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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Gyanvapi Case Hearing held on application to remove vadmitra August 19 now fixed as date in varanasi

Gyanvapi Case: वादमित्र को हटाने की अर्जी पर हुई सुनवाई, अब 19 अगस्त तिथि तय; मूल पत्रावली भी तलब

Sat, 08 Aug 2026 12:38 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Sat, 08 Aug 2026 12:38 PM IST
सार

Varanasi News: ज्ञानवापी से संबंधित वादमित्र को हटाने की अर्जी पर सुनवाई हुई। प्रतिवादी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता की अनुपस्थिति के कारण अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 19 अगस्त की तिथि तय की है।

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Gyanvapi Case Hearing held on application to remove vadmitra August 19 now fixed as date in varanasi
Gyanvapi Case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्ञानवापी से संबंधित वर्ष 1991 के मुकदमे में वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने की अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। विशेष न्यायाधीश द्वितीय पूनम पाठक की अदालत ने प्रतिवादी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता की अनुपस्थिति के कारण मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 अगस्त की तिथि निर्धारित की है। अदालत ने निचली अदालत से मूल पत्रावली भी तलब की है।

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यह पुनरीक्षण याचिका हरिहर पांडेय की पुत्रियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा और रेणु पांडेय की ओर से दाखिल की गई है। सिविल जज (सीनियर डिवीजन-फास्ट ट्रैक) की अदालत ने 11 जुलाई 2025 को वादमित्र को हटाने संबंधी प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया था। इसी आदेश के खिलाफ तीनों की ओर से अधिवक्ता आशीष कुमार श्रीवास्तव ने जिला जज की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी, जिस पर वर्तमान में विशेष न्यायाधीश द्वितीय की अदालत में सुनवाई चल रही है।
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हरिहर पांडेय के निधन के बाद उनकी पुत्रियों ने छह अप्रैल 2024 को सिविल जज (सीनियर डिवीजन-फास्ट ट्रैक) की अदालत में उनके स्थान पर मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। इस पर सुनवाई जारी थी। इसी बीच 31 मई 2025 को तीनों बहनों ने वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने के लिए अलग से प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। उनके अधिवक्ता ने दोनों प्रार्थना पत्रों पर एक साथ सुनवाई का अनुरोध किया था। हालांकि, सिविल जज भावना भारतीय ने वादमित्र को हटाने संबंधी प्रार्थना पत्र को पोषणीय न मानते हुए 11 जुलाई 2025 को उसे निरस्त कर दिया था।

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