{"_id":"58f919ea4f1c1bec4147063c","slug":"enter-city-entrance-nothing-special","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर में करें ‘प्रवेश’, कुछ नहीं विशेष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर में करें ‘प्रवेश’, कुछ नहीं विशेष
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 21 Apr 2017 01:58 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वार्ड नंबर चार-राजघाट को शहर का प्रवेश द्वार कहा जाता है। इसी वार्ड में मालवीय पुल है, जो चंदौली को जोड़ता है तो काशी रेलवे स्टेशन भी। गंगा किनारे बसे इस इलाके में विकास की बात तो दूर, अब तक लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। वार्ड में प्रवेश करते ही सामना गंदगी, खस्ताहाल सड़कों, बजबजाती नालियों से होता है। वार्ड के पक्के महाल में तो कुछ इलाके ऐसे हैं, जहां अब तक लोग सीवेज की पाइप के इंतजार में हैं। घरों का पानी सड़कों पर बहता है। इलाके के तमाम मुहल्ले ऐसे हैं, जहां पेयजल व्यवस्था ठीक नहीं है। यहां लोग कुएं के सहारे हैं। दशकों से समस्या झेल रहे लोगों ने पांच साल पहले जब अपना पार्षद चुना था तो उम्मीद थी कि स्थितियां सुधरेंगी लेकिन फिर से निराश दिखे। ‘वार्ड परिक्रमा’ में आज बता रहे हैं राजघाट की हकीकत, यहीं के लोगों की जुबानी।
सड़कों पर धूल, गलियों में सीवर, कुएं से प्यास बुझाते लोग। यहीं पहचान है पक्के महाल यानी पुरानी काशी के आखिरी छोर राजघाट की। नियमित सफाई, पानी की आपूर्ति, सीवेज की समस्या से लोग दो-चार हो रहे हैं। यह तब है, जब शहर में पेयजल और सीवेज योजना पर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। भदऊं क्षेत्र के किलाकोहना इलाके में सीवेज और पेयजल पाइप लाइन बिछाई ही नहीं गई है। वजह, इसके लिए ठोस प्रयास नहीं किया गया। अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ लिए कि आपसी विवाद के चलते काम आगे नहीं बढ़ा। वहीं लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत और गुहार लगाने के बाद भी काम नहीं कराया गया। क्षेत्रीय पार्षद भी जनता के बीच कम आए। ऐसे में समस्या किसे बताएं। सड़कें खोदकर छोड़ दी गईं हैं। बारिश में सीवर उफनाकर घरों में घुस जाता है।
विज्ञापन
सड़कों पर धूल, गलियों में सीवर, कुएं से प्यास बुझाते लोग। यहीं पहचान है पक्के महाल यानी पुरानी काशी के आखिरी छोर राजघाट की। नियमित सफाई, पानी की आपूर्ति, सीवेज की समस्या से लोग दो-चार हो रहे हैं। यह तब है, जब शहर में पेयजल और सीवेज योजना पर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। भदऊं क्षेत्र के किलाकोहना इलाके में सीवेज और पेयजल पाइप लाइन बिछाई ही नहीं गई है। वजह, इसके लिए ठोस प्रयास नहीं किया गया। अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ लिए कि आपसी विवाद के चलते काम आगे नहीं बढ़ा। वहीं लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत और गुहार लगाने के बाद भी काम नहीं कराया गया। क्षेत्रीय पार्षद भी जनता के बीच कम आए। ऐसे में समस्या किसे बताएं। सड़कें खोदकर छोड़ दी गईं हैं। बारिश में सीवर उफनाकर घरों में घुस जाता है।
विज्ञापन