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Varanasi News: बीएचयू में 11 साल में 80 ट्रांसप्लांट, पांच मई 1999 को प्रो. पीबी सिंह की टीम ने किया था ये काम
Fri, 17 May 2024 09:08 AM IST
अमन विश्वकर्मा
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Fri, 17 May 2024 09:08 AM IST
सार
Varanasi News: वाराणसी के आईएमएस बीएचयू में 14 साल बाद किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है। यूरोलॉजी ऑपरेशन थियेटर में करीब छह घंटे तक चली प्रक्रिया में एक पत्नी ने अपने पति को किडनी डोनेट कर जान बचाई। ट्रांसप्लांट की इस प्रक्रिया के बाद पति और पत्नी दोनों स्वस्थ हैं। डॉक्टरों की टीम उनके सेहत की निगरानी कर रही है। इसके पहले 2010 में अंतिम बार यहां किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था।
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प्रो. पीबी सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आईएमएस बीएचयू में 11 साल में 80 ट्रांसप्लांट हुए इसके बाद 14 साल तक एक भी केस नहीं हो सके। बीएचयू में यह प्रक्रिया ठप हो गई। इस दौरान करीब 100 से अधिक मरीजों को डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट की सलाह तो दी लेकिन यहां व्यवस्था न होने की वजह से मरीजों को बाहर जाना पड़ा।
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बीएचयू यूरोलॉजी विभाग में 5 मई 1999 को पहला किडनी ट्रांसप्लांट प्रो. पीबी सिंह ने किया था। उस समय विभाग में आईसीयू की भी सुविधा नहीं थी। मरीज को सात दिन तक डॉक्टरों ने ऑपरेशन थियेटर में ही रखा था। प्रो. पीबी सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि मई 1999 से अप्रैल 2010 तक यानी 11 साल तक कुल 80 ट्रांसप्लांट किए गए।
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इसमें करीब एक से डेढ़ लाख रुपये ही खर्च आता था। इसके बाद से यहां ट्रांसप्लांट नहीं कराया जा सका। ऐसा क्यों हुआ, इस बारे में प्रो. पीबी सिंह का कहना है कि जब पहला ट्रांसप्लांट हुआ था, तब की तुलना में अब तो सुविधाएं भी बढ़ गई हैं, लेकिन ट्रांसप्लांट क्यों नहीं हुआ, यह समझ से परे हैं।
कार्यभार ग्रहण करने के बाद से पता चला कि किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा बीएचयू में नहीं है। इसके बाद से ही इस दिशा में प्रयास चल रहा था। मरीजों को ट्रांसप्लांट की सुविधाएं यहां मिलेगी। - प्रो. एसएन संखवार, निदेशक, आईएमएस
पति की जान बचाने की जिद के आगे पत्नी भूल गई दुखदर्द
रोहनिया के मड़ाव निवासी 39 वर्षीय पत्नी को जैसे ही पता चला कि उसके पति की दोनों किडनी खराब हो गई है। उसके आगे के जीवन के लिए ट्रांसप्लांट ही एक मात्र विकल्प है। इसके बाद पत्नी दुखी हो गई। डॉक्टरों ने परिजनों को ट्रांसप्लांट के लिए डोनर की व्यवस्था करने को कहा।
युवक के घर वालों ने अपने घर-परिवार के साथ ही रिश्तेदारों के स्तर पर भी पहल की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी बीच पत्नी ने घर वालों से कहा कि वह अपनी किडनी पति को दान कर देगी। पति की जान बचाने की जिद के वह अपने सभी दुखदर्द भूल गई। पिछले चार महीने से उसके सेहत की जांच के साथ ही काउंसिलिंग भी की गई।