फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   IIT BHU researcher designed ergonomic chair for weavers will save from back pain

वाराणसी: अब बुनकरों को पीठ दर्द से बचाएगी एर्गोनॉमिक कुर्सी, आईआईटी बीएचयू के शोधकर्ता ने डिजाइन की

Sat, 07 Aug 2021 12:14 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 07 Aug 2021 12:14 AM IST
सार

इस कुर्सी से बुनकर्मियों में एमएसडी का खतरा कम होगा। 12 घंटे लगातार काम करने से ऐसी समस्या होती है। साइज के हिसाब से सेट कर सकेंगे।
 

विज्ञापन
IIT BHU researcher designed ergonomic chair for weavers will save from back pain
काशी हिंदू विश्वविद्यालय।

विस्तार

मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग (औद्योगिक प्रबंधन), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, बीएचयू आईआईटी) की एक शोध टीम ने पिटलूम का उपयोग करने वाले बुनकरों के लिए एर्गोनॉमिक रूप से डिजाइन की गई कुर्सी बनाई है। टीम के अनुसार यह सीट बुनकरों की पीठ को सहारा देने और जांघों को आराम देने में मदद करेगी। इससे बुनकरों में मसक्यूलोस्केलेटल डिसऑर्डर (एमएसडी) होने का खतरा कम होगा।

विज्ञापन


मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. डॉ. प्रभाष भारद्वाज ने बताया कि वाराणसी के हथकरघा उद्योग में बुनकरों को एक जगह बैठकर रोजाना 12 घंटे लगातार काम करना पड़ता है। इस वजह से उन्हें मसक्यूलोस्केलेटल डिसऑर्डर का सामना करना पड़ता है। सर्वे के मुताबिक ज्यादातर बुनकरों को कमर और जांघ में दर्द की शिकायत रहती है।
विज्ञापन


इसका कारण बुनकरों के पास उचित बैक सपोर्ट न होना है। वो समतल लकड़ी के तख्त पर बैठते हैं। ऐसे में काम के दौरान उन्हें आराम देने के लिए एक सीट तैयार की गई थी। यह अधिक देर तक काम करने में भी मदद करेगा। बनारस हथकरघा उद्योग के विकास पर काम कर रहे और एर्गोनॉमिक चेयर की डिजाइन बनाने वाली संस्थान के मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के रिसर्च स्कॉलर एम कृष्ण प्रसन्ना नाइक ने बताया कि रिसर्च में खुलासा हुआ है कि न केवल बूढ़े बल्कि युवा बुनकर भी एमएसडी का सामना कर रहे हैं। एर्गोनॉमिक रूप से डिजाइन की गई कुर्सी उनकी मदद करेगी। इसका निर्माण भी आसान है। कोई भी बुनकर इसे अपने करघे के लिए बना सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

पहले लिया बुनकरों का नाप
एम कृष्णा ने बताया कि पहले उन्होंने बुनकरों की लंबाई, चौड़ाई, वजन, बैठने पर कमर की साइज, पीठ के आकार का नाप लिया। उसके बाद लकड़ी से कुर्सी की डिजाइन तैयार की गई है। इस कुर्सी में ऐसी व्यवस्था है जिससे बुनकर उसे अपनी साइज के हिसाब से सेट कर सकता है। रामनगर स्थित सहकारी समिति के अध्यक्ष अमरेश कुशवाहा ने बताया कि हम इस सीट को अपने सभी मौजूदा करघे के लिए उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed