल, विद्वत परिषद के साथ तीनों पीठों के शंकराचार्य योग्य विद्वान को ज्योतिष पीठ के नए शंकराचार्य के पद पर अभिषिक्त करने का निर्णय लें।

ज्योतिष पीठ के घोषणापत्र में गुरु-शिष्य परंपरा में मठाम्नाय अनुशासन के आधार पर संन्यासी को शंकराचार्य के पद पर आसीन कराने का विधान है।
1953 में स्वामी ब्रह्मानंद के देहावसान के बाद उनके स्थान पर वसीयतनामा के आधार पर शांतानंद सरस्वती, द्वारका प्रसाद शास्त्री, विष्णुद्वानंद सरस्वती और परमानंद सरस्वती को आचार्य पद के लिए नामित किया गया था लेकिन ये सभी उत्तराधिकारी न्यायालय के परीक्षण में अयोग्य पाए गए

इस पद पर धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के नाम का भी प्रस्ताव किया गया था लेकिन उनके स्वीकार न करने पर 25 जून, 1953 को स्वामी कृष्णबोधाश्रम का अभिषेक किया गया। 20 मई, 1973 को कृष्णबोधाश्रम के देहावसान के बाद 12 सितंबर, 1973 को इस पद पर ब्रह्मानंद के शिष्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का अभिषेक किया गया था।

भारत धर्म महामंडल ने इसका अनुमोदन कर दिया था लेकिन बाद में विवाद खड़ा हो गया। 1989 में स्वामी वासुदेवानंद ने खुद को ब्रह्मानंद की शिष्य परंपरा का संन्यासी बताते हुए पीठ का शंकराचार्य घोषित कर दिया। इस पर न्यायालय में विवाद चलने लगा।
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