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खुलासाः EX CM अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट में साजिशन लगाई गई थी आग
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 20 Mar 2017 01:13 AM IST
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स्टॉक यार्ड में होली के दिन साजिश के तहत आग लगाई थी
- फोटो : अमर उजाला
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पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर के स्टॉक यार्ड में होली के दिन साजिश के तहत आग लगाई थी। आशंका है कि स्टॉक यार्ड में आग का यह पूरा खेल कॉरिडोर में हुए भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए किया गया है। नई सरकार ने अगर जांच कराई तो कई लोग इसमें नपेंगे।
कॉरिडोर के सुरक्षा गॉर्ड विष्णुकांत मिश्रा होली के दिन स्टॉक यार्ड की निगरानी में था। विष्णुकांत ने बताया कि यार्ड से लपटें उठने के बाद जिन लोगों को वह भागते हुए देखा, वह उन्हें जानता तो नहीं है पहले वे अक्सर यहां आते रहे हैं। घटना के बाद से वे नहीं दिख रहे हैं। देखने पर वह उन्हें पहचान लेगा।
इतने अहम तथ्य के सामने आने के बावजूद प्रशासन और पुलिस से लेकर कार्यदायी संस्था तक ने चुप्पी साध ली है। गॉर्ड से पूछताछ तक नहीं की गई है। यार्ड में लगी आग में दो जेसीबी, एक रोजर, एक टैंकर समेत लाखों रुपये के सामान जलकर नष्ट हो गए थे।
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काम कराने वाली एजेंसी एपको की ओर से मुकेश कुमार श्रीवास्तव ने कैंट थाने में इसका मुकदमा दर्ज कराया था। अब ड्रीम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर आगे बढ़ने की उम्मीद कम है।
केंद्र की मोदी सरकार के गंगा निर्मलीकरण अभियान का जवाब देने के लिए वरुणा के प्राकृत स्वरूप से छेड़छाड़ कर शुरू किए गए इस कार्य में धांधली, मनमानी और सरकारी धन के दुरुपयोग की लंबी फेहरिश्त है। 201 करोड़ रुपये के वरुणा कॉरिडोर में डीएम बंगले से लेकर सराय मोहाना तक 10.3 किमी नदी का चैनलाइजेशन किया जाना है।
अब तक इस पर करीब 80 करोड़ रुपये फूंके जा चुके हैं लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं दिख रहा है। योजना की भारी-भरकम राशि पर अफसर और नेता नजर ही नहीं गड़ाए रहे, सबने अपना-अपना हिस्सा भी बांट लिया। पर्यटन विकास की इस पेंचीदी योजना पर काम एक बार फिर शुरू हो गया है।
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कॉरिडोर के सुरक्षा गॉर्ड विष्णुकांत मिश्रा होली के दिन स्टॉक यार्ड की निगरानी में था। विष्णुकांत ने बताया कि यार्ड से लपटें उठने के बाद जिन लोगों को वह भागते हुए देखा, वह उन्हें जानता तो नहीं है पहले वे अक्सर यहां आते रहे हैं। घटना के बाद से वे नहीं दिख रहे हैं। देखने पर वह उन्हें पहचान लेगा।
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इतने अहम तथ्य के सामने आने के बावजूद प्रशासन और पुलिस से लेकर कार्यदायी संस्था तक ने चुप्पी साध ली है। गॉर्ड से पूछताछ तक नहीं की गई है। यार्ड में लगी आग में दो जेसीबी, एक रोजर, एक टैंकर समेत लाखों रुपये के सामान जलकर नष्ट हो गए थे।
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काम कराने वाली एजेंसी एपको की ओर से मुकेश कुमार श्रीवास्तव ने कैंट थाने में इसका मुकदमा दर्ज कराया था। अब ड्रीम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर आगे बढ़ने की उम्मीद कम है।
केंद्र की मोदी सरकार के गंगा निर्मलीकरण अभियान का जवाब देने के लिए वरुणा के प्राकृत स्वरूप से छेड़छाड़ कर शुरू किए गए इस कार्य में धांधली, मनमानी और सरकारी धन के दुरुपयोग की लंबी फेहरिश्त है। 201 करोड़ रुपये के वरुणा कॉरिडोर में डीएम बंगले से लेकर सराय मोहाना तक 10.3 किमी नदी का चैनलाइजेशन किया जाना है।
अब तक इस पर करीब 80 करोड़ रुपये फूंके जा चुके हैं लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं दिख रहा है। योजना की भारी-भरकम राशि पर अफसर और नेता नजर ही नहीं गड़ाए रहे, सबने अपना-अपना हिस्सा भी बांट लिया। पर्यटन विकास की इस पेंचीदी योजना पर काम एक बार फिर शुरू हो गया है।
लोगों को उम्मीद भाजपा सरकार कराएगी जांच
वरुणा कॉरिडोर
- फोटो : self
सुबह से लेकर शाम तक कॉरीडोर में पर्यटक तो छोड़िए, आसपास के लोग भी नहीं पहुंचते हैं। वरुणा किनारे नगर निगम ने लोगों के बैठने के लिए कुछ बेंच लगाए हैं, जिन पर नशेड़ियों का जमावड़ा रहता है। यही नहीं, पहले जनवरी और दूसरी बार होली में यहां आग लगने की घटनाएं भी पूरी योजना में भ्रष्टाचार और लापरवाही की ओर इशारा करती हैं।
भाजपा की सरकार बनने के बाद लोगों को उम्मीद है कि कॉरिडोर में हुए भ्रष्टाचार की जांच तो कराई ही जाएगी, डूब क्षेत्र में किए गए कब्जे हटवाकर वरुणा को अपने मूल स्वरूप में भी लाया जाएगा। लोगों की उम्मीद इसलिए भी है क्योंकि मनोनीत उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य इस प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किए जाने की बात उठाते हुए कह चुके हैं कि इसकी जांच कराई जाएगी और भ्रष्टाचारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
नवनिर्वाचित विधायक भी इस पर सवाल उठाते रहे हैं।
वीडीए भी कम कसूरवार नहीं
पूरी योजना आनन-फानन में जैसे-तैसे आगे बढ़ाई गई। कॉरिडोर बनाने से पहले दोनों किनारों से अतिक्रमण हटाया जाना था। इसके लिए मुख्य सचिव तक ने निर्देश दिए लेकिन जिम्मेदारों ने बिना ग्रीन बेल्ट को खाली कराए मॉडल वर्क का काम शुरू करा दिया।
अतिक्रमण हटाने का मसला अब तक ठंडे बस्ते में है। वरुणा के डूब क्षेत्र में कब्जा कर बनाए गए भवनों और होटलों को बचाने के लिए वीडीए और सिंचाई विभाग ने करीब 900 लोगों को नोटिस तो दिए लेकिन एक भी निर्माण को गिराया नहीं गया।
भाजपा की सरकार बनने के बाद लोगों को उम्मीद है कि कॉरिडोर में हुए भ्रष्टाचार की जांच तो कराई ही जाएगी, डूब क्षेत्र में किए गए कब्जे हटवाकर वरुणा को अपने मूल स्वरूप में भी लाया जाएगा। लोगों की उम्मीद इसलिए भी है क्योंकि मनोनीत उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य इस प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किए जाने की बात उठाते हुए कह चुके हैं कि इसकी जांच कराई जाएगी और भ्रष्टाचारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
नवनिर्वाचित विधायक भी इस पर सवाल उठाते रहे हैं।
वीडीए भी कम कसूरवार नहीं
पूरी योजना आनन-फानन में जैसे-तैसे आगे बढ़ाई गई। कॉरिडोर बनाने से पहले दोनों किनारों से अतिक्रमण हटाया जाना था। इसके लिए मुख्य सचिव तक ने निर्देश दिए लेकिन जिम्मेदारों ने बिना ग्रीन बेल्ट को खाली कराए मॉडल वर्क का काम शुरू करा दिया।
अतिक्रमण हटाने का मसला अब तक ठंडे बस्ते में है। वरुणा के डूब क्षेत्र में कब्जा कर बनाए गए भवनों और होटलों को बचाने के लिए वीडीए और सिंचाई विभाग ने करीब 900 लोगों को नोटिस तो दिए लेकिन एक भी निर्माण को गिराया नहीं गया।
...तो दागी चेहरे आ जाएंगे सामने
जानकारों का दावा है कि शासन इस मामले को गंभीरता से लेकर कॉरिडोर की शुरुआत से की गई गड़बड़ियों और मनमानियों की जांच कराए तो कोई भी ऐसा सरकारी महकमा बेदाग साबित नहीं हो पाएगा।
आग लगने की घटनाओं की ही जांच सही तरीके से हो जाए तो कदम-कदम पर की गई सुनियोजित साजिश का पर्दाफाश होने के साथ ही बड़ा भ्रष्टाचार उजागर होगा। जिस तरह से अधिकारियों ने मानकों को धता बताते हुए काम कराया, बड़े अधिकारियों और नेताओं की शह के बिना यह संभव ही नहीं हो सकता था।
सुरेंद्र पटेल पर थी निगरानी की जिम्मेदारी
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव की अधिसूचना जारी होने से ठीक पहले 22 दिसंबर, 2016 को आनन-फानन में इसके मॉडल वर्क का लोकार्पण किया था। मुख्यमंत्री का यह ड्रीम प्रोजेक्ट था। कई बार उनका यहां आने का कार्यक्रम बना पर वह नहीं आए।
तत्कालीन मुख्य सचिव आलोक रंजन और दीपक सिंघल ने इसका मुआयना किया था। यहां काम शुरू होने से लेकर मॉडल वर्क के उद्घाटन तक की निगरानी पूर्व सिंचाई राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल ने निभाई थी। सिंचाई विभाग ही इस काम को करा रहा है।