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स्वदेशी तकनीक से बनाएं इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 03 Jun 2016 01:34 AM IST
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इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप सोसाइटी ऑफ इंडिया के अधिवेशन के पहले दिन मौजूद विशेषज्ञ।
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भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. आर. चिदंबरम ने कहा कि हमें ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी तकनीक पर ज्यादा से ज्यादा जोर देना होगा।
इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से लेकर एडवांस एनालिटिकल इंस्ट्रूमेंट तक भारत में बनाए जाने चाहिए। उन्होंने ये बातें आईआईटी बीएचयू के धातुकीय अभियांत्रिकी विभाग की ओर से गुरुवार को कैंटोनमेंट क्षेत्र के एक होटल में शुरू हुए इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप सोसाइटी ऑफ इंडिया के तीन दिवसीय अधिवेशन के पहले दिन बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक उपकरणों के लिहाज से भारत सबसे बड़े बाजार के रूप में उभर रहा है। हमारे पास हर तरह की उच्च गुणवत्तायुक्त मशीनें, उपकरण बनाने की क्षमता है। बावजूद इसके इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप हमें विदेश से आयात करना पड़ता है। कोशिश करनी होगी कि हम ऐसे उपकरण अपने देश में भी बनाएं।
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उन्होंने बताया कि इसी मुद्दे पर नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी नई दिल्ली की ओर से 20 जून को दुनिया भर के वैज्ञानिकों की बैठक बुलाई गई है। इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त उद्यम के अंतर्गत एडवांस एनालिटिकल इंस्ट्रूमेंट बनाए जाने पर सहमति बनेगी। कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप के अनुसंधान में सहयोग करने की बात कही। स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. आरके मंडल ने किया। सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. एम. विजयलक्ष्मी ने इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी विधा के क्षेत्र हो रहे शोध के बारे में बताया। प्रो.जीवीएस शास्त्री ने भी विचार रखे। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. एनके मुखोपाध्याय ने किया।
इस अवसर पर अमेरिका के प्रो. बेरी कार्टर को एनएन दासगुप्ता अवार्ड, प्रो. आरपी टंडन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, प्रो. एके श्रीवास्तव, डॉ. आर दिवाकर, डॉ. पी घोषाल, डॉ. आर तिवारी, डॉ. आरएस तिवारी को फेलो और डॉ. पी. सुंदरम को सर्विस अवार्ड से नवाजा गया।
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इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से लेकर एडवांस एनालिटिकल इंस्ट्रूमेंट तक भारत में बनाए जाने चाहिए। उन्होंने ये बातें आईआईटी बीएचयू के धातुकीय अभियांत्रिकी विभाग की ओर से गुरुवार को कैंटोनमेंट क्षेत्र के एक होटल में शुरू हुए इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप सोसाइटी ऑफ इंडिया के तीन दिवसीय अधिवेशन के पहले दिन बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
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उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक उपकरणों के लिहाज से भारत सबसे बड़े बाजार के रूप में उभर रहा है। हमारे पास हर तरह की उच्च गुणवत्तायुक्त मशीनें, उपकरण बनाने की क्षमता है। बावजूद इसके इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप हमें विदेश से आयात करना पड़ता है। कोशिश करनी होगी कि हम ऐसे उपकरण अपने देश में भी बनाएं।
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उन्होंने बताया कि इसी मुद्दे पर नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी नई दिल्ली की ओर से 20 जून को दुनिया भर के वैज्ञानिकों की बैठक बुलाई गई है। इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त उद्यम के अंतर्गत एडवांस एनालिटिकल इंस्ट्रूमेंट बनाए जाने पर सहमति बनेगी। कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप के अनुसंधान में सहयोग करने की बात कही। स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. आरके मंडल ने किया। सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. एम. विजयलक्ष्मी ने इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी विधा के क्षेत्र हो रहे शोध के बारे में बताया। प्रो.जीवीएस शास्त्री ने भी विचार रखे। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. एनके मुखोपाध्याय ने किया।
इस अवसर पर अमेरिका के प्रो. बेरी कार्टर को एनएन दासगुप्ता अवार्ड, प्रो. आरपी टंडन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, प्रो. एके श्रीवास्तव, डॉ. आर दिवाकर, डॉ. पी घोषाल, डॉ. आर तिवारी, डॉ. आरएस तिवारी को फेलो और डॉ. पी. सुंदरम को सर्विस अवार्ड से नवाजा गया।