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इसरो के पूर्व अध्यक्ष के राधाकृष्णन ने वाराणसी में छात्रों को दिए सफलता के मंत्र

Wed, 11 Oct 2017 05:45 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Wed, 11 Oct 2017 05:45 PM IST
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former ISRO chief gave success tips to students in varanasi
पूर्व चेयरमैन पद्मभूषण डॉ. के राधाकृष्णन - फोटो : अमर उजाला
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व चेयरमैन पद्मभूषण डॉ. के राधाकृष्णन ने छात्र-युवाओं को जीवन में सफलता हासिल करने की राह बताई। इस राह की चुनौतियों, मुश्किलों को भी साझा किया। संघर्ष का हौसला भरा और लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा दी।
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्यअतिथि संबोधित करते हुए उन्होंने उपाधि धारकों से कहा कि अब वो वक्त आ गया है जब आपके सामने कठिन परिस्थितियां आएंगी और आपको साहसी फैसले लेने पड़ेंगे।
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असफलताएं भी सामने आएंगी लेकिन उससे हताश-निराश होने की नहीं बल्कि सीखने की जरूरत है। डॉ. राधाकृष्णन ने इस दौरान मंगलयान की चुनौतियों और उसकी सफलता की कहानी भी साझा की। इसके जरिए यह समझाया कि बेहद कठिन परिस्थितियों में भी कैसे अपने मिशन, अपने लक्ष्य को कामयाब बनाया जा सकता है।
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डॉ. राधाकृष्णन के नेतृत्व में ही मंगलयान का सफल प्रक्षेपण कर भारत ने पूरी दुनिया में अपनी क्षमता का लोहा मनवाया था। डॉ. राधाकृष्णन ने कहा कि मंगलयान से हमें और आपको प्रेरणा लेने की जरूरत है। हमें सिर्फ अपना लक्ष्य याद रखना चाहिए।

जुनून, समर्पण और निष्ठा के साथ कठिन परिस्थितियों में साहसिक निर्णय लेने चाहिए। जब बात राष्ट्रीय गरिमा की हो तब यह और जरूरी हो जाता है। जैसा कि हमने मंगलयान के प्रक्षेपण के दौरान किया। हमने सीमित संसाधनों और क्षमताओं के बीच अभिनव प्रयोग किए।

आलोचनाओं को सकारात्मक रूप में लिया और 24 सितंबर 2014 को भारत ने अपनी पहली ही कोशिश में इतिहास रच दिया। आज अमेरिका, रूस, जापान और चीन के बाद आधुनिक अंतरिक्ष युग में भारत का नाम है।

अंतरिक्ष अनुप्रयोग में भारत एक रोल मॉडल के रूप में वैश्विक स्तर पर पहचाना जा रहा है। रॉकेट साइंस अब मुहावरे की चीज नहीं रह गई। अब रॉकेट साइंस में भी हम आगे हैं। छात्र-युवाओं से आह्वान किया कि आप भी अभिनव प्रयोग करें।

आज प्रौद्योगिकी ने शिक्षा को समय और स्थान के बंधन से मुक्त कर दिया है। प्रौद्योगिकी बहुत तेजी से प्रगति कर रही है लेकिन हमें विघटनकारी तकनीक से सतर्क रहना होगा।

 

‘मेरे बॉस रहे हैं डॉ. राधाकृष्णन’

former ISRO chief gave success tips to students in varanasi
convocation - फोटो : अमर उजाला
काशी विद्यापीठ के कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग ने स्वागत संबोधन में बताया कि डॉ. राधाकृष्णन उनके बॉस रहे हैं। कुलपति ने उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि उन्हें उनके गतिशील नेतृत्व में काम करने का मौका मिला, वहीं डॉ. राधाकृष्णन ने भी कहा कि उन्हें डॉ. नाग के तौर पर एक बेहतर सहयोगी मिला।

रिमोट सेंसिंग के क्षेत्र में हम उनकी कोशिशों की सराहना करते हैं। जल्द ही डॉ. के राधाकृष्णन पर एक बायोपिक बनने जा रही है ताकि लोग ये जान सकें कि मंगलयान की सफलता के पीछे कौन था और उनके जीवन, उनकी सफलताओं से प्रेरणा ले सकें।

फिल्म निर्माता निखिल आडवानी डॉ. के राधाकृष्णन की प्रेरणादायक कहानी लेकर आ रहे हैं। इस बायोपिक में भी लोगों को यही दिखाने की कोशिश की जाएगी कि कुछ भी नामुमकिन नहीं, अगर लक्ष्य को हासिल करने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं।
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