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विशेष विमान से तलाशी जा रही भू-गर्भ में छिपी बहुमूल्य खनिज संपदा
हेमंत दुबे, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 04 Apr 2018 10:47 AM IST
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पूर्वांचल से सटे बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड के जनपदों खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में इन दिनों धरती की गोद में छिपी बहुमूल्य खनिज संपदाओं की तलाश की जा रही है। अत्याधुनिक संसाधनों से लैस विशेष विमान लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से जब-तब उड़ान भरता है।
विमान में भूगर्भीय सर्वेंक्षण विशेषज्ञ और खनिज मंत्रालय के अधिकारियों की टीम जमीन से काफी कम ऊंचाई पर उड़ती है। सर्वेक्षण करने वाली कंपनी आईआईसी टेक्नोलॉजीज, हैदराबाद के अधिकारियों ने बताया कि खनिज मंत्रालय और भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग की ओर से एयरोबोर्न फिजिक्स सर्वे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश में कराया जा रहा है।
सर्वे करने के लिए उड़ान भरने वाले इस विशेष विमान में चुंबकीय और गुरुत्वाकर्षण से संबंधित अत्याधुनिक उपकरण, एचडी कैमरे व विशेष सेंसर लगे हुए हैं। अधिकारियों की मानें तो पिछले करीब डेढ़ महीने से सर्वेक्षण चल रहा है। सर्वेक्षण तीन महीने और चलेगा।
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पहले चरण में धरती के ऊपरी सतह का सर्वेक्षण हो चुका है। अब धरती की नीचे की सतह का सर्वेक्षण शुरू हो गया है। पहाड़ी क्षेत्रों पर खास फोकस है। जिन स्थानों पर चुंबकीय भिन्नता और गुरुत्वाकर्षण में भिन्नता पाई जा रही है, वहां खनिज मिलने की ज्यादा संभावना के मद्देनजर वहां विधिवत जांच की जा रही है।
विशेष विमान वहां अधिक चक्कर लगा रहा है। आने वाले दिनों में देशभर में ऐसा सर्वेक्षण किया जाएगा। फिलहाल, खनिज मिलने की ज्यादा संभावना वाले इलाकों में सर्वेक्षण हो रहा है।
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विमान में भूगर्भीय सर्वेंक्षण विशेषज्ञ और खनिज मंत्रालय के अधिकारियों की टीम जमीन से काफी कम ऊंचाई पर उड़ती है। सर्वेक्षण करने वाली कंपनी आईआईसी टेक्नोलॉजीज, हैदराबाद के अधिकारियों ने बताया कि खनिज मंत्रालय और भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग की ओर से एयरोबोर्न फिजिक्स सर्वे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश में कराया जा रहा है।
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सर्वे करने के लिए उड़ान भरने वाले इस विशेष विमान में चुंबकीय और गुरुत्वाकर्षण से संबंधित अत्याधुनिक उपकरण, एचडी कैमरे व विशेष सेंसर लगे हुए हैं। अधिकारियों की मानें तो पिछले करीब डेढ़ महीने से सर्वेक्षण चल रहा है। सर्वेक्षण तीन महीने और चलेगा।
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पहले चरण में धरती के ऊपरी सतह का सर्वेक्षण हो चुका है। अब धरती की नीचे की सतह का सर्वेक्षण शुरू हो गया है। पहाड़ी क्षेत्रों पर खास फोकस है। जिन स्थानों पर चुंबकीय भिन्नता और गुरुत्वाकर्षण में भिन्नता पाई जा रही है, वहां खनिज मिलने की ज्यादा संभावना के मद्देनजर वहां विधिवत जांच की जा रही है।
विशेष विमान वहां अधिक चक्कर लगा रहा है। आने वाले दिनों में देशभर में ऐसा सर्वेक्षण किया जाएगा। फिलहाल, खनिज मिलने की ज्यादा संभावना वाले इलाकों में सर्वेक्षण हो रहा है।
200 मीटर की गहराई में दबे खनिजों का पता चलेगा
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खास विमान में लगे सेंसर धरती के अंदर 200 मीटर तक की गहराई में मौजूद खनिज संपदा के बारे में जानकारी कर लेते हैं। अधिकारियों ने बताया कि इसमें लगे उपकरण मिट्टी के अंदर की जांच के साथ-साथ चट्टानों के नीचे दबे खनिजों की भी पहचान कर लेते हैं। प्रतिदिन छह-सात घंटे सर्वेक्षण हो रहा है। पिछले साल नवंबर में कोहरे की वजह से सर्वेक्षण नहीं हो पाया था।
बीएचयू में जियोलॉजी विभाग के प्रो. मल्लिकार्जुन जोशी का कहना है कि सिंगरौली कोयले का सर्वाधिक बड़ा स्रोत है। उत्तर प्रदेश-बिहार के बार्डर पर अमझोर मे पाइराइट खनिज पाया जाता है। मिर्जापुर में सैंड स्टोन और लाइम स्टोन पाया जाता है। शंकरगढ़ भी ग्लास सैंड के लिए मशहूर है।
जियोलॉजी विभाग के ही प्रो. पीके सिंह के अनुसार बनारस और आसपास के जिलों में केवल विंध्य क्षेत्र ही ऐसा है, जहां बलुआ पत्थर पाया जाता है। इस क्षेत्र में कोई और खनिज पदार्थ नहीं पाए जाते हैं। विंध्य क्षेत्र से इतर सिंगरौली में कोयले के खदान जरूर पाए जाते हैं।
बीएचयू में जियोलॉजी विभाग के प्रो. मल्लिकार्जुन जोशी का कहना है कि सिंगरौली कोयले का सर्वाधिक बड़ा स्रोत है। उत्तर प्रदेश-बिहार के बार्डर पर अमझोर मे पाइराइट खनिज पाया जाता है। मिर्जापुर में सैंड स्टोन और लाइम स्टोन पाया जाता है। शंकरगढ़ भी ग्लास सैंड के लिए मशहूर है।
जियोलॉजी विभाग के ही प्रो. पीके सिंह के अनुसार बनारस और आसपास के जिलों में केवल विंध्य क्षेत्र ही ऐसा है, जहां बलुआ पत्थर पाया जाता है। इस क्षेत्र में कोई और खनिज पदार्थ नहीं पाए जाते हैं। विंध्य क्षेत्र से इतर सिंगरौली में कोयले के खदान जरूर पाए जाते हैं।