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15 अगस्त विशेष: ऐसी थी बनारस में आजादी की पहली सुबह, जानिए कुछ रोचक बातें

Tue, 14 Aug 2018 10:35 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 14 Aug 2018 10:35 AM IST
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Independence day the first morning of varanasi after freedom
घाटों और मंदिरों के आस पास फहराया था तिरंगा - फोटो : self
स्वतंत्रता दिवस आने वाला है, दिलों में देशभक्ति हिलोरे मारने लगी है। लेकिन आप में से कुछ लोगों को ही पता होगा कि 15 अगस्त 1947 की सुबह बनारस में क्या-क्या हुआ था। आगे की स्लाइड्स में देखें..


 
Independence day the first morning of varanasi after freedom
kashi - फोटो : अमर उजाला
आजादी की पहली किरण का स्वागत गंगा के किनारे आरती उतार कर की गई। सुबह ए बनारस की यह सुबह हर बनारसी के लिए यादगार थी। आजादी की पहली सुबह और उगते भगवान भाष्कर से आशीष लेकर और आरती व पूजन के बाद घाटों पर तिरंगा शान से लहरा उठा। वहीं मंदिरों में भी रात से ही शंखनाद और घंटा घडि़याल बजते रहे जो आजादी की सुबह का स्वागत करने के लिए लालायित थे। 
 
Independence day the first morning of varanasi after freedom
amarujala - फोटो : amarujala

काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि भरत के नाम पर भारत का नाम पड़ा है और हम भारतवंशी हैं। आजादी की वो सुनहरी सुबह की यादें अपने बुजुर्गों से सुनता रहा हूं। 15 अगस्त 1947 को बाबा विश्वनाथ मंदिर के अलावा शहर के कई प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की गई। मंदिरों के आस पास के घरों पर झंडे फहराए गए। यही नहीं गंगा घाट किनारे भी लोगों ने स्वयं तिरंगा फहराया था।  

 
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Independence day the first morning of varanasi after freedom
लहराया गया 150 फीट ऊंचा तिरंगा - फोटो : अमर उजाला
भानू मिश्र ने कहा कि घर के बुजुर्ग बताते थे कि वह दौर काफी डरावना और भयावह था। गुलामी की जंजीरों में जकड़े भारतीयों ने काफी संघर्ष किया। कोई लाल टोपी वाला ब्रिटिश सरकार का सिपाही गली में आता था तो उसके आने की खबर मात्र से लोग घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद कर लेते थे। कोई उनके सामने पड़ना नहीं चाहता था। जब कभी आजादी के लिए आंदोलन होता था तो लोग चुपके से छिपकर आंदोलन में हिस्सा लेते थे। कई बार अंग्रेजों के डंडे भी खाने पड़ते थे। 

 
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Independence day the first morning of varanasi after freedom
freedom
केके शर्मा ने कहा कि लोगों को उस समय राहत मिली जब रेडियो पर देश की आजादी की सूचना प्रसारित की गई। इसके बाद गंगा घाटों और मंदिरों के आस पास जश्न का माहौल रहा। लोगों ने अपने घरों में हरे, सफेद और केसरिया रंग के कपड़ों को काटकर सिलाई करके झंडा बनाके फहराया था। लोगो के घरों में त्योहार की तरह 15 अगस्त मनाया गया था। घरों में खीर पूड़ी बनाके लोगों ने 15 अगस्त को उत्सव के रूप में मनाया था। मानों कई सालों बाद उन्हें आजाद भारत की खुली हवा में गंगा किनारे सांस लेने का मौका मिला था। 
 
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