फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Employees protest against privatization of electricity corporation Varanasi

Varanasi News: बिजली निगम के निजीकरण के विरोध में उतरे कर्मचारी, 10 दिसंबर को बुलाई गई जन पंचायत

Tue, 26 Nov 2024 10:21 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 26 Nov 2024 10:21 PM IST
सार

बिजली निगम के कर्मचारी निजीकरण के विरोध में उतर गए हैं। इसके विरोध में संघर्ष समिति जनसंपर्क अभियान चलाएगी। उधर, 10 दिसंबर को आगरा में जन पंचायत भी बुलाई गई है।  

विज्ञापन
Employees protest against privatization of electricity corporation Varanasi
यूपी में बिजली व्यवस्था। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

उत्तर प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन द्वारा वाराणसी और आगरा विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। साथ ही निजीकरण के बाद आम जनता को होने वाली कठिनाईयों से अवगत कराने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। पहले चरण में चार दिसंबर को वाराणसी और 10 दिसंबर को आगरा में जन पंचायत भी बुलाई गई है। इसमें बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहेंगे।

विज्ञापन


समिति पदाधिकारियों ने कही ये बात
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से लखनऊ में हुई बैठक में वाराणसी से भी पदाधिकारी शामिल हुए थे। यहां से समिति के पदाधिकारी डॉ. आरबी सिंह, आरके वाही, ओपी सिंह, इंजीनियर नरेंद्र वर्मा, अंकुर पांडेय ने बताया कि पॉवर कॉर्पोरेशन द्वारा घोषित पीपीपी मॉडल के आधार पर उड़ीसा की तर्ज पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निजीकरण का जो निर्णय लिया गया है, वह न ही कर्मचारियों के हित में है और न ही आम उपभोक्ताओं के हित में है। 

विज्ञापन

पदाधिकारियों ने बताया कि अप्रैल 2018 एवं अक्टूबर 2020 में तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा और मंत्री मण्डल उपसमिति के अध्यक्ष वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के साथ हुए समझौते में यह कहा गया था कि उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही सुधार के लिए कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्रवाई की जाएगी। निजीकरण की हुई यह कार्रवाई समझौते का खुला उल्लंघन है। मुख्यमंत्री को इस फैसले को निरस्त करना चाहिए। 

पदाधिकारियों ने बताया कि पॉवर कॉर्पोरेशन द्वारा जारी किये गए घाटे के आंकड़े पूरी तरह भ्रामक हैं और इस तरह से प्रस्तुत किया जा रहा है जैसे घाटे का मुख्य कारण कर्मचारी और अभियंता हैं। पॉवर कॉर्पोरेशन में चालू वित्तीय वर्ष में सरकार के द्वारा 46130 करोड़ रूपये की सहायता देने की बात कही गई है। पॉवर कॉर्पोरेशन ने यह तथ्य छिपाया गया है कि 46130 करोड़ रूपये में सब्सिडी की धनराशि ही रूपये 20 हजार करोड़ है, जो विद्युत अधिनियम 2003 के अनुसार सरकार को देनी ही होती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed