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नरेंद्र मोदी मोर्चा के नाम पर चार राज्यों में फैला ठगी का जाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Thu, 18 Jan 2018 02:15 PM IST
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लाल स्वेटर में आशीष सिंह राजपूत
- फोटो : अमर उजाला
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धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार नरेंद्र मोदी मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष सिंह राजपूत उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों में संगठन के पदाधिकारी बनाने, नौकरी दिलाने, गनर दिलाने और ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर धन उगाही करता था। ग्राहकों की तलाश और रुपये का लेनदेन राजस्थान का इसका दूसरा साथी राजीव रंजन करता था। वह संगठन का राष्ट्रीय महामंत्री था। बुधवार को शहर कोतवाली में इसका खुलासा करते हुए एसपी अजय कुमार साहनी ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।
एसपी ने बताया कि शहर के आसिफगंज मुहल्ला निवासी सैय्यद काजी अरशद ने 27 अक्तूबर 2017 को शहर कोतवाली में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि बिहार के वैशाली जिले के विद्योपुर थाना क्षेत्र के पकौली गांव निवासी आशीष सिंह राजपूत, उसकी पत्नी डाली त्यागी और उसका साथी राजीव रंजन कौशल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ‘नरेंद्र मोदी मोर्चा’ नाम का संगठन बनाकर लोगों से धनउगाही करते हैं।
संगठन का रजिस्ट्रेशन गाजियाबाद चिटफंड कार्यालय से कराया गया है। इनका रैकेट यूपी के अलावा गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों में फैला है। ये लोग मोर्चा का सदस्य और पदाधिकारी बनाने के नाम पर लोगों से रुपये ऐंठते हैं। खुद उससे भी दो किस्तों में 1.10 लाख रुपये ले चुके हैं। बड़ा पद देने के लिए और रुपये की मांग कर रहे थे।
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ये लोग बड़े अधिकारियों को हटाने और उन्हें मनचाहा पद दिलाने तथा संगठन के पदाधिकारियों को गनर दिलाने के नाम पर धनउगाही करते हैं। बुधवार को शहर कोतवाली पुलिस ने गाजियाबाद से आशीष को गिरफ्तार किया।
इसके पास धोखाधड़ी करने से संबंधित दस्तावेज बरामद हुए हैं। एसपी ने बताया कि रुपये का लेनदेन और ग्राहकों की तलाश करने वाले राजस्थान के राजीव रंजन कौशल की पुलिस तलाश कर रही है।
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एसपी ने बताया कि शहर के आसिफगंज मुहल्ला निवासी सैय्यद काजी अरशद ने 27 अक्तूबर 2017 को शहर कोतवाली में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि बिहार के वैशाली जिले के विद्योपुर थाना क्षेत्र के पकौली गांव निवासी आशीष सिंह राजपूत, उसकी पत्नी डाली त्यागी और उसका साथी राजीव रंजन कौशल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ‘नरेंद्र मोदी मोर्चा’ नाम का संगठन बनाकर लोगों से धनउगाही करते हैं।
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संगठन का रजिस्ट्रेशन गाजियाबाद चिटफंड कार्यालय से कराया गया है। इनका रैकेट यूपी के अलावा गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों में फैला है। ये लोग मोर्चा का सदस्य और पदाधिकारी बनाने के नाम पर लोगों से रुपये ऐंठते हैं। खुद उससे भी दो किस्तों में 1.10 लाख रुपये ले चुके हैं। बड़ा पद देने के लिए और रुपये की मांग कर रहे थे।
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ये लोग बड़े अधिकारियों को हटाने और उन्हें मनचाहा पद दिलाने तथा संगठन के पदाधिकारियों को गनर दिलाने के नाम पर धनउगाही करते हैं। बुधवार को शहर कोतवाली पुलिस ने गाजियाबाद से आशीष को गिरफ्तार किया।
इसके पास धोखाधड़ी करने से संबंधित दस्तावेज बरामद हुए हैं। एसपी ने बताया कि रुपये का लेनदेन और ग्राहकों की तलाश करने वाले राजस्थान के राजीव रंजन कौशल की पुलिस तलाश कर रही है।
बीटेक में फेल होने के बाद शुरू की दलाली
नरेंद्र मोदी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष सिंह(लाल कपड़ों में)
- फोटो : अमर उजाला
आशीष सिंह राजपूत ने वर्ष 2010 में 12 वीं पास करने के बाद मेरठ के एक कॉलेज में बीटेक में दाखिला कराया। लेकिन पहले ही वर्ष में वह फेल हो गया। इसके बाद उसने गाजियाबाद जाकर रियल स्टेट में प्लॉट व फ्लैट बेचनेे की दलाली शुरू कर दी। वर्ष 2015 में उसने डाली त्यागी से शादी कर ली। डॉली के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज है। मई 2017 में उसने गाजियाबाद चिटफंड कार्यालय से नरेंद्र मोदी मोर्चा का रजिस्ट्रेशन कराया व सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जोड़ने लगा।
प्रधानमंत्री से मिलाने का देता था आश्वासन
आशीष सिंह राजपूत के क्रियाकलापों की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय तक को है। एसपी अजय कुमार साहनी ने बताया कि आशीष प्रधानमंत्री से मुलाकात कराने का झूठा आयोजन करता था। लोगों को विश्वास दिलाने के लिए समय-समय पर प्रदेश मुख्यालयों पर मीटिंग भी कराता था।
शिकायतकर्ता भी शक के दायरे में
नरेंद्र मोदी मोर्चा के नाम पर धनउगाही करने वाले गिरोह के सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद इनके विरुद्ध केस दर्ज कराने वाले सैय्यद काजी अरशद भी शक के दायरे में है। पुलिस उसकी भी गतिविधियों की जांच कर रही है। एसपी सिटी सुभाष चंद्र गंगवार ने बताया कि सैय्यद काजी अरशद ने भी अधिकारियों के ट्रांसफर और स्वयं को गनर दिलाने की मांग की थी।
प्रधानमंत्री से मिलाने का देता था आश्वासन
आशीष सिंह राजपूत के क्रियाकलापों की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय तक को है। एसपी अजय कुमार साहनी ने बताया कि आशीष प्रधानमंत्री से मुलाकात कराने का झूठा आयोजन करता था। लोगों को विश्वास दिलाने के लिए समय-समय पर प्रदेश मुख्यालयों पर मीटिंग भी कराता था।
शिकायतकर्ता भी शक के दायरे में
नरेंद्र मोदी मोर्चा के नाम पर धनउगाही करने वाले गिरोह के सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद इनके विरुद्ध केस दर्ज कराने वाले सैय्यद काजी अरशद भी शक के दायरे में है। पुलिस उसकी भी गतिविधियों की जांच कर रही है। एसपी सिटी सुभाष चंद्र गंगवार ने बताया कि सैय्यद काजी अरशद ने भी अधिकारियों के ट्रांसफर और स्वयं को गनर दिलाने की मांग की थी।
पहले दर्ज एक और मुकदमे पर अब गई नजर
fraud shimla
नरेंद्र मोदी मोर्चा बनाकर लोगों से ठगी करने का यह पहला मामला प्रकाश में नहीं आया है। इससे पूर्व भी पीएमओ कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी के विरुद्ध अहरौला थाने में केस दर्ज कराया गया है। इसमें तहबरपुर थाना क्षेत्र के हजारेपुर गांव निवासी एक व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है, जो खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात होना बताकर चार राज्यों में अंग्रेेजी शराब की दुकान खुलवाने के नाम पर 25 लाख की ठगी कर चुका है। पुलिस इस मुकदमे को भी संज्ञान में लेते हुए जांच कर रही है।
अहरौला थाने में अप्रैल 2017 में केस दर्ज कराने वाला दुर्गेश तिवारी समदी गांव का निवासी है। दिल्ली में व्यापार होने की वजह से दुर्गेश का पूरा परिवार वहीं रहता है। दुर्गेश का दूर का रिश्तेदार संजय पांडे तहबरपुर थाना क्षेत्र के हजारेपुर गांव का निवासी है। दुर्गेश तिवारी का आरोप था संजय ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय में अधिकारी बताया और उसके पिता रामजीत को चार प्रदेशों में शराब की थोक दुकान खोलने के लिए लाइसेंस दिलाने के नाम पर 25 लाख रुपये ले लिए। लेकिन एक राज्य में भी ठेका नहीं दिला सका।
दुर्गेश ने संजय के विरुद्ध अहरौला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। मामला प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ा होने की वजह से पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। बुधवार को आशीष का मामला खुलने पर इस मामले को भी संज्ञान में लेकर जांच शुरू कर दी है।
अहरौला थाने में अप्रैल 2017 में केस दर्ज कराने वाला दुर्गेश तिवारी समदी गांव का निवासी है। दिल्ली में व्यापार होने की वजह से दुर्गेश का पूरा परिवार वहीं रहता है। दुर्गेश का दूर का रिश्तेदार संजय पांडे तहबरपुर थाना क्षेत्र के हजारेपुर गांव का निवासी है। दुर्गेश तिवारी का आरोप था संजय ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय में अधिकारी बताया और उसके पिता रामजीत को चार प्रदेशों में शराब की थोक दुकान खोलने के लिए लाइसेंस दिलाने के नाम पर 25 लाख रुपये ले लिए। लेकिन एक राज्य में भी ठेका नहीं दिला सका।
दुर्गेश ने संजय के विरुद्ध अहरौला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। मामला प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ा होने की वजह से पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। बुधवार को आशीष का मामला खुलने पर इस मामले को भी संज्ञान में लेकर जांच शुरू कर दी है।