वाराणसी: सैनिक को शहीद का दर्जा देने की मांग को लेकर परिजनों का दाह संस्कार से इनकार, पठानकोट के होटल में मिला था शव
वाराणसी के सरवनपुर गांव निवासी सेना में हवलदार श्यामजी यादव की तैनाती जम्मू कश्मीर में थी। बीते शनिवार को पठानकोट स्थित एक होटल में संदिग्ध हाल में उनका शव मिला था। बुधवार सुबह उनका शव गांव पहुंचा। परिजनों ने शहीद का दर्जा देने की मांग की है।
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पठानकोट से सेना के जवान श्यामजी यादव का शव तीन बाद बुधवार की सुबह वाराणसी के गांव पहुंचा। इस दौरान परिजनों और ग्रामीणों ने जवान को शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर अड़ गए और दाह संस्कार करने से इनकार कर दिया। रोहनिया विधायक सुरेंद्र नारायण सिंह के आश्वासन पर ग्रामीण माने और मणिकर्णिका घाट पर शव का अंतिम संस्कार किया। उधर, तिरंगे में लिपटा शव घर पहुंचते ही कोहराम मच गया।
लोहता थाना क्षेत्र के सरवनपुर निवासी श्यामजी यादव सेना में हवलदार के पद पर तैनात थे। बीते 29 जनवरी की शाम पठानकोट स्थित एक होटल में श्यामजी की संदिग्ध हाल में मौत हो गई थी। सुबह पठानकोट से सेना के दो जवान और भाई सहित रिश्तेदार शव लेकर घर पहुंचे।
देखते ही देखते घर के पास काफी संख्या में ग्रामीणों की भीड इकट्ठा हो गई। जब कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा तो नाराज परिवार के लोगों ने शव का दाहसंस्कार करने से इनकार कर दिया। इस बीच लोहता थानाध्यक्ष की सूचना पर उपजिलाधिकारी राजातालाब उदयभान सिंह पहुंचे तो परिजनों ने मांग रखी कि जवान को शहीद का दर्जा दिया जाए और गांव की सड़क का नाम श्यामजी यादव के नाम पर रखा जाए।
शासन से मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी मिले। इस मांग को लेकर काफी देर तक बहस होती रही। सूचना पर रोहनिया विधायक सुरेंद्र नारायण सिंह भी पहुंचे।
उन्होंने जवान श्यामजी की बेटी नेहा से जिलाधिकारी की मोबाइल पर वार्ता कराई और जिलाधिकारी ने सभी मांगों को लिखित रूप से उपजिलाधिकारी को देने को कहा। इस पर विधायक ने परिजनों और ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि गांव के बाहर मुख्य रास्ते पर शहीद द्वार श्यामजी यादव के नाम से बनाया जाएगा। गांव के सड़क का नाम शहीद श्यामजी यादव मार्ग रखा जाएगा।