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ओबरा-दुद्धी विस सीट के आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला आठ को
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी/सोनभद्र
Updated Fri, 03 Feb 2017 09:09 PM IST
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एसटी आरक्षण के खिलाफ दाखिल है याचिका
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ओबरा और दुद्धी विधानसभा सीट को ऐन वक्त पर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में दाखिल याचिका की सुनवाई शुक्रवार को पूरी हो गई। इस पर आने वाले फैसले को सुरक्षित रख लिया गया है। आठ फरवरी को इस पर निर्णय सुनाया जाएगा।
गत चार जनवरी को जारी अधिसूचना में चुनाव आयोग ने अचानक से ओबरा और दुद्धी सीट को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दिया था। इसके खिलाफ चंद्रमणि प्रसाद एवं अन्य ने गत 18 जनवरी को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। 2
1 नंबर कोर्ट में न्यायमूर्ति वीके शुक्ला और न्यायमूर्ति संगीता चंद्र की बेंच ने बीस जनवरी से इसकी सुनवाई शुरू की। 24 जनवरी को चुनाव आयोग इसमें उपस्थित हुआ। कोर्ट ने शपथपत्र के साथ जवाब देने का आदेश दिया।
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30 जनवरी को इसमें जवाब दाखिल हुआ। इसके बाद 31 जनवरी से प्रकरण को लेकर बहस की प्रक्रिया शुरू हो गई।
चुनाव आयोग का कहना था कि उसने दिसंबर 2016 तक केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय को पत्र लिखकर इस बात का स्पष्टीकरण मांगा कि ओबरा-दुद्धी विधानसभा सीट को एसटी के लिए आरक्षित करने की 13 जनवरी 2014 को जारी अधिसूचना को बगैर राष्ट्रपतीय आदेश के प्रभावी किया जाए या नहीं।
इस पर कोई जवाब नहीं मिला।
तब 2013 में जारी तात्कालिक अध्यादेश को आधार बनाते हुए दोनों विधानसभा सीटों को एसटी के लिए आरक्षित कर दिया गया।
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गत चार जनवरी को जारी अधिसूचना में चुनाव आयोग ने अचानक से ओबरा और दुद्धी सीट को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दिया था। इसके खिलाफ चंद्रमणि प्रसाद एवं अन्य ने गत 18 जनवरी को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। 2
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1 नंबर कोर्ट में न्यायमूर्ति वीके शुक्ला और न्यायमूर्ति संगीता चंद्र की बेंच ने बीस जनवरी से इसकी सुनवाई शुरू की। 24 जनवरी को चुनाव आयोग इसमें उपस्थित हुआ। कोर्ट ने शपथपत्र के साथ जवाब देने का आदेश दिया।
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30 जनवरी को इसमें जवाब दाखिल हुआ। इसके बाद 31 जनवरी से प्रकरण को लेकर बहस की प्रक्रिया शुरू हो गई।
चुनाव आयोग का कहना था कि उसने दिसंबर 2016 तक केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय को पत्र लिखकर इस बात का स्पष्टीकरण मांगा कि ओबरा-दुद्धी विधानसभा सीट को एसटी के लिए आरक्षित करने की 13 जनवरी 2014 को जारी अधिसूचना को बगैर राष्ट्रपतीय आदेश के प्रभावी किया जाए या नहीं।
इस पर कोई जवाब नहीं मिला।
तब 2013 में जारी तात्कालिक अध्यादेश को आधार बनाते हुए दोनों विधानसभा सीटों को एसटी के लिए आरक्षित कर दिया गया।