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पूर्वांचल को ध्यान में रखकर तैयार होंगे नये पाठ्यक्रम
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पूर्वांचल को ध्यान में रखकर तैयार होंगे नए पाठ्यक्रम
वाराणसी। पूर्वांचल को ध्यान में रखते हुए जरी जरदोजी, काष्ठ उद्योग, लकड़ी के खिलौने, संगीत, कर्मकांड, मोबाइल, कंप्यूटर को भी शिक्षा से जोड़ा जाएगा। इसके लिए नया पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। कौशल विकास केंद्रों को विद्यालयों एवं महाविद्यालयों से जोड़ा जाएगा। उच्च शिक्षा को तकनीकी से जोड़कर रोजगार परक बनाया जा रहा है। पूर्वांचल में शिक्षा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उक्त बातें डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने कहीं। वह रविवार को धीरेंद्र महिला महाविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
उच्च शिक्षा के विकास में चुनौतियां एवं संभावनाएं विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अब तक तकनीकी रोजगार परक शिक्षा के अभाव में डिग्री प्राप्त करने के बाद भी रोजगार से वंचित रह जाते थे। शिक्षा के क्षेत्र में यह सबसे बड़ी चुनौती है। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए अब पूर्वांचल निरंतर आगे बढ़ रहा है। हमारी शिक्षा नीति का ही परिणाम है कि दिल्ली और सीबीएसई बोर्ड भी प्रयागराज बोर्ड का अनुसरण कर रहे हैं।
महाविद्यालय के प्रबंधक विधायक रवींद्र जायसवाल ने कहा कि शिक्षा को रोजगारपरक बनाने की आवश्यकता है। पाठ्यक्रमों में कौशल विकास को जोड़ने से रोजगार की संभावनाएं बढे़ंगी। विशिष्ट अतिथि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ला ने कहा कि शिक्षा में नैतिकता का पतन हो रहा है। काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने कहा कि आज की सबसे बड़ी चुनौती गुणवत्ता और संसाधनों की है। इस दौरान पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कु लपति प्रो. जीसीआर जायसवाल, अंजू जायसवाल, प्राचार्य डॉ. नलिनी मिश्रा, डॉ. हेमेंद्र कुमार सिंह, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. अनिकेश, डॉ. अनामिका शर्मा, डॉ. प्रतीक्षा सिंह, डॉ. अर्चना श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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वाराणसी। पूर्वांचल को ध्यान में रखते हुए जरी जरदोजी, काष्ठ उद्योग, लकड़ी के खिलौने, संगीत, कर्मकांड, मोबाइल, कंप्यूटर को भी शिक्षा से जोड़ा जाएगा। इसके लिए नया पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। कौशल विकास केंद्रों को विद्यालयों एवं महाविद्यालयों से जोड़ा जाएगा। उच्च शिक्षा को तकनीकी से जोड़कर रोजगार परक बनाया जा रहा है। पूर्वांचल में शिक्षा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उक्त बातें डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने कहीं। वह रविवार को धीरेंद्र महिला महाविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
उच्च शिक्षा के विकास में चुनौतियां एवं संभावनाएं विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अब तक तकनीकी रोजगार परक शिक्षा के अभाव में डिग्री प्राप्त करने के बाद भी रोजगार से वंचित रह जाते थे। शिक्षा के क्षेत्र में यह सबसे बड़ी चुनौती है। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए अब पूर्वांचल निरंतर आगे बढ़ रहा है। हमारी शिक्षा नीति का ही परिणाम है कि दिल्ली और सीबीएसई बोर्ड भी प्रयागराज बोर्ड का अनुसरण कर रहे हैं।
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महाविद्यालय के प्रबंधक विधायक रवींद्र जायसवाल ने कहा कि शिक्षा को रोजगारपरक बनाने की आवश्यकता है। पाठ्यक्रमों में कौशल विकास को जोड़ने से रोजगार की संभावनाएं बढे़ंगी। विशिष्ट अतिथि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ला ने कहा कि शिक्षा में नैतिकता का पतन हो रहा है। काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने कहा कि आज की सबसे बड़ी चुनौती गुणवत्ता और संसाधनों की है। इस दौरान पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कु लपति प्रो. जीसीआर जायसवाल, अंजू जायसवाल, प्राचार्य डॉ. नलिनी मिश्रा, डॉ. हेमेंद्र कुमार सिंह, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. अनिकेश, डॉ. अनामिका शर्मा, डॉ. प्रतीक्षा सिंह, डॉ. अर्चना श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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