कोरोना का ग्रहण: काशी विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में नहीं आएंगे टॉप-10 विद्यार्थी, गोल्ड मेडल वाले छात्रों को मिलेगा प्रवेश
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 43वें दीक्षांत समारोह में सिर्फ गोल्ड मेडलिस्ट कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहेंगे। कोविड प्रोटोकॉल को ध्यान रखते हुए इस साल टॉप-10 छात्रों को दीक्षांत में नहीं बुलाया जा रहा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का दीक्षांत समारोह तीन जनवरी को होगा। कोविड प्रोटोकॉल के कारण दीक्षांत समारोह में पहली बार टॉप-10 की सूची में शामिल विद्यार्थियों को आमंत्रित नहीं किया गया है। केवल गोल्ड मेडल और शोध उपाधिधारक ही शामिल होंगे। दीक्षांत समारोह का पूर्वाभ्यास आज दोपहर दो बजे से होगा।
कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने बताया कि स्नातक के 17 और स्नातकोत्तर के 40 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल दिया जाएगा। इस दौरान 73,579 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध की उपाधि दी जाएगी। तीन जनवरी को तीन बजे से दीक्षांत समारोह आरंभ होगा।
अध्यक्षता कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल करेंगी। मुख्य अतिथि एनआईटी उत्तराखंड के चेयरमैन डॉ. आरके त्यागी होंगे। इस दौरान विश्वविद्यालय की ओर से सामाजिक कार्यकर्ता विमला पोद्दार को डीलिट की उपाधि देने का निर्णय लिया गया है।
राजभवन के निर्देश पर खर्चों में कटौती
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पहली बार गांधी अध्ययन पीठ सभागार में दीक्षांत समारोह का आयोजन किया जा रहा है। हर साल दीक्षांत के दौरान पंडाल बनाने पर 60 लाख से एक करोड़ रुपये तक खर्च होता है। राजभवन के निर्देश पर खर्चों में कटौती के लिए यह निर्णय लिया गया है।
पढ़ेंः बदलते बनारस की विकास यात्रा को नया आयाम देगा 2022, रोपवे-स्काईवॉक और हेलीपोर्ट की मिलेगी सौगात
आने वाले पांच साल में अगर हम यह बचत कर पाते हैं तो विश्वविद्यालय का अपना सभागार तैयार हो जाएगा। कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय व कुलानुशासक प्रो. निरंजन सहाय ने बताया कि विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के मुद्दा इस समय कोर्ट में है। इसलिए हम लोग कोर्ट के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के मुकम्मल इंतजाम किए गए हैं।
संस्कृत विश्वविद्यालय: 37 होनहारों को मिलेंगे 63 पदक
संस्कृत विवि में 37 मेधावियों को 63 पदक वितरित होंगे। इसके अलावा समारोह में 15,520 विद्यार्थियों को शास्त्री-आचार्य व अन्य पाठ्यक्रमों की प्रतीकात्मक उपाधि वितरित की जाएगी। संस्कृत विश्वविद्यालय ने समारोह की पूर्व संध्या पर यानी दो जनवरी को शास्त्रार्थ व गायन प्रतियोगिता कराने का निर्णय लिया है। दीक्षा समारोह के एक दिन पहले शास्त्रार्थ की परंपरा रही है। करीब दो दशक यह परंपरा टूट गई है। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने यह परंपरा फिर से शुरू करने जा रहे हैं। आज दोपहर तीन बजे से पूर्वाभ्यास किया जाएगा।