आईआईटी बीएचयू: 15वां दीक्षांत समारोह 31 को, कुमार मंगलम बिड़ला 62 टॉपर्स को देंगे 125 मेडल्स-प्राइज
आईआईटी बीएचयू में कुमार मंगलम बिड़ला 62 टॉपर्स को 125 मेडल्स-प्राइज देंगे। 31 अक्तूबर को 15वां दीक्षांत समारोह मनाया जाएगा। बीओजी अध्यक्ष डॉ. कोटा हरिनारायण और निदेशक प्रो. अमित पात्रा के साथ पहली बार बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी शामिल होंगे।
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आईआईटी बीएचयू में 31 अक्तूबर को स्वतंत्रता भवन में 15वां दीक्षांत समारोह होगा। आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला मुख्य अतिथि होंगे। वे 62 टॉपर्स को 125 मेडल देकर सम्मानित करेंगे। साथ में बोर्ड ऑफ गवर्नर के अध्यक्ष डॉ. कोटा हरिनारायण, निदेशक प्रो. अमित पात्रा और पहली बार बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी भी होंगे।
दीक्षांत समारोह में बीटेक, एमटेक, आईडीडी, पीएचडी सहित छह कटेगरी में 2,048 विद्यार्थियों को उपाधियां दी जाएंगी। वहीं, ओवरऑल प्रदर्शन, संगठनात्मक क्षमता और नेतृत्व कौशल जैसी उपलब्धियों के लिए डायरेक्टर्स और प्रेसीडेंट्स गोल्ड मेडल दिए जाएंगे। बुधवार को इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में ये जानकारी संस्थान के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने पत्रकारों को दी। उन्होंने बताया कि बिड़ला परिवार का विश्वविद्यालय की उन्नति में काफी योगदान रहा है। एशिया के सबसे ऊंचे शिखर वाले विश्वनाथ मंदिर सहित कई हॉस्टलों के निर्माण में बिड़ला परिवार ने योगदान दिया।
बीटेक में मिलेंगी 1106 उपाधियां और 25 नकद पुरस्कार मिलेंगे
दीक्षांत समारोह में 62 मेधावियों को 97 गोल्ड मेडल दिए जाएंगे। इसके अलावा दो सिल्वर मेडल और 25 नकद पुरस्कार भी दिए जाएंगे। कई विद्यार्थियों को एक से ज्यादा मेडल मिलेंगे। बीटेक में 1106 उपाधियां वितरित की जाएंगी। वहीं, इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री (आईडीडी) में 385, एमटेक व एमफार्मा में 322, पीएचडी में 182, एमएससी में 39 और बीआर्क में 14 उपाधियां दी जाएंगी।
बीटेक की सबसे ज्यादा 166 डिग्रियां केमिकल इंजीनियरिंग को
प्रेसवार्ता में शामिल डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. देवेंद्र सिंह ने बताया कि कार्यक्रम सुबह 10 बजे से शुरू होगा। पहले हाफ में मेडल्स और दूसरे सत्र में डिग्रियां दी जाएंगी। बीटेक की सबसे ज्यादा 166 डिग्रियां केमिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के हिस्से में आई हैं। वहीं, 145 डिग्रियां मैकेनिकल इंजीनियरिंग और 143 डिग्रियां इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के छात्रों को दी जाएंगी। आईडीडी में टॉप पर मैथेमेटिकल साइंस को 59, एमटेक में फार्मास्यूटिकल को 46 और पीएचडी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को सबसे ज्यादा 19 उपाधियां दी जानी हैं। प्रेसवार्ता में एसोसिएट डीन प्रो. कौशिक चटोपाध्याय, कुलसचिव सुमित कुमार बिस्वास, प्रो. प्रद्मुम घोष, प्रो. विनीता चंद्रा, संयुक्त कुलसचिव स्वाति बिस्वास आदि मौजूद रहीं।
आईआईटी के दीक्षांत समारोह में 26 छात्राओं को गोल्ड सहित सभी मेडल और प्राइज दिए जाएंगे। छात्राओं में सबसे ज्यादा 10 गोल्ड और एक सिल्वर मेडल हरजस कौर को दिया जाएगा। इसके साथ ही इन्हें तीन अवाॅर्ड भी मिलेंगे। इसके बाद श्रेया श्रीवास्तव को पांच गोल्ड, तनिशा अग्रवाल को छह, रेशमा खातून को चार और अपूर्वा कशिश को तीन गोल्ड मेडल दिए जाएंगे। अपूर्वा को ही आदित्य कुमार अवस्थी एंडोमेंट अवाॅर्ड के तहत एक लाख रुपये दिए जाएंगे।
आईएएस बनना है लखादिवे मेहुल कुमार का सपना, 9.36 सीजीपीए से हुए सफल
आईआईटी बीएचयू के दीक्षांत समारोह में डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल पाने वाले मेधावियों की सूची में नाम आने के बाद लखादिवे मेहुल कुमार राजकुमार बहुत खुश हैं। वह सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे हैं। लखादिवे ने बताया कि आईएएस बनने का सपना है। लखादिवे ने सिविल इंजीनियरिंग से इंट्रीग्रेटेड डुअल डिग्री की पढ़ाई की। उन्हें 9.36 सीजीपीए मिला है। कनाडा में इंटर्नशिप कर चुके लखादिवे ने बताया कि प्रथम सेमेस्टर के दौरान कोविड होने की वजह से ऑनलाइन पढ़ाई करनी पड़ी। इस वजह से कुछ अंक कम आए। मूल रूप से महाराष्ट्र निवासी लखादिवे के पिता लखादिवे राजकुमार मनमथप्पा महाराष्ट्र में प्रोफेसर और माता लखादिवे मीनाक्षी राजकुमार स्टेट जीएसटी आफिसर है।
आईआईटी बीएचयू में बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में सफलता पाकर डायरेक्टर गोल्ड मेडल पाने वाले प्रतीक त्रिपाठी के पिता प्रशांत कुमार त्रिपाठी और माता रचिता नंदा डॉक्टर हैं। वह इस समय गूगल में साॅफ्टवेयर इंजीनियर हैं। आईआईटी बीएचयू से दीक्षांत समारोह में डायरेक्टर मेडल दिए जाने की सूचना मिलने के बाद प्रतीक और उनका परिवार बहुत खुश हैं। अभी फिलहाल वह इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
नोएडा में चार महीने से क्वालकॉम में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर के तौर पर नौकरी कर रहीं हरजस कौर को आईआईटी बीएचयू के दीक्षांत समारोह में प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल दिया जाएगा। इलेक्ट्राॅनिक्स इंजीनियरिंग ब्रांच में बीटेक कर चुकीं हरजस सहारनपुर की रहने वाली हैं। पिता केमिस्ट और माता शिक्षिका हैं। हरजस का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स में कुछ समय बिताने के बाद अब सिविल सेवा की ओर रुख करूंगी। उनका कहना है कि शुरू से ही सपना था कि इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में कुछ नया किया जाए।
मैथ्स में भी काफी रुचि थी। दाखिले के लिए कई संस्थान थे दिमाग में लेकिन बीएचयू मेरी पहली पसंद थी क्योंकि बीएचयू का इलेक्ट्राॅनिक्स विभाग देश में सर्वश्रेष्ठ है। हरजस ने आगे कहा कि यहां उनका सफर शुरू में रोलर कोस्टर राइड जैसा रहा। यानी यहां कई टेढ़े-मेढ़े घुमावदार रास्ते की सवारी हुई। लेकिन, प्रोफेसर्स काफी सहयोगी रहे। मेरी पूरी यात्रा में तो उन्होंने मेरे लिए रास्ता आसान कर दिया और मुझे ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। आने वाले समय में यूपीएससी की फील्ड को भी एक्सपलोर करना चाहूंगी। इस अवॉर्ड को लेकर मेरी उम्मीद तो थी और शायद ये बहुत सारे अच्छे आशीर्वाद का ही फल है। माता सरबजीत कौर शिक्षिका और पिता चरनजीत सिंह केमिस्ट हैं। भाई एमएनएनआईटी इलाहाबाद में इंजीनियरिंग का छात्र है।