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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Gyanvapi Survey Lotus medallion and series of buds on pillar surprise reveal in three inscriptions of Gyanvapi

Gyanvapi Survey: स्तंभ पर कमल पदक और कलियों की श्रृंखला, ज्ञानवापी के तीन शिलालेखों में हैरान करने वाले खुलासे

Fri, 26 Jan 2024 11:42 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 26 Jan 2024 11:42 AM IST
सार

ज्ञानवापी परिसर की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट बुधवार को मुकदमे के पक्षकारों ने सार्वजनिक कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक ज्ञानवापी बड़ा हिंदू मंदिर था। सर्वे के दौरान 32 जगह मंदिर से संबंधित प्रमाण मिले हैं। पश्चिमी दीवार हिंदू मंदिर का हिस्सा है। इसे आसानी से पहचाना जा सकता है। जो स्तंभ मिले हैं, वो हिंदू मंदिर के हैं।

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Gyanvapi Survey Lotus medallion and series of buds on pillar surprise reveal in three inscriptions of Gyanvapi
Gyanvapi Survey - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्ञानवापी में मिले तीन शिलालेखों ( 4 8 और 29) में महामुक्तिमंडप का उल्लेख किय गया है। इसे एएसआई ने सबसे महत्वपूर्ण बताय है। एएसआई का कहना है कि महामुक्तिमंडप शिव के प्रसिद्ध निवास के अस्तित्व को स्थापित करने में मदद करता है। इसका वर्णन प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है। 
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शिलालेख 24 से एक विशेषण परममणियकदेव का पता लगता है। एएसआई की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, ज्ञानवापी में 34 शिलालेख मिले हैं। इनमें से सिर्फ तीन शिलालेख ही अच्छी स्थिति में हैं। इन शिलालेखों के विश्लेषण से पता चला कि 15वीं से 17वीं शताब्दी में आने वाले तीर्थ यात्रियों ने उस पर कुछ लिखा था।
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शिलालेखों से तीर्थ यात्रियों की चार प्रकार की गतिविधियों का पता लगा है। इसमें देवता को प्रणाम करना, दीपक जलाने का प्रावधान करना और अखंड दीपक जलाना शामिल है। शिलालेखों से आर्यावती, सुम्भाजी, सोनाजी, मल्लाना-भालू, नारायण-भाशिउ, जीवंतदेव, नारायणन रमन. पंडिता मालविधरा, रघुनाथ, दोदारसैय्या, नरसम्ना, कासी और कान्हा जैसे व्यक्तिगत नामों की जानकारी मिलती है। लशुमदेश और कुर्हकालमंडल की जानकारी भी शिलालेख से मिलती है। 
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स्तंभ पर मिले कमल पदक, है कलियों की श्रृंखला
ज्ञानवापी की मौजूदा संरचना के एक स्तंभ में कमल पदक विद्यमान है। स्तंभ के 18 फूलों की कलियों की श्रृंखला से सजाया गया है। एक स्तंभ में कमल पदक के अलावा प्रत्येक कोने में पुष्प कलियां मिली हैं। एक स्तंभ पर खिला कमल पदक और 22 फूलों की कलियों की श्रृंखला मिली है। 
 

अर्धवृत्ताकार मेहराब के दूसरे स्तर पर एक घुटने पर बैठे हाथी के अगले भाग को उसकी सूंड ऊपर उठाए हुए दर्शाया गया है। पूर्वी दीवार के भीतरी हिस्से में हीरे के पैटर्न वाली ऐतिहासिक काल की एक सजी हुई किताब मिली थी। तहखाने की पूर्वी और पश्चिमी दीवारें चूने में जड़े पत्थरों के खंडों से बनी हैं। लाखौरी ईंटों का उपयोग मेहराबों, उनसे उठी दीवारों और छत तक सीमित हैं।

टेराकोटा के बर्तन भी मिले 
एएसआई के अनुसार, परिसर का मलबा हटाने पर पता चला कि वहां जानबूझकर कई चीजें दबई गई थीं। उनमें टेरकोटा से भरे बर्तन और विकृत मूर्तिकला के टुकड़े महत्वपूर्ण थे। इसके अलावा मलबे में बड़ी संख्या में टूटे हुए बर्तन भी शामिल हैं, जैसे कि चिलम, हुक्का बेस, छोटे बर्तन, लैंप आदि...।

 

फोटो और वीडियो के साक्ष्य भी लेंगे 
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि अभी सिर्फ एएसआई की सर्वे की लिखित रिपोर्ट प्राप्त हुई है। फोटो और वीडियो के साक्ष्य भी लिए जाएंगे। अदालत के खुलने पर प्रार्थना पत्र देकर फोटो और वीडियो सबंधी साक्ष्य प्राप्त किए जाएंगे।

 

बाड़ वाले क्षेत्र में कब्रों के दो समूह देखे गए
एएसआई के अनुसार, बाड़ वाले क्षेत्र में कब्रों के दो समूह देखे गए। पहले समूह में पश्चिमी कक्ष में दो कब्रें हैं और दूसरे समूह में दुकान 2 और 3 के बीच उत्तर की ओर तीन कब्रें हैं। पश्चिमी कक्ष में कब्रें केंद्रीय कक्ष के सीलबंद प्रवेश द्वार के सामने हैं। 

 

दोनों कब्रों में एकसमान पत्थर का चबूतरा है, जिसमें सीमेंट से मरम्मत के साक्ष्य मिले हैं। दोनों कब्रें पत्थर से बनी हैं। मौजूदा संरचना की उत्तरी दीवार से सटे एक छोटे मंच पर तीन कब्रें मौजूद हैं। पूर्वी हिस्से में दो कब्रों का निर्माण लाखौरी ईंटों का उपयोग करके बनाई गई है। 

ज्ञानवापी बड़ा हिंदू मंदिर, अयोध्या की तरह मस्जिद से पहले मिला मंदिर का ढांचा
दरअसल, ज्ञानवापी परिसर की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट बुधवार को मुकदमे के पक्षकारों ने सार्वजनिक कर दी। एएसआई की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक ज्ञानवापी बड़ा हिंदू मंदिर था। सर्वे के दौरान 32 जगह मंदिर से संबंधित प्रमाण मिले हैं। पक्षकारों ने जो सर्वे रिपोर्ट दी है, वह 839 पेज की है।
 

पश्चिमी दीवार हिंदू मंदिर का हिस्सा है। इसे आसानी से पहचाना जा सकता है। जो स्तंभ मिले हैं, वो हिंदू मंदिर के हैं। उसका दोबारा इस्तेमाल किया गया है। देवनागरी, ग्रंथा, तेलुगु और कन्नड़ भाषा में लिखे शिलालेख भी मिले हैं। जनार्दन, रुद्र और विश्वेश्वर के शिलालेख भी मिले हैं। एक जगह महामुक्ति मंडप लिखा है। यह महत्वपूर्ण साक्ष्य है। सर्वे के दौरान टूटा हुआ एक पत्थर पाया गया है।

एएसआई के मुताबिक मंदिर सत्रहवीं शताब्दी में तोड़ा गया था। इसकी तिथि 2 सितंबर 1969 हो सकती है। मंदिर के जो पिलर थे, उन्हीं का इस्तेमाल मस्जिद बनाने के लिए किया गया है। तहखाने में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां मिली हैं। अयोध्या की तरह ही मस्जिद से पहले मंदिर का स्ट्रक्चर मिला है।

हिंदू पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट से ज्ञानवापी के सील वजूखाने की एएसआई से सर्वे कराने का अनुरोध करेगा। मामले में हिंदू पक्ष की महिला वादी ने कहा कि बाबा मिल गए हैं। अब अदालत से पूजा-अर्चना की अनुमति देने का अनुरोध किया जाएगा। सर्वे से सच सामने आ गया। पता चल गया कि विश्वेश्वर का मंदिर ध्वस्त किया गया, फिर उसे मस्जिद का रूप दिया गया। 

जिला जज डॉ अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने बुधवार को ज्ञानवापी की सर्वे रिपोर्ट हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों को देने का आदेश दिया था। इसकी कॉपी पक्षकारों को बृहस्पतिवार को अदालत से मिली है। 

इसके बाद हिंदू पक्ष की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने पत्रकारों से बात की और कहा कि सर्वे से साबित हो गया कि ज्ञानवापी बड़ा हिंदू मंदिर था। उसे तोड़कर मस्जिद का रूप दिया गया। अब सील वजूखाने के सर्वे का अनुरोध किया जाएगा। 
 

रिपोर्ट से हिंदू पक्ष का वह दावा सच साबित हुआ है। इससे पहले जिला जज की अदालत ने कहा था कि सर्वे रिपोर्ट की प्रति पक्षकारों को देना न्याय हित में उचित रहेगा। इससे सर्वे रिपोर्ट के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराए बिना आपत्तियां दर्ज करा पाना संभव नहीं है।

 

दरअसल, सील वजूखाने को छोड़कर ज्ञानवापी परिसर की सर्वे रिपोर्ट एएसआई ने जिला जज की अदालत में 18 दिसंबर 2023 को दाखिल की थी। मुकदमे की वादिनी सीता साहू, रेखा पाठक, मंजू व्यास और लक्ष्मी देवी की ओर से सर्वे रिपोर्ट की प्रति दिए जाने का अनुरोध किया गया था। महिलाओं का कहना था कि यह पब्लिक इंट्रेस्ट का मुद्दा है। इसे गोपनीय बनाकर हौव्वा बनाया जा रहा है। 
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