Gyanvapi Case: कमीशन की कार्यवाही आगे बढ़ाने की मांग पर मुस्लिम पक्ष ने मांगा समय, दो नवंबर को सुनवाई
जिला जज डा. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में शुक्रवार को ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी प्रकरण में बंद तहखाने को खुलवाने के सर्वे और मामले में पक्षकार बनने के आवदन पर सुनवाई हुई।
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ज्ञानवापी स्थित श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन व अन्य विग्रहों के संरक्षण के मुकदमे में शुक्रवार को जिला जज की अदालत में हिंदू पक्ष के कमीशन की कार्रवाई आगे बढ़ाने की मांग पर सुनवाई हुई। मुस्लिम पक्ष ने अधिवक्ता आयुक्त की कार्रवाई की मांग पर आपत्ति के लिए समय की मांग की। इस पर जिला जज ने 100 रुपये का जुर्माना लगाया। इसके साथ ही केस की सुनवाई की अगली तारीख दो नवंबर को नियत कर दी। इससे पहले श्रृंगार गौरी मामले में पक्षकार बनने के लिए आए सभी आवेदनों को खारिज कर दिया।
ज्ञानवापी परिसर में सर्वे की कार्रवाई के दौरान मिले कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग खारिज होने के बाद वादी राखी सिंह सहित सभी पांचों महिलाओं ने एक बार फिर सर्वे की मांग की। इस संबंध में 17 मई को दिए गए प्रार्थना पत्र को अदालत के सामने रखा।
दीवार और मलबे को हटाकर हो जांच
इसमें मांग है कि 16 मई को कमीशन की कार्यवाही के दौरान मिले शिवलिंग को पूरब की ओर दीवार में दरवाजे को ईंट से ढका गया है। नंदी के सामने तहखाने में मलबा रखा है और उत्तर की ओर भी दीवार बनाई गई है। इसमें उन्होंने मांग की है कि दीवार व मलबे को हटाकर शिवलिंग की ऊंचाई, लंबाई व चौड़ाई के साथ ही तहखानों में सर्वे की कार्रवाई की जाए।
इस मांग पर भी सुनवाई के लिए जिला जज की अदालत ने 21 अक्तूबर की तिथि नियत की थी। वादिनी महिलाओं की मांग पर आपत्ति पेश करने की बारी आई तो मसाजिद कमेटी की ओर से उनके सीनियर एडवोकेट पेश नहीं हुए और समय मांगा गया।
वादिनी महिलाओं की ओर से कहा गया कि यह आवेदन 17 मई को ही दिया गया था। इस पर कोर्ट ने मसाजिद कमेटी पर 100 रुपये का जुर्माना लगाते हुए सुनवाई की अगली तारीख दो नवंबर तय की। वहीं, वादिनी राखी सिंह ओर से कारमाइकल लाइब्रेरी में मिली गणेश और लक्ष्मी की मूर्ति को संरक्षित करने की मांग के आवेदन पर भी अदालत दो नवंबर को ही सुनवाई करेगी।
पहले से ही समर्थ लोग हैं मुकदमे में पक्षकार
ज्ञानवापी स्थित श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन व अन्य विग्रहों की मांग के मुकदमे में पक्षकार बनने के चार आवेदन को जिला जज की अदालत ने खारिज किया। इसमें अधिवक्ता चंद्रशेखर सेठ, ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद के अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ल, काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत कुलपति तिवारी, केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा के आवेदन शामिल हैं। अदालत ने कहा था कि इस मामले में पहले से समर्थ लोग पक्षकार हैं। वादी को बाध्य नहीं किया जा सकता है कि वह किसी अन्य को पक्षकार बनाए।