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बुद्ध की सबसे ऊंची प्रतिमा तैयार
वाराण्ासी, ब्यूरो
Updated Sat, 06 Dec 2014 02:10 AM IST
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सारनाथ। भगवान बुद्ध की उपदेशस्थली सारनाथ में देश-विदेश से आने वाले बौद्ध अनुयायी और पर्यटक अब धम्म चक्र प्रवर्तन मुद्रा में विश्व की सबसे ऊंची तथागत की प्रतिमा के दर्शन कर सकेंगे।
शिवली वियतनामी मंदिर में 70 फुट ऊंची भव्य प्रतिमा बनकर तैयार है। शनिवार को इसका अनावरण होगा।
चुनार के पत्थरों से बनाई गई इस प्रतिमा के नीचे विशाल धम्मा हाल है।
चुनार के प्रसिद्ध मूर्तिकार देव नारायण पुजारी को इस प्रतिमा को तैयार करने चार साल का वक्त लगा है। धम्मा हाल की बाहरी दीवारों पर हिंदी, अंग्रेजी, पाली और वियतनामी भाषा में धम्म चक्र प्रवर्तन सूत्र लिखा गया है।
इसके अलावा पांच बौद्ध भिक्षुओं की आकृतियां भी उकेरी गई हैं। प्राचीन मूल गंध कुटी विहार के इतिहास के अंश भी दीवारों पर नजर आते हैं।
धम्मा हाल के बाहर भारतीय शैली में तोरण द्वार और प्रवेश व निकास द्वारों के चारों कोनों पर सिंह शीर्ष बनाए गए हैं। प्रांगण में एक सिग्नल पिलर पगोडा रखा गया है।
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मंदिर के प्रभारी भिक्षु डोम लाम तान ने बताया कि यह वियतनाम से आया है, जो अष्ट धातु से बना है। इसका वजन छह क्विंटल। 45 बिस्वा में फैले मंदिर परिसर में मेडिटेशन हाल, विश्राम स्थल और कई कमरे बनाए गए हैं।
विधिवत हुई प्राण प्रतिष्ठा
सारनाथ। शिवली वियतनामी मंदिर में शुक्रवार को दो दिवसीय समारोह शुरू हुआ। मंदिर को आकर्षक तरीके से सजाने के बाद पारंपरिक परिधानों में वियतनामी वाद्य यंत्रों के साथ भारतीय और वियतनामी प्रतिनिधियों ने विधिवत पूजन कर बुद्ध की धम्म चक्र प्रवर्तन मुद्रा वाली प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की।
शाम को भिक्षुओं ने कैंडिल मार्च निकाला और प्रतिमा के नीचे पूजा-पाठ किया। शनिवार को सुबह नौ बजे भिक्षु थिनमे के निर्देशन में धार्मिक अनुष्ठान होंगे। इसके बाद प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा।
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शिवली वियतनामी मंदिर में 70 फुट ऊंची भव्य प्रतिमा बनकर तैयार है। शनिवार को इसका अनावरण होगा।
चुनार के पत्थरों से बनाई गई इस प्रतिमा के नीचे विशाल धम्मा हाल है।
चुनार के प्रसिद्ध मूर्तिकार देव नारायण पुजारी को इस प्रतिमा को तैयार करने चार साल का वक्त लगा है। धम्मा हाल की बाहरी दीवारों पर हिंदी, अंग्रेजी, पाली और वियतनामी भाषा में धम्म चक्र प्रवर्तन सूत्र लिखा गया है।
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इसके अलावा पांच बौद्ध भिक्षुओं की आकृतियां भी उकेरी गई हैं। प्राचीन मूल गंध कुटी विहार के इतिहास के अंश भी दीवारों पर नजर आते हैं।
धम्मा हाल के बाहर भारतीय शैली में तोरण द्वार और प्रवेश व निकास द्वारों के चारों कोनों पर सिंह शीर्ष बनाए गए हैं। प्रांगण में एक सिग्नल पिलर पगोडा रखा गया है।
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मंदिर के प्रभारी भिक्षु डोम लाम तान ने बताया कि यह वियतनाम से आया है, जो अष्ट धातु से बना है। इसका वजन छह क्विंटल। 45 बिस्वा में फैले मंदिर परिसर में मेडिटेशन हाल, विश्राम स्थल और कई कमरे बनाए गए हैं।
विधिवत हुई प्राण प्रतिष्ठा
सारनाथ। शिवली वियतनामी मंदिर में शुक्रवार को दो दिवसीय समारोह शुरू हुआ। मंदिर को आकर्षक तरीके से सजाने के बाद पारंपरिक परिधानों में वियतनामी वाद्य यंत्रों के साथ भारतीय और वियतनामी प्रतिनिधियों ने विधिवत पूजन कर बुद्ध की धम्म चक्र प्रवर्तन मुद्रा वाली प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की।
शाम को भिक्षुओं ने कैंडिल मार्च निकाला और प्रतिमा के नीचे पूजा-पाठ किया। शनिवार को सुबह नौ बजे भिक्षु थिनमे के निर्देशन में धार्मिक अनुष्ठान होंगे। इसके बाद प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा।