फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Hindi Hain Hum: Kabir attacked social malpractices while enriching Hindi literature.

कबीर ने हिंदी साहित्य को समृद्ध करने के साथ ही सामाजिक कुरीतियों पर किया प्रहार

Thu, 20 Aug 2020 02:42 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 20 Aug 2020 02:42 PM IST
विज्ञापन
Hindi Hain Hum: Kabir attacked social malpractices while enriching Hindi literature.
saint kabir das - फोटो : social media

15वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और संत कबीर दास हिंदी साहित्य के भक्तिकालीन युग में ज्ञानाश्रयी निर्गुण शाखा की काव्यधारा केप्रवर्तक थे। संत कबीर दास हिंदी साहित्य के भक्ति काल के इकलौते ऐसे कवि हैं जो आजीवन समाज और लोगों के बीच व्याप्त आडंबरों पर कुठाराघात करते रहे। यह कहना है कबीर प्राकट्य स्थल के प्रबंधक गोविंद दास शास्त्री का।

विज्ञापन

कबीरदास कर्म प्रधान समाज के पैरोकार थे और इसकी झलक उनकी रचनाओं में साफ झलकती है। लोक कल्याण हेतु ही मानों उनका समस्त जीवन था। कबीर को वास्तव में एक सच्चे विश्व प्रेमी का अनुभव था। कबीर की सबसे बड़ी विशेषता उनकी प्रतिभा में अबाध गति और अदम्य प्रखरता थी।
विज्ञापन



समाज में कबीर को जागरण युग का अग्रदूत कहा जाता है। डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी ने लिखा है कि साधना के क्षेत्र में वे युग-युग के गुरु थे। उन्होंने संत काव्य का पथ प्रदर्शन कर साहित्य क्षेत्र में नव निर्माण किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


कबीरदास जी एक महान कवि और समाज सुधारक थे। इन्होनें अपने साहित्य से लोगों को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इसके साथ ही समाज में फैली कुरीतियों पर जमकर प्रहार किया है। कबीरदास जी सादा जीवन जीने में यकीन रखते थे वे अहिंसा, सत्य, सदाचार गुणों के प्रशंसक थे।

कबीरदास जैसे कवियों का भारत में जन्म लेना गौरव की बात है। कबीर दास जी ने अपने काव्य के जरिए समाज में फैली कुरीतियों को दूर किया है। इसके साथ ही सामाजिक भेदभाव और आर्थिक शोषण का विरोध किया है।

महान विद्वान कवि कबीरदास जी ने अपने जीवन में किसी तरह की शिक्षा नहीं ली थी। लेकिन उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों, कल्पना शक्ति और अध्यात्म कल्पना शक्ति के बल पर पूरी दुनिया को वो ज्ञान दिया। जिसे अमल कर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में सफलता हासिल कर सकता है।

उन्होंने अपने विचारों से लोगों को प्रेम की परिभाषा सिखाई एवं उनके मन में सकारात्मक भाव पैदा किए। वे हिन्दी साहित्य के महिमामंडित व्यक्तित्व थे जिन्होंने न सिर्फ अपनी रचनाओं के माध्यम से हिन्दी साहित्य को समृद्ध बनाया बल्कि समाज में फैली तमाम कुरीतियों को
दूर करने के अथक प्रयास किए।

हिन्दी साहित्य में उनके अतुलनीय योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता है। उनका कहा गया किसी भी तुलना से ऊपर और प्रेरणादायक है।

हिंदी साहित्य में नहीं हुआ कबीर से बड़ा मानवतावादी
सच्चे गुरु की प्रशंसा से गुंजायमान लघु और सहज तरीकों से कविताओं को उन्होंने बनाया था। अनपढ़ होने के बावजूद भी उन्होंने अवधी, ब्रज और भोजपुरी के साथ हिन्दी में अपनी कविताएं लिखी थी। कबीर के द्वारा रचित सभी कविताएं और गीत कई सारी भाषाओं में मौजूद हैं। डॉ.  पारसनाथ तिवारी लिखते हैं।

सच्ची बात यह है कि हिन्दी साहित्य में कबीर से बड़ा मानवतावादी कोई नहीं हुआ। उन्होंने तत्कालीन भारतीय समाज में प्रचलित समस्त अंधविश्वासों, रूढिय़ों तथा मिथ्या सिद्धान्तों द्वारा प्रचारित सामाजिक विषमताओं का मूलोच्छेद करने का बीड़ा उठाया और निर्भयता पूर्वक पाखंडों पर प्रहार किया।

बोलचाल की भाषा का किया प्रयोग
कबीरदास ने बोलचाल की भाषा का ही प्रयोग किया है। भाषा पर कबीर का जबरदस्त अधिकार था। वे वाणी के डिक्टेटर थे। जिस बात को उन्होंने जिस रूप में प्रकट करना चाहा है, उसे उसी रूप में कहलवा लिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed