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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   First of all, Shraddha of Purnima, Pitru Paksha will be of 16 days.

Pitru Paksha 2023: इस बार 16 दिन का रहेगा पितृपक्ष, भूलकर भी ना करें ये काम, जानें श्राद्ध करने की तिथियां

Mon, 11 Sep 2023 09:35 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Mon, 11 Sep 2023 09:35 AM IST
सार

Pitru Paksha 2023:  हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार पितृ पक्ष 15 दिन देरी से शुरू होंगे, क्योंकि इस बार पुरुषोत्तम या अधिक मास होने के कारण इस वर्ष श्राद्ध पक्ष की शुरुआत 29 सितंबर से हो रही है और 14 अक्तूबर को श्राद्ध महालय पर इसकी समाप्ति होगी।

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First of all, Shraddha of Purnima, Pitru Paksha will be of 16 days.
पितृ पक्ष 2023 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रद्धया इदं श्राद्धम् (जो श्रद्धा से किया जाए, वह श्राद्ध है) भावार्थ है प्रेत और पितर के निमित्त, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक जो अर्पित किया जाए वह श्राद्ध है। अश्विन कृष्ण प्रतिपदा से अमावस्या तक 15 दिनों का पितृपक्ष होता है लेकिन इस बार पूर्णिमा से पितृपक्ष की शुरुआत होने से यह 16 दिनों का होगा।

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ज्योतिषाचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री का कहना है हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार पितृ पक्ष 15 दिन देरी से शुरू होंगे, क्योंकि इस बार पुरुषोत्तम या अधिक मास होने के कारण इस वर्ष श्राद्ध पक्ष की शुरुआत 29 सितंबर से हो रही है और 14 अक्तूबर को श्राद्ध महालय पर इसकी समाप्ति होगी। पितृ पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से प्रारंभ होगी और आश्विन मास की अमावस्या पर इसका समापन होगा। पूर्णिमा के श्राद्ध के साथ पितृपक्ष की शुरुआत होगी।
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16 दिनों तक तर्पण, पूजा अर्चना, श्राद्ध आदि करके नदी, तालाब आदि स्थलों पर जाकर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ तर्पण करके अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। हिंदू धर्म में 16 दिन तक श्राद्ध कर्म करने का बहुत महत्व हैं, क्योंकि यह कर्म पितरों की आत्मा की शांति के लिए किए जाते हैं।

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तीन पीढ़ियों के पूर्वजों का होता है श्राद्ध

First of all, Shraddha of Purnima, Pitru Paksha will be of 16 days.
पितृ पक्ष 2023 - फोटो : अमर उजाला

विश्वनाथ मंदिर न्यास के सदस्य पं. दीपक मावलीय ने बताया कि पितृपक्ष में प्रत्येक परिवार में मृत माता-पिता का श्राद्ध किया जाता है, परंतु गया श्राद्ध का विशेष महत्व है। वैसे तो इसका भी शास्त्रीय समय निश्चित है, लेकिन गया सर्वकालेषु पिण्डं दधाद्विपक्षणं’ कहकर सदैव पिंडदान करने की अनुमति दे दी गई है। एकैकस्य तिलैर्मिश्रांस्त्रींस्त्रीन् दद्याज्जलाज्जलीन्। यावज्जीवकृतं पापं तत्क्षणादेव नश्यति। अर्थात जो अपने पितरों को तिल-मिश्रित जल की तीन-तीन अंजलियां प्रदान करते हैं, उनके जन्म से तर्पण के दिन तक के पापों का नाश हो जाता है। पितृपक्ष में तीन पीढ़ियों तक के पितृ पक्ष के तथा तीन पीढ़ियों तक के माता पक्ष के पूर्वजों के लिए तर्पण किया जाता हैं। इन्हें ही पितर कहते हैं।

सर्वोपरि होता है पितृऋण

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पितृपक्ष - फोटो : पितृपक्ष

भारतीय धर्मग्रंथों के अनुसार मनुष्य पर तीन प्रकार के ऋण प्रमुख माने गए हैं- पितृ ऋण, देव ऋण तथा ऋषि ऋण। इनमें पितृ ऋण सर्वोपरि है। पितृ ऋण में पिता के अतिरिक्त माता तथा वे सब बुजुर्ग भी सम्मिलित हैं, जिन्होंने हमें अपना जीवन धारण करने तथा उसका विकास करने में सहयोग दिया। हिन्दू धर्म में माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ी पूजा माना गया है। जन्मदाता माता-पिता को मृत्यु-उपरांत लोग विस्मृत न कर दें, इसलिए उनका श्राद्ध करने का विशेष विधान बताया गया है। भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक के सोलह दिनों को पितृपक्ष कहते हैं। इसमें हम अपने पूर्वजों की सेवा करते हैं। पुराणों में भी इसका वर्णन मिलता है।

पितृपक्ष के दौरान बरतें सावधानी

  • न खरीदें लोहे का सामान

पितृ पक्ष के दौरान लोहे का सामान नहीं खरीदना चाहिए, इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा की कमी आएगी और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ेगी।

  • नया वस्त्र न लें

पितृपक्ष में नए वस्त्र कदापि न खरीदें, क्योंकि इस दौरान पितरों को नया वस्त्र दान किया जाता है, इससे पितर प्रसन्न होते हैं अगर आप पितृपक्ष में नया वस्त्र खरीदतें हैं तो इसका अशुभ प्रभाव पड़ता है और पितर नाराज हो जाते हैं।

  • मांस-मदिरा का न करें सेवन

पितृपक्ष के दौरान यदि आप मांस-मदिरा का सेवन करते हैं तो पितर नाराज होते हैं। जिसका सीधा असर आपके वंश पर पड़ता है। घर में कलह बढ़ेगी और कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • भूमि-भवन न खरीदें

पितृपक्ष में भूमि भवन कदापि न खरीदें, यदि आप पितृ पक्ष में भूमि भवन खरीदते हैं तो उसमें भूत प्रेत का वास होता है। पितृपक्ष में जो भी नई वस्तुएं आप खरीदते हैं उनसे आप सुख की प्राप्ति नहीं कर सकते हैं। इसलिए पितृ पक्ष में नई वस्तुए न खरीदें।

  • आश्विन मास में दूध का सेवन निषेध

आश्विन मास में कुछ बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए। इस महीने दूध का सेवन वर्जित है। जहां तक संभव हो करेला खाने से बचें। इस माह में शरीर को ढंक कर रखें। आश्विन माह में बैंगन, मूली, मसूर की दाल, चना आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए। प्याज-लहसुन या तामसिक भोजन की जगह सात्विक खाने पर जोर देना चाहिए। मांस या मदिरा पान से भी परहेज करें।

श्राद्ध की तिथियां

  • 29 सितंबर : पूर्णिमा श्राद्ध
  • 29 सितंबर प्रतिपदा का श्राद्ध
  • 30 सितंबर : द्वितीया श्राद्ध
  • 01 अक्तूबर : तृतीया श्राद्ध
  • 02 अक्तूबर : चतुर्थी श्राद्ध
  • 03 अक्तूबर : पंचमी श्राद्ध
  • 04 अक्तूबर : षष्ठी श्राद्ध
  • 05 अक्तूबर : सप्तमी श्राद्ध
  • 06 अक्तूबर : अष्टमी श्राद्ध
  • 07 अक्तूबर : नवमी श्राद्ध
  • 08 अक्तूबर : दशमी श्राद्ध
  • 09 अक्तूबर : एकादशी श्राद्ध
  • 11 अक्तूबर : द्वादशी श्राद्ध
  • 12 अक्तूबर : त्रयोदशी श्राद्ध
  • 13 अक्तूबर : चतुर्दशी श्राद्ध
  • 14 अक्तूबर : सर्व पितृ अमावस्या।
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