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Varanasi News: ज्योतिषशास्त्र के बिना मांगलिक कार्य करना गलत
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- ज्योतिषशास्त्र के ज्ञान के लिए पंचांग का ज्ञान जरूरी
- शास्त्रार्थ महाविद्यालय में दस दिवसीय ज्योतिष ज्ञान शिविर
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। राम मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर का मुहूर्त देने वाले डॉ.गणेश दत्त शास्त्री ने कहा कि ज्योतिषशास्त्र का काफी महत्व है। इसके बिना मांगलिक व शुभारंभ कार्य करना गलत माना जाता है। वह बुधवार को दशाश्वमेध स्थित श्री शास्त्रार्थ महाविद्यालय में दस दिवसीय ज्योतिष शिविर को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
ज्योतिषाचार्य डॉ. आमोद दत्त शास्त्री ने कहा कि भारतीय ज्योतिष प्रणाली से बने तिथि पत्र को पंचांग कहते हैं। पंचांग के पांच अंग हैं। तिथि, वार, नक्षत्र, योग तथा करण। समस्त पंचांगों की उत्पत्ति प्राचीन काल में धार्मिक क्रियाओं के समय निश्चित करने के लिए हुई है। बाद में सामाजिक उत्सव और वर्तमान काल में राजकीय महत्व के कार्यक्रम भी शामिल किए गए हैं। हमारे समस्त प्राचीन सामाजिक उत्सवों को भी धार्मिक स्वरूप दिया गया है। शिविर के प्रशिक्षक व ज्योतिष शास्त्र के विद्वान डॉ. संजय उपाध्याय ने कहा कि इन दस दिनों में विद्यार्थियों को पंचांग का अध्ययन करना सिखाया जाएगा। ताकि वे काल, तिथि, ग्रहण सहित अन्य ज्योतिषीय गणना क्षण भर में आसानी से कर सकें। कार्यक्रम संयोजक डॉ. पवन कुमार शुक्ल ने बताया कि शिविर में पहले दिन 65 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। विशिष्ट विद्वानों में डॉ. विनोद राव पाठक, डॉ. उमाशंकर त्रिपाठी व डॉ. शेषनारायण मिश्र ने भी विचार व्यक्त किए।
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- शास्त्रार्थ महाविद्यालय में दस दिवसीय ज्योतिष ज्ञान शिविर
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। राम मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर का मुहूर्त देने वाले डॉ.गणेश दत्त शास्त्री ने कहा कि ज्योतिषशास्त्र का काफी महत्व है। इसके बिना मांगलिक व शुभारंभ कार्य करना गलत माना जाता है। वह बुधवार को दशाश्वमेध स्थित श्री शास्त्रार्थ महाविद्यालय में दस दिवसीय ज्योतिष शिविर को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
ज्योतिषाचार्य डॉ. आमोद दत्त शास्त्री ने कहा कि भारतीय ज्योतिष प्रणाली से बने तिथि पत्र को पंचांग कहते हैं। पंचांग के पांच अंग हैं। तिथि, वार, नक्षत्र, योग तथा करण। समस्त पंचांगों की उत्पत्ति प्राचीन काल में धार्मिक क्रियाओं के समय निश्चित करने के लिए हुई है। बाद में सामाजिक उत्सव और वर्तमान काल में राजकीय महत्व के कार्यक्रम भी शामिल किए गए हैं। हमारे समस्त प्राचीन सामाजिक उत्सवों को भी धार्मिक स्वरूप दिया गया है। शिविर के प्रशिक्षक व ज्योतिष शास्त्र के विद्वान डॉ. संजय उपाध्याय ने कहा कि इन दस दिनों में विद्यार्थियों को पंचांग का अध्ययन करना सिखाया जाएगा। ताकि वे काल, तिथि, ग्रहण सहित अन्य ज्योतिषीय गणना क्षण भर में आसानी से कर सकें। कार्यक्रम संयोजक डॉ. पवन कुमार शुक्ल ने बताया कि शिविर में पहले दिन 65 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। विशिष्ट विद्वानों में डॉ. विनोद राव पाठक, डॉ. उमाशंकर त्रिपाठी व डॉ. शेषनारायण मिश्र ने भी विचार व्यक्त किए।
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