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गंगा कैसे हो स्वच्छः नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा में लटका है 1000 करोड़ का प्रोजेक्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 27 Feb 2018 01:32 PM IST
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ललिता घाट पर ऐसा है नजारा
- फोटो : अमर उजाला
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जर्जर हो चुकी ब्रांच सीवेज लाइन को बदलकर गंगा किनारे के इलाकों में सीवेज व्यवस्था को बेहतर करने के लिए डेढ़ साल पहले नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा (एनएमसीजी) को भेजा गया प्रस्ताव अभी मंजूरी के इंतजार में है। अब तक एनएमसीजी ने प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
ब्रांच सीवेज लाइन के जर्जर होने से एक तरफ जहां पक्का महाल की गलियों में सीवर ओवरफ्लो से नागरिक परेशान हैं, वहीं तमाम स्थानों पर सीवेज घाटों की सीढ़ियों से होते हुए सीधे गंगा में पहुंच रहा है।
गंगा किनारे के इलाकों में ब्रांच सीवेज लाइन की खस्ताहाली अरसे से मुसीबत का सबब बनी है। इसके चलते सीवर ओवरफ्लो होने और गलियों में गंदगी फैलने की समस्याएं लगातार बनी रहती हैं। ब्रांच लाइनों के ध्वस्त होने के चलते कई जगह छोटी-बड़ी नालियों के जरिए सीवेज सीधे गंगा में बहाया जा रहा है।
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गंगा स्वच्छता और सीवेज समस्या के मद्देनजर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने सितंबर 2016 में जर्जर ब्रांच लाइनों को बदलने के लिए एनएमसीजी को प्रस्ताव भेजा था। इसके लिए एक हजार करोड़ की अलग-अलग तीन डीपीआर तैयार कराकर भेजी गई लेकिन इसे अब तक एनएमसीजी की मंजूरी नहीं मिल पाई।
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के प्रोजेक्ट मैनेजर एसके वर्मन का कहना है कि प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने का इंतजार है। एनएमसीजी की मंजूरी के आधार पर योजना आगे बढ़ाई जाएगी।
रोजाना गंगा में गिरता है 300 एमएलडी सीवेज
गंगा में कई नालों के अलावा वरुणा एवं अस्सी के जरिए रोजाना 300 एमएलडी सीवेज गिरता है। हालांकि सरकारी आंकड़े में 200 एमएलडी सीवर गिरने की बात है।
अधिकारियों के मुताबिक गोइठहां और दीनापुर में एसटीपी निर्माणाधीन है। वहीं रमना में अभी एसटीपी प्रस्तावित है। इन एसटीपी के तैयार होने के बाद सीवेज शोधन की व्यवस्था बेहतर हो जाएगी।
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ब्रांच सीवेज लाइन के जर्जर होने से एक तरफ जहां पक्का महाल की गलियों में सीवर ओवरफ्लो से नागरिक परेशान हैं, वहीं तमाम स्थानों पर सीवेज घाटों की सीढ़ियों से होते हुए सीधे गंगा में पहुंच रहा है।
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गंगा किनारे के इलाकों में ब्रांच सीवेज लाइन की खस्ताहाली अरसे से मुसीबत का सबब बनी है। इसके चलते सीवर ओवरफ्लो होने और गलियों में गंदगी फैलने की समस्याएं लगातार बनी रहती हैं। ब्रांच लाइनों के ध्वस्त होने के चलते कई जगह छोटी-बड़ी नालियों के जरिए सीवेज सीधे गंगा में बहाया जा रहा है।
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गंगा स्वच्छता और सीवेज समस्या के मद्देनजर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने सितंबर 2016 में जर्जर ब्रांच लाइनों को बदलने के लिए एनएमसीजी को प्रस्ताव भेजा था। इसके लिए एक हजार करोड़ की अलग-अलग तीन डीपीआर तैयार कराकर भेजी गई लेकिन इसे अब तक एनएमसीजी की मंजूरी नहीं मिल पाई।
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के प्रोजेक्ट मैनेजर एसके वर्मन का कहना है कि प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने का इंतजार है। एनएमसीजी की मंजूरी के आधार पर योजना आगे बढ़ाई जाएगी।
रोजाना गंगा में गिरता है 300 एमएलडी सीवेज
गंगा में कई नालों के अलावा वरुणा एवं अस्सी के जरिए रोजाना 300 एमएलडी सीवेज गिरता है। हालांकि सरकारी आंकड़े में 200 एमएलडी सीवर गिरने की बात है।
अधिकारियों के मुताबिक गोइठहां और दीनापुर में एसटीपी निर्माणाधीन है। वहीं रमना में अभी एसटीपी प्रस्तावित है। इन एसटीपी के तैयार होने के बाद सीवेज शोधन की व्यवस्था बेहतर हो जाएगी।
निगम की सफाई परीक्षा में कई होटल-अस्पताल पास
सफाई कर्मचारी
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से होने वाले स्वच्छता सर्वे से पहले नगर निगम अपनी तैयारियों को पुख्ता करने में जुटा है। इसके लिए नगर निगम ने शहर के विभिन्न होटलों, अस्पतालों में स्थानीय स्तर पर स्वच्छता सर्वे कराया। इसमें कई अस्पतालों और होटल प्रबंधनों को निगम प्रशासन ने मानक की कसौटी पर खरा पाया है। इसकी रिपोर्ट भी आ चुकी है।
जिसके आधार पर प्रथम द्वितीय और तृतीय स्थान पाने वाले प्रतिष्ठानों की सूची जारी की गई है। सर्वे के लिए निगम प्रशासन ने दस-दस बिंदु तय किए थे। होटलों के लिए टॉयलेट की साफ-सफाई, पान थूकना, किचन की सफाई, बर्तन और कर्मचारियों के ड्रेस कोड तक की जांच की गई।
इसमें प्रथम स्थान ताज गंगेज, दूसरा स्थान होटल हिंदुस्तान इंटरनेशनल और तीसरा स्थान होटल मदिन ग्रैंड को प्राप्त हुआ है। जबकि स्वच्छ विद्यालय में परिसर से लेकर क्लास रूम और वॉशरूम तक की जांच कराई गई। बच्चों से स्वच्छता संबंधित प्रश्न पूछे गए।
इस आधार पर राजघाट एजुकेशन सेंटर को प्रथम, राजकीय क्विंस कॉलेज को द्वितीय और अशोका इंस्टीट्यूट ऑफ टेकभनोलॉजी को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ।
स्वच्छ अस्पताल की रैकिंग के लिए परिसर और वार्डो में साफ सफाई से लेकर मेडिकल वेस्टेज के उचित प्रबंधों के साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए किए गए उपाय आदि बिंदुओं पर जांच की गई।
एपेक्स, ग्लैक्सी और आशीर्वाद हास्पिटल को प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त हुआ है। वहीं स्वच्छ मोहल्ले में मालवीय मार्केट कृपलानी मार्केट, पुलिस लाइन से अर्दली बाजार, मलदहिया से लहुराबीर को क्रमश: पहला, दूसरा और तीसरा पुरस्कार मिला।
जबकि मां भागीरथी कॉलोनी, डुमरावबाग कॉलोनी और श्रीनगर कॉलोनी को स्वच्छ मोहल्ले का प्रमाण पत्र दिया गया। नगर स्वास्थ्य अधिकारी एके दुबे ने बताया कि शहरी विकास मंत्रालय के सर्वे से पहले हर स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। पूरी कोशिश है कि काशी को इस बार और बेहतर रैंकिंग हासिल हो।
जिसके आधार पर प्रथम द्वितीय और तृतीय स्थान पाने वाले प्रतिष्ठानों की सूची जारी की गई है। सर्वे के लिए निगम प्रशासन ने दस-दस बिंदु तय किए थे। होटलों के लिए टॉयलेट की साफ-सफाई, पान थूकना, किचन की सफाई, बर्तन और कर्मचारियों के ड्रेस कोड तक की जांच की गई।
इसमें प्रथम स्थान ताज गंगेज, दूसरा स्थान होटल हिंदुस्तान इंटरनेशनल और तीसरा स्थान होटल मदिन ग्रैंड को प्राप्त हुआ है। जबकि स्वच्छ विद्यालय में परिसर से लेकर क्लास रूम और वॉशरूम तक की जांच कराई गई। बच्चों से स्वच्छता संबंधित प्रश्न पूछे गए।
इस आधार पर राजघाट एजुकेशन सेंटर को प्रथम, राजकीय क्विंस कॉलेज को द्वितीय और अशोका इंस्टीट्यूट ऑफ टेकभनोलॉजी को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ।
स्वच्छ अस्पताल की रैकिंग के लिए परिसर और वार्डो में साफ सफाई से लेकर मेडिकल वेस्टेज के उचित प्रबंधों के साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए किए गए उपाय आदि बिंदुओं पर जांच की गई।
एपेक्स, ग्लैक्सी और आशीर्वाद हास्पिटल को प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त हुआ है। वहीं स्वच्छ मोहल्ले में मालवीय मार्केट कृपलानी मार्केट, पुलिस लाइन से अर्दली बाजार, मलदहिया से लहुराबीर को क्रमश: पहला, दूसरा और तीसरा पुरस्कार मिला।
जबकि मां भागीरथी कॉलोनी, डुमरावबाग कॉलोनी और श्रीनगर कॉलोनी को स्वच्छ मोहल्ले का प्रमाण पत्र दिया गया। नगर स्वास्थ्य अधिकारी एके दुबे ने बताया कि शहरी विकास मंत्रालय के सर्वे से पहले हर स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। पूरी कोशिश है कि काशी को इस बार और बेहतर रैंकिंग हासिल हो।