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Varanasi: हिंदवी स्वराज नाटक में दिखी मुगलों के साथ शिवाजी के संघर्ष की गाथा, कलाकारों ने दी जीवंत प्रस्तुति
Mon, 04 Mar 2024 12:33 PM IST
अमन विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Mon, 04 Mar 2024 12:33 PM IST
सार
Varanasi News: वाराणसी के रुद्राक्ष प्रेक्षागृह में आयोजित हिंदवी स्वराज को कलाकारों ने जीवंत तरीके से प्रस्तुत किया। युद्धभूमि में जब तानाजी बलिदान हो गए तो शिवाजी के मुंह से निकला- गढ़ तो आया पर सिंह गया। शिवाजी का आगरा से वापस आना किसी चमत्कार से कम नहीं था।
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नाटक मंचन के दौरान भावपूर्ण मुद्रा में कलाकार।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
काशी विश्वनाथ मंदिर उखाड़ फेंकने से व्यथित हुए गागा भट्ट महाराष्ट्र आकर शिवाजी से मिले और बताया कि मंदिरों की मूर्तियों से मस्जिदों की सीढ़ियां बन रही हैं। आप राजा बनकर समाज को प्रेरणा दें। छत्रपति शिवाजी का एक ही प्रयास था कि समाज का खोया आत्मविश्वास पुनः जागृत हो। शुद्ध मन से किया गया प्रयत्न सफल होता है, यही कारण है कि शिवाजी को पराक्रमी साथी भी मिले।
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सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के मंच पर हिंदवी स्वराज को कलाकारों ने जीवंत किया। छत्रपति शिवाजी का जीवन संघर्ष और उनकी परिकल्पनाओं से दर्शक रूबरू हुए। शक्तिशाली मुगल शासन के आगे उपमहाद्वीप के एक से एक राज्य घुटने टेक रहे थे। वहीं, महाराष्ट्र में शिवाजी का उदय भारतीय जनमानस के लिए बड़े संबल के रूप में सामने आया।
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मुगलों के खिलाफ खड़े होकर शिवाजी ने डटकर उनका मुकाबला किया। बेटे रायबा की शादी का निमंत्रण देने आए तानाजी ने सिंहगढ़ जीतना जरूरी समझा। युद्धभूमि में जब तानाजी बलिदान हो गए तो शिवाजी के मुंह से निकला- गढ़ तो आया पर सिंह गया। शिवाजी का आगरा से वापस आना किसी चमत्कार से कम नहीं था।
ऐतिहासिक नाट्य मंचन को लोगों ने सराहा
अफजल खान के सम्मुख शरणागत होने का नाटक रचा और उसका वध कर दिया। शाइस्ता खान का प्रसंग भी आत्मविश्वास पैदा करने वाला था। नाटक का लेखन, परिकल्पना एवं निर्देशन प्रवीण व्यास ने किया। कार्यकारी निर्माता जयंती कुंडू ने कहा कि नाटक के माध्यम से बताया गया कि शिवाजी का कोई धार्मिक विद्वेष या वैमनस्य नहीं था। ऐतिहासिक नाट्य मंचन से समाज को अलग प्रतिबिंब दिखाने की कोशिश की गई।
मुख्य अतिथि दीपक बजाज, विशिष्ट अतिथि संजीव अग्रवाल व महेशचंद्र श्रीवास्तव थे। शिवाजी की भूमिका प्रसन्न हमदर्दी, जीजाबाई की भूमिका नूपुर, औरंगजेब का किरदार यश योगी और तानाजी की भूमिका वीरेंद्र सिंह ने निभाई। मंच सज्जा श्याम कुमार साहनी, वेशभूषा नलिनी आर जोशी और संगीत काजल घोष ने दिया। मंच संचालन डॉ. प्रीतेश आचार्य ने किया।
मुख्य अतिथि दीपक बजाज, विशिष्ट अतिथि संजीव अग्रवाल व महेशचंद्र श्रीवास्तव थे। शिवाजी की भूमिका प्रसन्न हमदर्दी, जीजाबाई की भूमिका नूपुर, औरंगजेब का किरदार यश योगी और तानाजी की भूमिका वीरेंद्र सिंह ने निभाई। मंच सज्जा श्याम कुमार साहनी, वेशभूषा नलिनी आर जोशी और संगीत काजल घोष ने दिया। मंच संचालन डॉ. प्रीतेश आचार्य ने किया।