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बलिया मे घाघरा के फिर तल्ख तेवर,बीएसटी बांध पर बजी खतरे की घंटी
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Sat, 02 Sep 2017 07:28 PM IST
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बाढ़ खंड विभाग के कर्मचारी बचाव कार्य में जुट गए
- फोटो : अमर उजाला
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बलिया में घाघरा के नदी के तेवर फिर तल्ख हो गए हैं। इब्राहिमाबाद नैबरार में शनिवार की सुबह सठिया ढाले से 150 मीटर की दूरी पर घाघरा की कटान शुरू हो गई। एक घंटे के अंदर घाघरा बीएसटी बांध को भी काटने लगी। सूचना मिलने पर बाढ़ खंड विभाग के कर्मचारी बचाव कार्य में जुट गए। शाम को कटान कम हो गई थी।
बीएसटी बांध के घाघरा की कटान की जद में आने से शनिवार सुबह बाढ़ खंड विभाग में खलबली मच गई। जानकारी होने पर विभाग ने बांध को बचाने के उपाय शुरू कर दिए।
उधर, आसपास के गांवों के लोगों का आरोप है कि विभाग के अधिकारी लापरवाही बरतते हैं। घाघरा के दो-चार दिन शांत रहने पर विभाग भी सुस्त हो गया। प्रधान बच्चा यादव, रामनरेश प्रसाद, राजू की मानें तो बंधे से बचाव का काम सही जगह कराया गया होता तो नुकसान कम होता।
शनिवार सुबह के हालात खतरनाक थे। बाद में कटान कम हो गई। उधर, अधीक्षण अभियंता बाढ़ खंड एके राय का कहना है कि कटान स्थल पर संसाधन की कुछ कमी आ गई थी। हमें उम्मीद नहीं थी कि घाघरा शांत रहने के बाद अचानक इस कदर उग्र हो जाएगी। बचाव कार्य किए जा रहे हैं।
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बीएसटी बांध के घाघरा की कटान की जद में आने से शनिवार सुबह बाढ़ खंड विभाग में खलबली मच गई। जानकारी होने पर विभाग ने बांध को बचाने के उपाय शुरू कर दिए।
उधर, आसपास के गांवों के लोगों का आरोप है कि विभाग के अधिकारी लापरवाही बरतते हैं। घाघरा के दो-चार दिन शांत रहने पर विभाग भी सुस्त हो गया। प्रधान बच्चा यादव, रामनरेश प्रसाद, राजू की मानें तो बंधे से बचाव का काम सही जगह कराया गया होता तो नुकसान कम होता।
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शनिवार सुबह के हालात खतरनाक थे। बाद में कटान कम हो गई। उधर, अधीक्षण अभियंता बाढ़ खंड एके राय का कहना है कि कटान स्थल पर संसाधन की कुछ कमी आ गई थी। हमें उम्मीद नहीं थी कि घाघरा शांत रहने के बाद अचानक इस कदर उग्र हो जाएगी। बचाव कार्य किए जा रहे हैं।
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बंधा टूटा तो कई गांव होंगे प्रभावित
घाघरा की कटान होने से मची खलबली
- फोटो : अमर उजाला
यदि बीएसटी बांध टूटा तो ग्राम पंचायत कोड़हरा नौबरार (जयप्रकाशनगर), ग्राम पंचायत खवासपुर, सोनकीभांट, कोड़हरा उपरवार, शिवपूर कर्ण छपरा, शुकरौली, श्रीपतिपुर, सोनबरसा, इब्राहिमाबाद उपरवार, सोनबरसा, रामनगर, बाजिदपुर, दलनछपरा, रामपुर की आबादी प्रभावित होगी। इसके अलावा लालगंज और दोकटी क्षेत्र की भी लाखों की आबादी प्रभावित होगी। हजारों एकड़ फसल भी बर्बाद हो जाएगी।