Varanasi Crime: तीन महीने से चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर, सात जिले की 21 युवतियों समेत 32 गिरफ्तार
Varanasi News: वाराणसी कमिश्नरेट की पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी का खुलासा करते हुए 32 लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रेसवार्ता के दौरान गिरफ्तार युवतियों ने जमकर हंगामा किया।
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महमूरगंज स्थित शाही टावर में संचालित फर्जी कॉल सेंटर एनकेडी एसोसिएट्स में यूपी और बिहार के 7 जिलों के 21 युवतियों समेत 32 लोग काम करते थे। शुक्रवार को पुलिस ने आरोपियों को मीडिया के सामने पेश किया। डीसीपी क्राइम नीतू ने बताया कि इन लोगों ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर लोगों से करीब 1.25 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की है। उनके कब्जे से 55 मोबाइल फोन, तीन कंप्यूटर, तीन फर्जी आधार कार्ड और एक ड्राइविंग लाइसेंस बरामद किए गए हैं।
डीसीपी आरोपियों के बारे में जानकारी दे ही रहीं थी कि इसी बीच आरोपी युवतियों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। पुलिस पर आरोप लगाया कि उन्हें झूठा फंसा रहे हैं। पुलिस ने युवतियों को समझा बुझा कर शांत कराया। इसके बाद आगे की जानकारी दी। बाद में आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया और यहां से 21 युवतियों को निजी बॉन्ड पर जमानत दे दी गई।युवतियों ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें मीडिया के सामने पेश करने से पहले बताया ही नहीं गया।
पुलिस ने धोखे से गिरफ्तारी की है। बृहस्पतिवार की रात में सादे कागज पर हस्ताक्षर कराए गए और कहा गया कि सुबह छोड़ दिया जाएगा। फिर उन्हें मीडिया के सामने क्यों पेश किया गया है। यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने छापा मारने के दौरान पांच अन्य लोगों को छोड़ दिया और 21 में से केवल 15 युवतियों को ही मीडिया के सामने क्यों पेश किया गया। युवतियों ने मीडिया को बताया कि वे 8 से 10 हजार रुपये मासिक वेतन पर काम कर रही थीं।
कॉल करने के लिए मोबाइल नंबरों की सूची संचालक की ओर से उपलब्ध कराई जाती थी। उनके अनुसार, उनके खातों में केवल वेतन आता था और ठगी की रकम सीधे उनके खातों में नहीं आती थी। उन्हें बताया गया था कि संस्था सेबी में पंजीकृत है। बताया कि एचआर हेड अर्चना सिंह ने उनकी नियुक्ति कराई थी, लेकिन ऑफर लेटर मांगने पर भी नहीं दिया गया। युवतियों को शांत कराने के बाद डीसीपी क्राइम नीतू ने दोबारा प्रेसवार्ता शुरू की।
डीसीपी क्राइम ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मऊ, मिर्जापुर और बिहार के रोहतास जिले के निवासी शामिल हैं। एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने बताया कि गिरोह सबसे पहले शेयर बाजार, व्यापार और निवेश में रुचि रखने वाले लोगों के डेटा जुटाता था। इसके बाद कॉल सेंटर में कार्यरत युवक-युवतियां खुद को सेबी में पंजीकृत संस्था एनकेडी एसोसिएट्स का प्रतिनिधि बताकर संपर्क करते थे।
लोगों का भरोसा जीतने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता था। शेयर बाजार में मोटा मुनाफा दिलाने और निवेश संबंधी सलाह देने के नाम पर सदस्यता शुल्क तथा खाता प्रबंधन शुल्क विभिन्न बैंकों के क्यूआर कोड और यूपीआई आईडी के माध्यम से जमा कराया जाता था। इस संबंध में भेलूपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
उन्होंने बताया कि गिरोह के सरगना चंदौली के सकलडीहा स्थित तुलसी आश्रम निवासी अंबर सिंह मौर्य की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। अन्य फरार आरोपियों की तलाश में भी टीमें गठित की गई हैं। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के तार दिल्ली या गुरुग्राम से भी जुड़े हो सकते हैं। फर्जी कॉल सेंटर पिछले तीन महीने से संचालित हो रहा था। भवन की दूसरी और तीसरी मंजिल पर इसका संचालन किया जा रहा था।