UP: गंगा में बिरयानी के अवशेष फेंकने के मामले में आठ आरोपियों को सशर्त जमानत, 14 पर दर्ज थी FIR; मांगी माफी
Varanasi News: रमजान के दौरान नाव पर इफ्तार कर बिरयानी के अवशेष गंगा में फेंकने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आठ आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी। आरोपियों ने अदालत में एफिडेविट देकर माफी मांगी थी। वाराणसी में दर्ज इस मामले में धार्मिक भावनाएं आहत करने, गंगा प्रदूषित करने और वैमनस्य फैलाने के आरोप लगाए गए थे।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रमजान के दौरान नाव पर रोजा इफ्तार करने और बिरयानी खाने के बाद उसके अवशेष गंगा में फेंकने के मामले में जेल में बंद आठ आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला तथा न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठों ने अलग-अलग जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया।
मामला वाराणसी का है, जहां भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष रजत जायसवाल की ओर से मोहम्मद आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, मोहम्मद तौसीफ, मोहम्मद फैजान समेत 14 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि नाव पर रोजा इफ्तार के दौरान बिरयानी खाने के बाद उसके अवशेष गंगा में फेंके गए, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। आरोपियों पर समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने, सार्वजनिक उपद्रव करने, जल स्रोत को दूषित करने और पूजास्थल का अपमान करने जैसी धाराएं लगाई गई थीं।
अदालत में मांगी माफी
घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 17 मार्च 2026 को आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद सभी आरोपियों ने वाराणसी की ट्रायल कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की, लेकिन अदालत ने एक अप्रैल को उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद आरोपियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया।
सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से अदालत में एफिडेविट दाखिल कर अपने कृत्य पर माफी मांगी गई। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने राहत देते हुए आठ आरोपियों की जमानत मंजूर कर ली। न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला की पीठ ने मोहम्मद आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, निहाल अफरीदी, मोहम्मद तौसीफ और मोहम्मद अनस को जमानत दी। वहीं न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ ने मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद रजा और मोहम्मद फैजान की जमानत मंजूर की। मामले में अभी छह आरोपियों को जमानत नहीं मिल सकी है।