ज्ञानवापी वजूखाना: दाखिल निगरानी अर्जी स्वीकार, जानिए अखिलेश यादव और ओवैसी पर क्या है आरोप
अदालत ने इस मामले में विपक्षी पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई की अगली तारीख 25 मार्च नियत की है।
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वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने ज्ञानवापी परिसर में मिले कथित शिवलिंग के वजूखाने के पास गंदगी करने और बयानबाजी कर हिन्दुओं की धार्मिक भावना को आहत करने के मामले में सपा प्रमुख अखिलेश यादव, सांसद असुद्दीन ओवैसी, शहर काजी व मौलवी समेत सैकड़ो मुस्लिम पक्षकारों के खिलाफ दाखिल दण्डिक निगरानी याचिका विचारार्थ स्वीकार कर ली है।
अदालत ने इस मामले में विपक्षी पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई की अगली तारीख 25 मार्च नियत की है। यह निगरानी रामेश्वर निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर पाण्डेय ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम/ एमपी एमएलए कोर्ट के प्रभारी उज्जवल उपाध्याय द्वारा बीते 14 फ़रवरी को पारित आदेश को अवैधानिक बताते हुए दाखिल की है।
निगरानी में कहा गया कि सर्वे आदेश के दौरान जो कथित शिवलिंग बरामद हुआ था उसके पास स्थित वजू स्थल पर थूक कर गंदगी फैलाई गई जिससे लाखों हिदुओं कि भावना आहत हुई सैकड़ो मुस्मिल वहां अवैधानिक रूप से एकत्र होकर नारेबाजी की साथ ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि कहीं भी पीपल के पेड़ के निचे पत्थर रखकर पूजा कर दो तो वह मंदिर हो जाता है।
सांसद असुद्दीन ओवैसी व उनके भाई ने बरामद शिवलिंग को फ़ौहारा बताया जिससे हिन्दुओं कि भावना आहत हुई। इस मामले में सीआरपीसी कि धारा 156-3 के तहत लोवर कोर्ट में वाद दाखिल किया गया था जिसको सुनवाई योग्य मानने और थाने से मुकदमा दर्ज नहीं होने की चौक थाने से आख्या आने के बाद अवैधानिक तरिके से वाद ख़ारिज किये जाने का आरोप लोवर कोर्ट पर लगते हुए निगरानी दाखिल की गई थी। जिसे सत्र अदालत ने निगरानी वाद विचारार्थ स्वीकार करते हुए विपक्षियों को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई की अगली तारीख 25 मार्च नियत कर दी।