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खुशखबरी : सारनाथ के महाबोधि मंदिर की कलाकृतियों में रंग भरेगा जापान

Wed, 28 Jun 2017 04:22 PM IST
amarujala.com, written by संतोष पांडेय
amarujala.com, written by संतोष पांडेय Updated Wed, 28 Jun 2017 04:22 PM IST
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 Japan will fill the artwork of Mahabodhi temple of Sarnath
महामहाबोधि मंदिर की कलाकृतियां - फोटो : अमर उजाला

विश्व भर में बौद्ध धर्मावलंबियों की आस्था से जुड़े सारनाथ के महाबोधि मंदिर की फीकी पड़ी अनोखी कलाकृतियों में जापान रंग भरेगा। जुलाई से इसके कायाकल्प की तैयारी है।

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फिलहाल, आठ दशक पुरानी चित्रकृतियों की चमक फ ीकी होने के साथ-साथ दीवारों में दरार बन गई है। कलाकृतियां धुंधली पड़ गई हैं। वर्ष भर पहले महाबोधि सोसाइटी के अनुरोध पर जापान सरकार के निर्देशन में आई विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय टीम ने कलाकृतियों का बारीकी से निरीक्षण करने के साथ दस्तावेजीकरण कराया था।
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तथागत के पवित्र अस्थि अवशेष को रखने के लिए 1931 में बनकर तैयार मंदिर का निर्माण 1929 में शुरू हुआ। महाबोधि बौद्ध मंदिर की भीतरी दीवारों पर भगवान बुद्ध के जन्म से लेकर परिनिर्वाण तक की विभिन्न मुद्राओं में पेंटिंग द्वारा अनोखी चित्रकारी की गई है।
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दीवारों में चित्रकारी की रंगत फ ीकी होने के साथ चप्पड़ (पपड़ी) छूट रही है। जगह-जगह धब्बे बन गए हैं। जापान से आई जांच टीम द्वारा भरोसा दिलाया गया था कि जल्द से जल्द इसके संरक्षण का काम शुरू कर दिया जाएगा।

महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया कोलकाता के हेड क्वार्टर से वरिष्ठ सचिव भिक्षु पी शिवली थेरो ने फ ोन पर बताया कि जापान सरकार से बात हुई है। जुलाई माह में छह सदस्यीय टीम आ रही है, जो यहां रहकर कलाकृतियों में रंग भरने का काम करेगी।

 

चित्रकारी में उकेरी गई हैं विभिन्न मुद्राएं

1931 में जब मंदिर बनकर तैयार हुआ तो महाबोधि सोसाइटी के अनुरोध पर प्रसिद्ध जापानी चित्रकार कोसेटसु नोसु के नेतृत्व में आई टीम ने यहां आकर तथागत के जन्म से लेकर परिनिर्वाण तक की विभिन्न मुद्राओं जैसे सांसारिक जीवन से मोहभंग, समाधि में जाना, ज्ञान की प्राप्ति, शिष्यों को उपदेश देते हुए जन्म-विवाह सहित अन्य चित्रों को दीवारों पर पेंटिंग के माध्यम से उकेरा था।

चार साल बाद 1936 में यह काम पूरा हुआ था। इससे जुड़ा शिलापट्ट चार भाषाओं पालि, अंग्रेजी, उर्दू और जापानी में लिखा है।

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