गंगा की अविरलता को धार देंगे गंगामित्र: प्रयागराज से बलिया तक चलेगा विशेष अभियान, 315 किमी लंबे क्षेत्र में बनेंगे जागरूकता केंद्र
मार्च के अंतिम सप्ताह में नमामि गंगे के तहत अविरल गंगा, निर्मल गंगा, अर्थ गंगा, आध्यात्मिक गंगा एवं पारिस्थितिक गंगा को केंद्र में रखकर शुरू होने वाले अभियान से गंगा की निर्मलता एवं अविरलता को धार मिलेगी।
विस्तार
गंगा की अविरलता को धार देने के लिए गंगामित्रों की पूरी फौज अभियान चलाएगी। प्रयागराज से बलिया तक 315 किलोमीटर लंबे गंगाक्षेत्र में गंगा जागरूकता केंद्र बनाकर आम जनता को गंगा के हर पहलू से जोड़ा जाएगा। मार्च के अंतिम सप्ताह में नमामि गंगे के तहत अविरल गंगा, निर्मल गंगा, अर्थ गंगा, आध्यात्मिक गंगा एवं पारिस्थितिक गंगा को केंद्र में रखकर शुरू होने वाले अभियान से गंगा की निर्मलता एवं अविरलता को धार मिलेगी।
महामना मालवीय गंगा शोध केंद्र बीएचयू के चेयरमैन व पर्यावरण वैज्ञानिक प्रो. बीडी त्रिपाठी के निर्देशन में गंगा संरक्षण के लिए अभियान मार्च के अंतिम सप्ताह से शुरू होगा। इसके तहत लगभग 90 लाख की लागत से 315 किलोमीटर लंबे गंगाक्षेत्र में हर 21 किलोमीटर के अंतराल पर 15 गंगा जागरूकता शोध केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
इसके तहत 135 गंगा मित्रों द्वारा 650 गंगा ग्राम एवं सौ गंगावार्डों का चयन करके 1500 जलसंरक्षण समिति एवं 15 हजार जल संरक्षक सदस्य बनाए जाएंगे।
आध्यात्मिक गंगा
गंगा के प्रति आस्था पैदा करने के लिए 75 गंगा चौपालों के जरिये 45 सौ महिलाओं और 150 स्कूलों के 10 हजार पांच सौ बच्चों में गंगा संस्कार डालकर नमामि गंगे के कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा।
अर्थ गंगा
75 गंगा ग्रामों के किसानों को गंगाजल के नाम कंजम्पिटव उपभोग, वर्मी कंपोस्टिंग, आर्गेनिक फार्मिंग, सब्जियों एवं फलों की गंगा ब्रांडिंग तथा नवीन सिंचाई की पद्धति की तकनीक की जानकारी देकर उनके आय में बढ़ोत्तरी के साथ आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
होगा पारिस्थतिक विकास
गंगा के पारिस्थितिक विकास के लिए 150 स्कूल, नदियों, तालाब के किनारे, पार्कों एवं मंदिरों के आसपास पौधरोपण एवं जलीय जीवों के संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इको स्किल्ड तकनीकी के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।