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पूर्वांचल में ‘मानसून एक्सप्रेस’ पर ब्रेक
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 29 Jun 2016 01:46 AM IST
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पिछले दिनों हुई बारिश ने कुछ समय के लिए लोगों को गर्मी से राहत तो दी मगर इस बारिश ने ‘मानसून एक्सप्रेस’ पर कुछ दिनों के लिए ब्रेक लगा दिया। मौसम विभाग का कहना है कि प्री मानसून बारिश के चलते मानसून दस से 15 दिन आगे चला गया है। जिस मानसून को 20 जून के आसपास आ जाना चाहिए था, अब वह जुलाई के पहले सप्ताह में पूर्वांचल में सक्रिय होगा। मौसम विभाग ने इस साल सामान्य बारिश की भविष्यवाणी की है। बहरहाल, बनारस पर बादलों का दिल पसीजा तो है मगर झूमकर बरसना अभी बाकी है। एक जुलाई के बाद पूर्वांचल में मानसून के पूरी तरह से सक्रिय होेने की संभावना जताई गई है।
पूरे दिन कड़क धूप के बाद अचानक पिछले एक सप्ताह से दोपहर बाद बादलों की आमद हो रही है। इससे न केवल गर्मी से राहत मिल रही है बल्कि बारिश की उम्मीद भी जग रही है। बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. राजीव भाटला की मानें तो जुलाई के 30 जून के बाद बारिश होगी। यह बारिश तेज तो नहीं होगी मगर लंबे समय तक रहने के आसार हैं, जिससे मौसम खुशगवार रहेगा। पिछले सालों के मुकाबले इस बार मानसून बेहतर रहेगा। मौसम वैज्ञानिकों ने इस साल पूर्वांचल में 800 मिमी से ज्यादा बारिश की संभावना जताई है।
खरीफ फसलों की बुआई पर असर ः देश में मुख्यत: खरीफ, रबी व जायद तीन फसली ऋतुएं हैं। मई से जुलाई के बीच खरीफ फसलों की बुआई होती है जबकि सितंबर से अक्तूबर के बीच फसलों की कटाई होती है। इस बार मानसून की लेटलतीफी की वजह से खरीफ फसलों की 25 फीसद कम बुआई हुई है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार खरीफ की फसल दक्षिण पश्चिम मानसून के आगमन के समय बोई जाती है और उनके लौटने के बाद काटी जाती है। प्रमुख खरीफ फसलें : ज्वार, बाजरा, धान, मक्का, मूंग, सोयाबीन, लोबिया, मूंगफली, कपास, जूट, गन्ना, तंबाकू आदि।
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पूरे दिन कड़क धूप के बाद अचानक पिछले एक सप्ताह से दोपहर बाद बादलों की आमद हो रही है। इससे न केवल गर्मी से राहत मिल रही है बल्कि बारिश की उम्मीद भी जग रही है। बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. राजीव भाटला की मानें तो जुलाई के 30 जून के बाद बारिश होगी। यह बारिश तेज तो नहीं होगी मगर लंबे समय तक रहने के आसार हैं, जिससे मौसम खुशगवार रहेगा। पिछले सालों के मुकाबले इस बार मानसून बेहतर रहेगा। मौसम वैज्ञानिकों ने इस साल पूर्वांचल में 800 मिमी से ज्यादा बारिश की संभावना जताई है।
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खरीफ फसलों की बुआई पर असर ः देश में मुख्यत: खरीफ, रबी व जायद तीन फसली ऋतुएं हैं। मई से जुलाई के बीच खरीफ फसलों की बुआई होती है जबकि सितंबर से अक्तूबर के बीच फसलों की कटाई होती है। इस बार मानसून की लेटलतीफी की वजह से खरीफ फसलों की 25 फीसद कम बुआई हुई है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार खरीफ की फसल दक्षिण पश्चिम मानसून के आगमन के समय बोई जाती है और उनके लौटने के बाद काटी जाती है। प्रमुख खरीफ फसलें : ज्वार, बाजरा, धान, मक्का, मूंग, सोयाबीन, लोबिया, मूंगफली, कपास, जूट, गन्ना, तंबाकू आदि।
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