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जापान की मदद से संवरेगा हेरिटेज जोन
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Tue, 28 Apr 2015 02:24 AM IST
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काशी का हेरिटेज जोन जापान की मदद से संवरेगा। यहां की गलियों, घाटों सहित
पूरे पक्का महाल और सारनाथ क्षेत्र को संवार कर यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर
की सुविधाएं उपलब्ध कराने की कार्ययोजना दस दिन में तैयार कर जापान भेज दी
जाएगी। जापान इंटरनेशनल कोआपरेशन एजेंसी (जायका) अपने स्तर से आकलन कर जैसे
ही फंड रिलीज करेगी, काम शुरू कर दिया जाएगा। मंडलायुक्त सभागार में
सोमवार को यह जानकारी जिलाधिकारी प्रांजल यादव ने दी।
जापान दौरे से लौट कर आए महापौर रामगोपाल मोहले, मंडलायुक्त आरएम श्रीवास्तव, डीएम और नगर आयुक्त उमाकांत त्रिपाठी सोमवार को पत्रकारों से मुखातिब हुए। मंडलायुक्त ने बताया कि अस्सी से राजघाट तक 16 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और सारनाथ में बुनियादी सुविधाओं का विकास शीर्ष प्राथमिकता में है। इस क्षेत्र में जीरो होर्डिंग पॉलिसी लागू होगी। सारनाथ में बुद्धिस्ट टूरिस्ट एरिया को
विश्वस्तरीय बनाकर पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। पक्का महाल और सारनाथ क्षेत्र में जापान की कंपनियां पायलट प्रोजेक्ट लगाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराएंगी। क्योटो और काशी समझौते को बल देने के लिए आठ सदस्यीय समिति बनेगी। जिसमें तीन-तीन सदस्य काशी व क्योटो के, एक-एक भारत और जापान सरकार के होंगे। इसके साथ ही बीएचयू और क्योटो यूनिवर्सिटी के बीच हुए समझौते के तहत ज्यादा से ज्यादा शोध कार्य और शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देंगे।
बस बाधाएं न आएं, हम पीछे नहीं हटेंगे
जायका प्रोजेक्ट के भारत प्रमुख ईवाइ नाबुओ ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात में टोक्यो में कहा कि हमारे अनुभव अभी तक बनारस में अच्छे नहीं रहे हैं। हमने पैसा रिलीज किया लेकिन सीवर, कम्युनिटी टॉयलेट, धोबी घाट निर्माण सहित अन्य सारे काम अभी तक पूरे नहीं हो सके। इसके बावजूद हम अब भी आर्थिक और तकनीकी तौर पर हर मदद को तैयार हैं। आप इतना सुनिश्चित कराइए कि जिस काम के लिए पैसे मिलें, वह समय से पूरा हो। विवाद, विरोध या मुकदमेबाजी न हो, बाकी ये हमारा वादा है कि हम काशी के विकास में कदम पीछे नहीं हटाएंगे। वहां के विकास कार्य से संबंधित जो भी प्रस्ताव आएगा उसकी सौ प्रतिशत फंडिंग की व्यवस्था होगी।
जापान दौरे से लौट कर आए महापौर रामगोपाल मोहले, मंडलायुक्त आरएम श्रीवास्तव, डीएम और नगर आयुक्त उमाकांत त्रिपाठी सोमवार को पत्रकारों से मुखातिब हुए। मंडलायुक्त ने बताया कि अस्सी से राजघाट तक 16 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और सारनाथ में बुनियादी सुविधाओं का विकास शीर्ष प्राथमिकता में है। इस क्षेत्र में जीरो होर्डिंग पॉलिसी लागू होगी। सारनाथ में बुद्धिस्ट टूरिस्ट एरिया को
विश्वस्तरीय बनाकर पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। पक्का महाल और सारनाथ क्षेत्र में जापान की कंपनियां पायलट प्रोजेक्ट लगाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराएंगी। क्योटो और काशी समझौते को बल देने के लिए आठ सदस्यीय समिति बनेगी। जिसमें तीन-तीन सदस्य काशी व क्योटो के, एक-एक भारत और जापान सरकार के होंगे। इसके साथ ही बीएचयू और क्योटो यूनिवर्सिटी के बीच हुए समझौते के तहत ज्यादा से ज्यादा शोध कार्य और शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देंगे।
बस बाधाएं न आएं, हम पीछे नहीं हटेंगे
जायका प्रोजेक्ट के भारत प्रमुख ईवाइ नाबुओ ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात में टोक्यो में कहा कि हमारे अनुभव अभी तक बनारस में अच्छे नहीं रहे हैं। हमने पैसा रिलीज किया लेकिन सीवर, कम्युनिटी टॉयलेट, धोबी घाट निर्माण सहित अन्य सारे काम अभी तक पूरे नहीं हो सके। इसके बावजूद हम अब भी आर्थिक और तकनीकी तौर पर हर मदद को तैयार हैं। आप इतना सुनिश्चित कराइए कि जिस काम के लिए पैसे मिलें, वह समय से पूरा हो। विवाद, विरोध या मुकदमेबाजी न हो, बाकी ये हमारा वादा है कि हम काशी के विकास में कदम पीछे नहीं हटाएंगे। वहां के विकास कार्य से संबंधित जो भी प्रस्ताव आएगा उसकी सौ प्रतिशत फंडिंग की व्यवस्था होगी।