वाराणसी समेत आसपास के जिलों में बाढ़ का खतरा, गाजीपुर में खतरे के निशान के ऊपर बह रही गंगा
पूर्वांचल में गंगा और गोमती के जलस्तर में वृद्धि का क्रम सोमवार को भी बना रहा। बलिया में उफनाती गंगा के पलट प्रवाह के चलते दिन में 2 बजे दुबे छपरा रिंग बांध टूट गया और आसपास के गांवों की 35 हजार की आबादी पानी में घिर गई। सैकड़ों एकड़ खेत जलमग्न हो गए। घटना के वक्त जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत व एसपी देवेंद्र कुमार बंधे पर ही मौजूद थे।
केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार बलिया में गंगा का जलस्तर 58.96 मी. दर्ज किया गया, जिसमें प्रति घंटा आधा सेमी का बढ़ाव बना हुआ था। वहीं वाराणसी में गंगा में खतरे के निशान की ओर बढ़ रही है यहां जलस्तर चेतावनी बिंदु 70.26 मी. को पार कर 70.76 मीटर तक पहुंच गया। जलस्तर एक सेंटीमीटर प्रति घंटा बढ़ रहा है। डीएम सुरेंद्र सिंह ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया।
गाजीपुर में दोपहर में गंगा खतरे के निशान 63.105 मीटर से आधा मीटर ऊपर बह रही थी। शाम छह बजे जलस्तर 63.610 मी. रिकार्ड किया गया। इसमें एक सेमी प्रति घंटे की दर से वृद्धि हो रही थी। बाढ़ से सैकड़ों गांव प्रभावित है और हजारों एकड़ की फसल जलमग्न हो गई है। गांवों के संपर्क मार्ग डूब गए हैं।
भदोही में शाम को जल स्तर 79 मीटर पार कर गया। लगातार बढ़ते जलस्तर से कोनिया क्षेत्र में धीरे- धीरे बाढ़ की स्थिति नजर आने लगी है। छेछुआ और भुर्रा गांव में गंगा कटान तेज हो गया है। जिससे किसानों की उपजाऊ भूमि गंगा की कुपित धाराओं की भेंट चढ़ती जा रही है।
मिर्जापुर में सोमवार की शाम जलस्तर 76. 790 मीटर दर्ज किया गया। जिले में गंगा का खतरे का निशान 77. 724 मीटर है। ओझला पुल के पास भी गंगा का पानी काफी ऊपर तक आ गया है। प्रशासन भी चाक-चौबंद हो गया है। प्रशासनिक अधिकारी बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का जायजा लेने निकल पड़े हैं। बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर राहत के लिए काम करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।