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ज्ञानवापी : मसाजिद कमेटी पर 300 रुपये का हर्जाना लगा, सुनवाई टालने का किया था अनुरोध

Wed, 09 Oct 2024 10:09 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 09 Oct 2024 10:09 AM IST
सार

Varanasi News : ज्ञानवापी मामले से संबंधित एक अर्जी वाराणसी कोर्ट में एक बार फिर टल गई।

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Gyanvapi Masjid committee fined 300 rupees requested to postpone hearing
Gyanvapi Case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्ञानवापी से संबंधित एक अर्जी की सुनवाई एक बार फिर टल गई। अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से अदालत में स्थगन प्रार्थना पत्र देकर कहा गया कि उनके अधिवक्ता तैयारी नहीं कर सके हैं। लिहाजा, सुनवाई टाल दी जाए।

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इस पर वादी के अधिवक्ता नित्यानंद राय और देशरत्न श्रीवास्तव ने आपत्ति दर्ज कराई। इसे लेकर सिविल जज सीनियर डिवीजन/फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मसाजिद कमेटी पर 300 रुपये का हर्जाना लगाया। मामले में अगली सुनवाई के लिए 15 अक्तूबर की तिथि नियत की गई है।
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बजरडीहा, भेलूपुर के विवेक सोनी और चितईपुर के जयध्वज श्रीवास्तव ने सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में 25 मई 2022 को अर्जी दाखिल थी। अर्जी के माध्यम से गुहार लगाई थी कि स्थायी निषेधाज्ञा के जरिये मुस्लिम पक्ष को मना किया जाए कि वह ज्ञानवापी में आदि विश्वेश्वर के ज्योतिर्लिंग के पूजा-पाठ, राग-भोग और शृंगार के काम में विधि विरुद्ध तरीके से कोई अवरोध या व्यवधान न डालें।

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एएसआई के अतिरिक्त सर्वे की अर्जी के विरोध में मसाजिद कमेटी की बहस पूरी

सिविल जज सीनियर डिवीजन/फास्ट ट्रैक कोर्ट युगल शंभू की अदालत में मंगलवार को ज्ञानवापी से जुड़े वर्ष 1991 के लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के मूल वाद की सुनवाई हुई। संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर में एएसआई के अतिरिक्त सर्वे से संबंधित अर्जी के विरोध में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से अधिवक्ताओं ने अपनी बहस पूरी कर ली। अब इस मामले में 10 अक्तूबर को लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी अपनी दलील प्रस्तुत करेंगे।

मसाजिद कमेटी की ओर से कहा गया कि ज्ञानवापी स्थित वजूखाना सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सील है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में एएसआई ने शपथ पत्र दिया था कि ज्ञानवापी में खोदाई कर मौजूदा ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। इसके बाद एएसआई ने गत वर्ष सर्वे किया था। 

वाद मित्र का यह कथन कि चार खोदाई कर सर्वे किया जाए, सही नहीं है। अगर एएसआई की टीम को जीपीआर पद्धति से जमीन के नीचे कुछ होने के संकेत मिलते तो वह कोर्ट में अर्जी देकर खोदाई या अन्य वैज्ञानिक तरीके से सर्वे करने की अनुमति जरूर लेते। एएसआई ने पूरा सर्वे कर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दिया है। सर्वे के दौरान मिले अवशेष, वस्तु, मूर्तियां और अन्य सामग्रियां कोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन की देखरेख में रखी गई हैं। 

एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर अभी सुनवाई ही नहीं हुई है तो अतिरिक्त सर्वे की आवश्यकता क्या है। ऐसे में अतिरिक्त सर्वे की मांग से संबंधित अर्जी खारिज होने योग्य है। इससे पहले वाद मित्र और फिर सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से बहस की गई थी। मंगलवार को मसाजिद कमेटी की ओर से भी बहस पूरी कर ली गई।

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