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जापानी बालाओं की फैशन गैलरी बनीं काशी की गलियां
ब्यूरो, अमर उजाला वाराणसी
Updated Sat, 05 Dec 2015 01:58 AM IST
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चाहे जीने का बिंदास अंदाज हो या परिधानों की च्वाइस। बनारस की गलियों का कोई जवाब नहीं है। सात समंदर पार से आने वाले विदेशी सैलानी यूं ही इन गलियों पर जान नहीं छिड़कते। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे की काशी यात्रा से पहले यहां की तंग गलियों में जापानी सैलानियों की आवाजाही बढ़ने लगी है।
फैशन की इस गैलरी में जापानी युवक-युवतियों की पसंद का बाजार दमकने लगा है। गलियों के टेलरिंग हाउस में जापानी बालाओं की खास पसंद फुल बांह की कियोनो, अफगानी फ्रेंचो और जैकेट की सिलाई के लिए तांता लगा हुआ है। शिंजो अबे 12 दिसंबर की शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती का नजारा लेंगे।
शिंजो अबे के आगमन की तिथि नजदीक आने के साथ ही काशी में जापानियों की आवाजाही बढ़ने लगी है।
कुमिको गेस्ट हाउस, सांतना गेस्ट हाउस, राजस्थान गेस्ट हाउस में जापानी पर्यटक डेरा जमाने लगे हैं। दशाश्वमेध के काली मंदिर से होकर संकरी गली में घुसते ही विदेशी फैशन की नई दुनिया नजर आने लगती है। हाथ से बने सजावटी सामान, लकड़ी के खिलौने, बनारस के मिजाज को बताने वाली इत्र की दूकानें विदेशियों का ध्यान खींचती हैं। विदेशी परिधानों की फैशन गैलरियां पर्यटकाें कदम ठिठकाने के लिए मजबूर करती है।
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अपनी महिला मित्र के साथ जापान से शुक्रवार को ही काशी पहुंचे ड्यूज ने गली में कुछ देर घूमने के बाद अफगानी फ्रेंचो (पाजामा) की खरीदारी की। रसिया से आईं आर्किटेक्ट ओला खादी का शाल पसंद करती रहीं, तो कुछ जापानी बालाएं कपड़े और सब्जियों की दूकानों पर भी दिखीं।
पांडेय घाट, खालिसपुरा, बंगाली टोला की गलियों के दोनों बाजू जापानी परिधानों से सजे बाजार में जापानी, अमेरिकी पर्यटक अपनी पसंद की तलाश करते रहे तो उन्हीं गलियों में विदेशी परिधानों की सिलाई के लिए खुले टेलरिंग शॉप की मशीनों के शोर भी नजरें फेरने के लिए मजबूर करते रहे।
टेलर मास्टर सतीश का कहना है कि जापानी युवक-युवतियां अफगानी फ्रेंचो, फ्रेंच जैकेट, फुल बाह की कियोनो पसंद करते हैं। इसलिए उनका ख्याल रखते हुए विदेशी परिधानों की डिजाइन तैयार की जा रही है।
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फैशन की इस गैलरी में जापानी युवक-युवतियों की पसंद का बाजार दमकने लगा है। गलियों के टेलरिंग हाउस में जापानी बालाओं की खास पसंद फुल बांह की कियोनो, अफगानी फ्रेंचो और जैकेट की सिलाई के लिए तांता लगा हुआ है। शिंजो अबे 12 दिसंबर की शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती का नजारा लेंगे।
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शिंजो अबे के आगमन की तिथि नजदीक आने के साथ ही काशी में जापानियों की आवाजाही बढ़ने लगी है।
कुमिको गेस्ट हाउस, सांतना गेस्ट हाउस, राजस्थान गेस्ट हाउस में जापानी पर्यटक डेरा जमाने लगे हैं। दशाश्वमेध के काली मंदिर से होकर संकरी गली में घुसते ही विदेशी फैशन की नई दुनिया नजर आने लगती है। हाथ से बने सजावटी सामान, लकड़ी के खिलौने, बनारस के मिजाज को बताने वाली इत्र की दूकानें विदेशियों का ध्यान खींचती हैं। विदेशी परिधानों की फैशन गैलरियां पर्यटकाें कदम ठिठकाने के लिए मजबूर करती है।
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अपनी महिला मित्र के साथ जापान से शुक्रवार को ही काशी पहुंचे ड्यूज ने गली में कुछ देर घूमने के बाद अफगानी फ्रेंचो (पाजामा) की खरीदारी की। रसिया से आईं आर्किटेक्ट ओला खादी का शाल पसंद करती रहीं, तो कुछ जापानी बालाएं कपड़े और सब्जियों की दूकानों पर भी दिखीं।
पांडेय घाट, खालिसपुरा, बंगाली टोला की गलियों के दोनों बाजू जापानी परिधानों से सजे बाजार में जापानी, अमेरिकी पर्यटक अपनी पसंद की तलाश करते रहे तो उन्हीं गलियों में विदेशी परिधानों की सिलाई के लिए खुले टेलरिंग शॉप की मशीनों के शोर भी नजरें फेरने के लिए मजबूर करते रहे।
टेलर मास्टर सतीश का कहना है कि जापानी युवक-युवतियां अफगानी फ्रेंचो, फ्रेंच जैकेट, फुल बाह की कियोनो पसंद करते हैं। इसलिए उनका ख्याल रखते हुए विदेशी परिधानों की डिजाइन तैयार की जा रही है।