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Varanasi: रीवा घाट पर मनाई गई अंतरराष्ट्रीय काशी घाटवॉक विश्वविद्यालय की पांचवीं वर्षगांठ
Sun, 22 Jan 2023 11:26 PM IST
वाराणसी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 22 Jan 2023 11:26 PM IST
सार
अंतरराष्ट्रीय काशी घाटवॉक विश्वविद्यालय की पांचवी वर्षगांठ रविवार को रीवा घाट पर मनाई गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने कहा कि घाट संस्कृति से जुड़ना जटिलता से मुक्त होना है।
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घाटवॉक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय काशी घाटवॉक विश्वविद्यालय की पांचवी वर्षगांठ रविवार को रीवा घाट पर मनाई गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने कहा कि घाट संस्कृति से जुड़ना जटिलता से मुक्त होना है। उन्होंने काशी के घाटों को बचाने की दिशा में घाटवॉक का महत्व बताया।
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उन्होंने कहा कि काशी की महत्ता को समझने के लिए घाट से जुड़े रहना जरूरी है। काशी में हर कोई विशेष है। मुख्य अतिथि प्रो. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि काशी सत्ता की नहीं महत्ता की नगरी है। घाटवाक के संस्थापक प्रो. विजयनाथ मिश्र ने कहा कि घाटवाक काशी को जानने के साथ खुद को भी जानने का एक माध्यम है।
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बीएचयू के प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि काशी के घाट शांति के सहचर हैं। प्रो. वशिष्ठ द्विवेदी ने कहा कि काशी की फक्कड़ पहचान यहां के घाटों से है। इस मौके पर ताना बाना समूह के देवेंद्र दास व उनकी टीम ने घाटवॉक गीत और कबीर भजन की प्रस्तुति दी। इस दौरान उदय पाल, लखनलाल जौहरी, अनिल गुप्ता, नागेश्वर दुबे, प्रो. मंजुला चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।
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