Guru Purnima: 18.75 लाख शिष्यों ने गुरु चरणों में टेका मत्था, मठ मंदिर और आश्रमों में लगी रही लंबी कतार
Varanasi News: गुरु समान दाता नहीं, याचक शीष समान, तीन लोक की सम्पदा, सो गुरु दीन्ही दान अर्थात गुरु के समान कोई दाता नहीं और शिष्य के सदृश याचक नहीं। त्रिलोक की संपत्ति से भी बढ़कर ज्ञान-दान गुरु ने दे दिया। कुछ ऐसी ही कामना के साथ आदियोगी शिव की नगरी में शिष्यों ने गुरु चौखट पर मत्था टेका।
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आषाढ़ पूर्णिमा पर शहर से लेकर गांव तक के आश्रम, मठ और मंदिरों में 18.75 लाख शिष्यों ने अपने-अपने गुरु का दर्शन पूजन कर आशीर्वाद लिया। गुरु-शिष्य परंपरा के पर्व गुरु पूर्णिमा का नजारा देखते ही बन रहा था। शहर का कोना-कोना गुरु-पर्व पर गुलजार रहा।
सामनेघाट से पड़ाव के बीच पड़ने वाले आश्रमों में भोर की पहली किरण के साथ ही आषाढ़ पूर्णिमा के अनुष्ठान आरंभ हुए। अघोर पीठ श्री सर्वेश्वरी समूह आश्रम पड़ाव में गुरुदेव का दर्शन-पूजन करने के लिए रात लगभग तीन बजे से ही शिष्य कतारबद्ध हो गए थे।
शिष्यों को अघोरपीठ के पीठाधीश्वर बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम ने लगातार 4:30 घंटे बैठकर गुरुकृपा रूपी अमृत वर्षा की। भोर में 4:30 बजे श्रद्धालुओं ने अघोरेश्वर महाविभूति स्थल गंगातट तक प्रभातफेरी निकाली।
सुबह साफ-सफाई व श्रमदान के बाद सात बजे से अघोरेश्वर भगवान राम के चिरकालिक आसन का पूजन गुरुपद संभव राम ने किया। श्री सर्वेश्वरी समूह के मंत्री डॉ. एसपी सिंह ने सर्वेश्वरी ध्वजोत्तोलन किया।
सफलयोनि का पाठ अघोर शोध संस्थान के निदेशक अशोक कुमार ने किया। लगभग 7:30 बजे गुरुपद संभव राम आसन पर विराजमान हुए। शिष्यों द्वारा हर-हर महादेव के जयघोष के साथ प्रारंभ हुआ दर्शन-पूजन दोपहर 12 बजे तक चला।
संतमत अनुयायी आश्रम मठ गढ़वाघाट में गुरू दरबार सजाया गया। पीठाधीश्वर गुरू सरनानंद महाराज का आशीर्वाद पाने के लिए शिष्यों की कतार लगी रही। इस दौरान व्यवस्था में बाबा प्रकाशाध्यानानंद महाराज, धर्मदर्शनानंद, हरिध्यानानंद, दिव्यदर्शनानंद ने सहयोग किया।
भक्तों से पटे रहे मठ-मंदिर
करपात्र तपोस्थली दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ शिक्षा मंडल के प्रांगण में सुबह से ही गुरु पूजन करने के लिए नेमी धर्मसंघ पहुंचने लगे थे। धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने भक्तों को आशीष दिया।
उन्होंने सर्वप्रथम व्यास पूजन किया, तत्पश्चात धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज की प्रतिमा का पूजन अर्चन किया। ब्रह्मलीन लक्ष्मण देव चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज की प्रतिमा का पूजन अर्चन किया। सुबह 8 बजे से गुरु पूजन कार्यक्रम शुरू हुआ। श्रद्धालुओं ने पादुका पूजन कर स्वामी शंकरदेव ब्रह्मचारी से आशीर्वाद लिया एवं दीक्षा भी ग्रहण की। संयोजन धर्मसंघ के महामंत्री पंडित जगजीतन पांडेय ने किया।
नेवादा स्थित ऋषि आश्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वक्ता राघव ऋषिजी का गुरुपूजन सुबह 9 बजे प्रारंभ हुआ। राघव ऋषि ने कहा कि सच्चा गुरु वही है जो भक्त को जीवन के अंधेरे से बाहर निकाल दें। शाम को सौरभ ऋषि की भक्तिमयी भजन संध्या स्वरान्वित हुई।
इस अवसर पर पूर्वांचल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, बिहार, झारखंड, असम, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान आदि जगहों से भगवती महात्रिपुरसुंदरी महालक्ष्मी के साधक उपस्थित रहे।
शिष्य के दुर्गुणों को हरण करने वाला ही सच्चा गुरु
तुलसी घाट के तुलसी मंदिर में गुरु पूजन के लिए भक्तों का जैन सैलाब उमड़ा। अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने विधि विधान से गोस्वामी तुलसीदास जी के चरण पादुका का पूजन अर्चन किया।
मंदिर में गोस्वामी जी द्वारा स्थापित भगवान श्रीराम, श्री हनुमान जी सहित देव विग्रहों का पूजन अर्चन किया। इसके पश्चात शिष्यों ने गुरु विश्वंभर नाथ मिश्रा का विधि विधान से पूजन किया। महंत प्रो. मिश्र ने कहा कि काशी में गुरु शिष्य परंपरा अनादि काल से चली आ रही है।
संसार में गुरु ही एक ऐसा है जो अपने शिष्य की हमेशा भलाई चाहता है यहां तक कि वह अपने पुत्र से बढ़कर अपने शिष्य को मानता है और सच्चा गुरु वही है जो अपने शिष्य के दुर्गुणों को हरण कर उसमें गुण डालकर उसे सही मार्ग दिखाए।
वहीं, अन्नपूर्णा मंदिर में पूर्वांचल समेत देश के कोने-कोने से पहुंचे भक्तों ने गुरु का आशीर्वाद लिया। अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी ने सबसे पहले अपने गुरु कपिलमुनी की पूजा के बाद आरती उतारी। मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। महंत ने कहा गुरु को भगवान का स्थान मिला है। गुरु ही मार्ग दर्शन देता है। गुरु पूजन परम धर्म है।
संत रविदास पार्क नगवां लंका स्थित श्री दुर्गा मातृ छाया शक्तिपीठ में दो दिवसीय से गुरु पूर्णिमा महोत्सव गुरु पूजन के साथ पूर्ण हुआ। देवी उपासिका साध्वी गीतांबा तीर्थ ने अपने गुरु की चरण पादुका का विधि विधान से पूजन अर्चन किया। भक्तों ने चरण धोकर एवं आरती उतारकर अपने गुरु का आशीर्वाद लिया। इसके पश्चात पीठ में चल रहे रहे अखंड रामायण पाठ का समापन हुआ। दंडी संन्यासियों एवं गृहस्थों का भंडारा हुआ।
साध्वी गीतांबा तीर्थ ने कहा कि अंधकार से प्रकाश का रास्ता बताने वाला एकमात्र गुरु ही है वही भवसागर से पार कराता है। उधर, कबीर प्राकट्य स्थली पर महंत गोविंद दास ने कहा कि गुरु का महत्व हमारे जीवन में बहुत ही अधिक है यदि सही गुरु नहीं मिले तो हमें सच्चे ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती।
बालव्यास पं. श्रीकांत शर्मा का हुआ पूजन
अस्सी स्थित मुमुक्षु भवन के सामने सरावगी भवन में बाल व्यास श्रीकांत शर्मा का पूजन हुआ। मारवाड़ी समाज के गुरु पंडित श्रीकांत शर्मा का माल्यार्पण, अंग वस्त्रम के साथ चरण स्पर्श कर भक्तों ने आशीर्वाद लिया।
संयोजन में चंपालाल सरावगी, अवधेश खेमका, सुरेश तुलस्यान, महेश चौधरी, गोपाल अग्रवाल, मनीष गिनोडिया मौजूद रहे। वहीं, मौनी बाबा आश्रम लक्सा में सुबह आठ बजे से गणेश वंदना एवं अभिषेक, वेद मंत्र आचार्य धिल्ली राम काफ्ले की देखरेख में हुआ। इस दौरान महात्रिपुरसुंदरी, श्रीयंत्र का महा रुद्राभिषेक, श्रीसूक्त, पुरुषसूक्त, ललिता सहस्रनाम का पाठ हुआ। इस अवसर पर ट्रस्टी मोहन लाल, दीपक जायसवाल, धीरेंद्र शर्मा मौजूद थे।
भक्तों ने किया शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन
शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में भक्तों ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की चरण पादुका का पूजन किया। सर्वप्रथम विघ्नहरण गणेश जी और नवग्रहों का विधिविधान से षोडशोपचार पूजन व वर्तमान ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य सहित ब्रह्मलीन द्वयपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज का भी आरती पूजन किया गया।
गुरु पूजन के पश्चात मातृशक्ति सावित्री पांडेय, लता पांडेय, नीलम दुबे, विजया तिवारी की अगुआई में सोहर व भजन का सामूहिक गायन किया गया। महेंद्र प्रसन्ना ने अपने साथियों संग शहनाई, ढोल व मजीरा वादन किया।
क्रीं कुंड में चार घंटे पहले ही लग गई कतार
रविंद्रपुरी स्थित विश्वविख्यात अघोरपीठ बाबा कीनाराम स्थल क्रीं-कुंड के पीठाधीश्वर अघोराचाचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम ने शिष्यों को दर्शन दिया। सुबह चार बजे से ही आश्रम परिसर के बाहर लंबी कतार में लोग लग गए थे। सुबह आठ बजे जैसे ही अघोराचार्य महाराज अपने कक्ष से बाहर निकले, हर-हर महादेव के, गगनभेदी उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा।
अघोराचार्य महाराजश्री बाबा कीनाराम जी तथा अघोरेश्वर महाप्रभु अवधूत भगवान् राम जी सहित सभी समाधियों के पूजन-दर्शन के बाद जब अघोराचार्य अपने औघड़ तख्त पर आसीन हुए तो ढोल-डमरू-नगाड़े-शंख के साथ हर-हर महादेव का उद्घोष शुरू हो गया। कतारबद्ध भक्तों ने बड़े ही अनुशासन के साथ गुरु के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित कर शीश नवाया और उसके बाद प्रसाद ग्रहण किया।