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महादेव के भक्तों से मांगता हूं माफी... : वाचस्पति बोले- मंदिर प्रशासन के कहने पर ढंकी गई चल रजत प्रतिमा

Thu, 13 Mar 2025 03:27 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 13 Mar 2025 03:27 AM IST
सार

काशी में रंगोत्सव के दाैरान मंदिर के गर्भगृह में प्रतिमा की पालकी जमीन पर रखी गई थी। इसको लेकर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के बेटे वाचस्पति ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है।

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I apologize to devotees of kashi vishwanath Vachaspati said movable silver idol was covered
विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के बेटे वाचस्पति तिवारी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मैं, काशीवासियों और महादेव के भक्तों से माफी मांगता हूं, जो उनको बाबा की चल रजत प्रतिमा के दर्शन नहीं करा सका। उनको बाबा की शोभायात्रा में शामिल होने का अवसर नहीं मिल सका। दबाव के कारण ही चल रजत प्रतिमा को ढंक कर ले जाया गया।

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यह कहना है श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के बेटे वाचस्पति तिवारी का। वाचस्पति ने बुधवार को टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर पत्रकारों से बात की और कहा कि माता गौरा के गौने का लोकाचार गत सात मार्च से शुरू हुआ था।
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10 मार्च को रंगभरी एकादशी पर निकलने वाली गौने की पालकी की सूचना एवं निमंत्रण पत्र तीन मार्च को ही विश्वनाथ मंदिर प्रशासन सहित संबंधित सभी विभागों, काशी के सभी विशिष्ट नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों को दे दी गई थी। अधिकारियों के कहने पर महंत आवास से समय से पहले प्रतिमा मंदिर पहुंचाई गई।

मंदिर के गर्भगृह में प्रतिमा की पालकी जमीन पर रखी गई और यह आस्थावानों का अपमान है। गौने के लोकाचार के दौरान प्रशासन ने महंत आवास में परंपरागत आयोजन और पालकी यात्रा को रोकने के लिए 168 बी की नोटिस दिया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि रविवार की देर रात मंदिर प्रशासन ने अपने कार्यालय में बुलाया और कहा कि आपको मंदिर प्रशासन मंदिर परिसर में जगह उपलब्ध कराएगा, जहां से आप काशीवासियों सहित अपने समय पर सभी लोकाचार को पूरा करेंगे। महंत आवास से प्रतिमा को मंदिर लाकर रख तो दिया गया लेकिन मंदिर की ओर से दूसरी प्रतिमा को गर्भगृह में भेजा गया।

लोकाचार के बाद सीधे गर्भगृह में ही विराजमान कराई जाती रही है प्रतिमा
वाचस्पति ने कहा कि विदाई लोकाचार के बाद प्रतिमा गर्भगृह में ही रखी जाती थी, लेकिन उसे मंदिर में रखवा दिया गया। मंदिर प्रशासन ने परंपरागत प्रतिमा तक काशीवासियों को नहीं जाने दिया। शंकराचार्य चौक पर मंदिर प्रशासन ने परंपरागत प्रतिमा रखने का भ्रम फैलाया।

बोले अधिकारी
अब तो रंगभरी का उत्सव समाप्त हो चुका है। इस मामले में कुछ नहीं कहना है। - विश्वभूषण मिश्र, सीईओ, विश्वनाथ मंदिर

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