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आज आधी रात जन्मेंगे प्रभु यीशु
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 24 Dec 2016 02:41 AM IST
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क्रिसमस के उपलक्ष्य में बिशप हाउस में सजी प्रभु यीशु के जन्म की झांकी।
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मसीही समुदाय का सबसे बड़ा दिन क्रिसमस की खुशियां शुरू हो चुकी हैं। ये खुशी और दोगुनी होगी जब शनिवार की रात बारह बजे प्रभु यीशु गिरजाघरों और मसीही घरों में जन्म लेेंगे। प्रेम और सौहार्द के प्रतीक प्रभु यीशु के जन्म की तैयारियां गिरजाघरों में पूरे जोर शोर से हो रही है। शहर के तकरीबन सभी गिरजाघर झालर और बत्तियों से सज चुके हैं। मसीही कालोनियां भी पूरी तरह से सज चुकी हैं। उधर कैंटोंमेंट स्थित सेंट मेरीज कैथेड्रल चर्च और बिशप हाउस में भी आकर्षक सजावट की जा चुकी है।
शुक्रवार को बिशप हाउस में वाराणसी धर्म प्रांत के बिशप फादर यूजीन जोसफ ने प्रेसवार्ता में बताया कि कैंटोंमेंट स्थित सेंट मेरीज कैथड्रल चर्च में 25, 26 और 27 दिसंबर को क्रिसमस मेला लगेगा। प्रभु यीशु के पूरे जीवन वृत्तांत को बाइबिल प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया जाएगा। प्रदर्शनी का उद्घाटन 25 दिसंबर को एक बजे होगा। उद्घाटन के बाद दोपहर तीन बजे से छह बजे तक क्रिसमस मिलन समारोह होगा।
मेले में पारंपरिक चरनी, कठपुतली नृत्य, प्रार्थना, ख्रीस्त जयंती गीत, खेलकूद, खानपान की दुकानों लगेंगी। फादर यूजीन ने बताया कि 24 दिसंबर को रात बारह बजे गिरजाघर में प्रभु की स्तुति और आराधना के लिए लोग जुटेंगे। मध्यरात्रि में प्रभु के जन्म के समय मिस्सा बलिदान (पूजा विधि) होगा। विशेष महिमा गान और जयघोष के साथ गिरजाघर का घंटा बजाया जाएगा जो कि प्रभु के जन्म का प्रतीक है। मिस्सा बलिदान के बाद शोभायात्रा द्वारा नवजात शिशु ईसा मसीह की प्रतिमा को गिरजा से स्थानांतरित कर चरनी में स्थापित किया जाएगा।
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शुक्रवार को बिशप हाउस में वाराणसी धर्म प्रांत के बिशप फादर यूजीन जोसफ ने प्रेसवार्ता में बताया कि कैंटोंमेंट स्थित सेंट मेरीज कैथड्रल चर्च में 25, 26 और 27 दिसंबर को क्रिसमस मेला लगेगा। प्रभु यीशु के पूरे जीवन वृत्तांत को बाइबिल प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया जाएगा। प्रदर्शनी का उद्घाटन 25 दिसंबर को एक बजे होगा। उद्घाटन के बाद दोपहर तीन बजे से छह बजे तक क्रिसमस मिलन समारोह होगा।
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मेले में पारंपरिक चरनी, कठपुतली नृत्य, प्रार्थना, ख्रीस्त जयंती गीत, खेलकूद, खानपान की दुकानों लगेंगी। फादर यूजीन ने बताया कि 24 दिसंबर को रात बारह बजे गिरजाघर में प्रभु की स्तुति और आराधना के लिए लोग जुटेंगे। मध्यरात्रि में प्रभु के जन्म के समय मिस्सा बलिदान (पूजा विधि) होगा। विशेष महिमा गान और जयघोष के साथ गिरजाघर का घंटा बजाया जाएगा जो कि प्रभु के जन्म का प्रतीक है। मिस्सा बलिदान के बाद शोभायात्रा द्वारा नवजात शिशु ईसा मसीह की प्रतिमा को गिरजा से स्थानांतरित कर चरनी में स्थापित किया जाएगा।
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