फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Health Alert TB during pregnancy means double risk do not these symptoms

Health Tips: मां बनने में रुकावट डालती है गर्भाशय में टीबी की बीमारी, इन लक्षणों को मत करें इग्नोर

Wed, 05 Apr 2023 08:11 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Wed, 05 Apr 2023 08:11 PM IST
सार

दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पतालन में एमसीएच विंग में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. आरती दिव्या का कहना है कि ओपीडी में हर माह तीन-चार महिलाएं ऐसी समस्या लेकर आती हैं। जांच में पता चलता है कि गर्भाशय में टीबी मां बनने में रुकावट डाल रही है।

विज्ञापन
Health Alert TB during pregnancy means double risk do not these symptoms
गर्भावस्था में टीबी का हो सकता है खतरा - फोटो : फाइल

विस्तार

टीबी को लोग फेफड़े, श्वसन तंत्र से होने वाली बीमारी मानते हैं, लेकिन गर्भवती महिलाओं को भी सतर्क रहने की जरूरत है। गर्भाशय में होने वाली इस बीमारी की समय से जांच और डॉक्टर की सलाह पर इलाज बहुत जरूरी है, नहीं तो आगे चलकर परेशानी बढ़ जाती है।

विज्ञापन


वाराणसी के दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में एमसीएच विंग में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. आरती दिव्या का कहना है कि टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों, श्वसन तंत्र और पाचन तंत्र को प्रभावित करती है। कुछ मामलों में नाखून व बाल को छोड़कर शरीर के किसी भी अंग में बीमारी हो सकती है।
विज्ञापन


यदि कोई महिला गर्भवती नहीं हो पा रही है तो इसकी वजह गर्भाशय में टीबी हो सकती है। टीबी के बैक्टीरिया महिला के यूट्रस की दीवारों और नलियों को खराब कर देते हैं। यहीं नहीं फैलोपियन ट्यूब भी बंद हो जाता है। इससे नियमित मासिक धर्म नहीं आते हैं। डॉ. दिव्या ने बताया कि कुछ मामलों में यह पूरी तरह से रुक जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

ये भी पढ़ें: कोविड के सुपर स्प्रेडर बन सकते हैं भीड़भाड़ वाले स्थान, BHU के अध्ययन में हुआ खुलासा

समय से जांच, इलाज कर मिल सकती है निजात

ओपीडी में हर माह तीन-चार महिलाएं ऐसी समस्या लेकर आती हैं। जांच में पता चलता है कि गर्भाशय में टीबी मां बनने में रुकावट डाल रही है। छह माह से एक वर्ष तक नियमित दवा के सेवन से महिलाएं पूरी तरह ठीक होकर मां बनने की स्थिति में आ जाती हैं।

गर्भाशय टीबी के लक्षण

पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द, अनियमित मासिक धर्म, वजन तेजी से कम होना।

उपचार
ट्यूबरकुलीन स्किन टेस्ट के साथ ही ब्लड टेस्ट कराया जाता है। यूट्रस की बायोप्सी भी कराई जाती है। इसके अलावा जेनेटिक टेस्ट भी होता है, जिससे टीबी के इंफेक्शन का पता चलता है। ऐसे मरीजों को 6 महीने तक टीबी की दवा नियमित तौर पर खिलाई जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed