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गंगा दशहराः दुर्लभ संयोग में गंगा तट पर उमड़ा आस्थावानों का रेला, लहरों संग बही भक्ति रसधार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 24 May 2018 10:20 PM IST
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गंगा दशहरा पर पुण्य की डुबकी लगाने उमड़ा आस्थावानों का रेला
- फोटो : अमर उजाला
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गंगा दशहरा पर गुरुवार को पतितपावनी का तट आस्था और उल्लास की रौनक से गुलजार हो उठा। राजघाट, दशाश्वमेध से अस्सी घाट तक लोक उत्सव का मेला सजा। पुण्य की डुबकी लगाने के लिए हजारों आस्थावान उमड़ पड़े।
तड़के से शुरू हुआ स्नान, दान का सिलसिला देर शाम तक नहीं थमा। इस बार योग विशेष का बाहुल्य होने से गंगा दशहरा पर स्नान, दान, जप, तप, व्रत और उपवास आदि करने के लिए काशी में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु उमड़े। गंगा स्नान के बाद बाबा काशी विश्वनाथ का दर्शन-पूजन कर धन-धन्य हुए।
पतित पावनी गंगा के अवतरण दिवस पर गुरुवार को शिव की नगरी काशी में गंगा दहशरा के उत्सव की धूम मची। गंगा का वेद की ऋचाओं से कहीं दुग्धाभिषेक तो कहीं महा आरती कर उत्सव मनाया गया।
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घाट की सीढ़ियों पर कहीं महिलाएं दीपदान कर रही थीं तो कहीं समूहों में हल्दी-चंदन की अल्पनाएं बनाकर मंगल गीत गाए जा रहे थे। गंगा की लहरों पर भी दीये प्रज्ज्वलित कर उनके प्रति आस्था निवेदित की जा रही थी।
अस्सी घाट, तुलसी घाट, गंगा महल घाट, हनुमान घाट, केदार घाट, राजा घाट, मान सरोवर घाट, दशाश्वमेध घाट, अहिल्याबाई घाट, शीतला घाट, मान मंदिर घाट, पंचगंगा घाट, दुर्गा घाट, गायघाट, राजघाट पर बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने गंगा दशहरा पर स्नान किया।
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तड़के से शुरू हुआ स्नान, दान का सिलसिला देर शाम तक नहीं थमा। इस बार योग विशेष का बाहुल्य होने से गंगा दशहरा पर स्नान, दान, जप, तप, व्रत और उपवास आदि करने के लिए काशी में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु उमड़े। गंगा स्नान के बाद बाबा काशी विश्वनाथ का दर्शन-पूजन कर धन-धन्य हुए।
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पतित पावनी गंगा के अवतरण दिवस पर गुरुवार को शिव की नगरी काशी में गंगा दहशरा के उत्सव की धूम मची। गंगा का वेद की ऋचाओं से कहीं दुग्धाभिषेक तो कहीं महा आरती कर उत्सव मनाया गया।
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घाट की सीढ़ियों पर कहीं महिलाएं दीपदान कर रही थीं तो कहीं समूहों में हल्दी-चंदन की अल्पनाएं बनाकर मंगल गीत गाए जा रहे थे। गंगा की लहरों पर भी दीये प्रज्ज्वलित कर उनके प्रति आस्था निवेदित की जा रही थी।
अस्सी घाट, तुलसी घाट, गंगा महल घाट, हनुमान घाट, केदार घाट, राजा घाट, मान सरोवर घाट, दशाश्वमेध घाट, अहिल्याबाई घाट, शीतला घाट, मान मंदिर घाट, पंचगंगा घाट, दुर्गा घाट, गायघाट, राजघाट पर बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने गंगा दशहरा पर स्नान किया।
बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए लगी लंबी कतार
गंगा स्नान
- फोटो : अमर उजाला
गंगा स्नान के बाद बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए भी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। इस बार गर करण, वृषस्थ सूर्य, कन्या का चंद्र का योग होने के कारण श्रद्धालु पतितपावनी की धारा में पुण्य की डुबकी लगाने के लिए तड़के ही घाटों पर पहुंच गए।
दिन निकलने तक अस्सी, दशाश्वमेध से लेकर राजघाट तक हजारों श्रद्धालुओं का तांता लग गया। गंगा के इस पार से लेकर उस पार तक मेले जैसे नजारे के बीच दूरदराज से आए श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचते रहे और हर-हर गंगे, हर-हर महादेव के जयघोष से गंगा तट गूंजता रहा।
घंटा-घड़ियाल की पावन अनुगूंज के बीच स्नान के बाद पंडों की चौकियाें पर जाकर श्रद्धालुओं ने तिलक लगाया। मां गंगा की सविधि पूजा-उपासना के बाद यथा सामर्थ्य दान कर पुण्य फल के भागी बने।
इस दौरान आरती-पूजा और अनुष्ठानों के जरिए गंगा की अविरता-निर्मलता के संकल्प दोहराए गए। गंगा जल न छोड़े जाने और घाटों पर फैली गंदगी के चलते श्रद्धालुओं को दिक्कतें भी हुईं।
दिन निकलने तक अस्सी, दशाश्वमेध से लेकर राजघाट तक हजारों श्रद्धालुओं का तांता लग गया। गंगा के इस पार से लेकर उस पार तक मेले जैसे नजारे के बीच दूरदराज से आए श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचते रहे और हर-हर गंगे, हर-हर महादेव के जयघोष से गंगा तट गूंजता रहा।
घंटा-घड़ियाल की पावन अनुगूंज के बीच स्नान के बाद पंडों की चौकियाें पर जाकर श्रद्धालुओं ने तिलक लगाया। मां गंगा की सविधि पूजा-उपासना के बाद यथा सामर्थ्य दान कर पुण्य फल के भागी बने।
इस दौरान आरती-पूजा और अनुष्ठानों के जरिए गंगा की अविरता-निर्मलता के संकल्प दोहराए गए। गंगा जल न छोड़े जाने और घाटों पर फैली गंदगी के चलते श्रद्धालुओं को दिक्कतें भी हुईं।