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भाजपा के दिग्गज नेता बोले, संस्कृत को अनिवार्य विषय के तौर पर लागू करें सीएम योगी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 04 Apr 2017 03:27 PM IST
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बीएचयू संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में पुस्तक का विमोचन
- फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में कालीदास संस्थानम के अध्यक्ष प्रो. रेवा प्रसाद द्विवेदी व प्रो. सदाशिव द्विवेदी द्वारा संपादित पुस्तक ‘अलंकारशास्त्रागम’ का विमोचन सोमवार को कानपुर से सांसद पद्मविभूषण डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने किया।
बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि संस्कृत ब्रह्मांड की जननी है। इसे बढ़ावा दिए बिना विश्व के ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संस्कृत की शिक्षा अनिवार्य करने की पहल करनी चाहिए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री जोशी ने कहा कि संविधान निर्माण के वक्त जब ये विचार हो रहा था कि भारत की राष्ट्र भाषा कौन हो, उस वक्त डॉ. अंबेडकर समेत दस लोगों ने संस्कृत का प्रस्ताव रखा था। अगर पं. जवाहर लाल नेहरू का हस्तक्षेप न होता तो संस्कृत राष्ट्रभाषा होती।
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उन्होंने वकालत की कि संस्कृत को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिलना चाहिए। मेडिकल इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम में जब तक संस्कृत को शामिल नहीं किया जाएगा, संस्कृत का ज्ञान प्रतिष्ठित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि संस्कृत के अध्ययन अध्यापन की पद्धति में बदलाव की जरूरत है।
इसे आधुनिक विज्ञान और कंप्यूटर से जोड़ा जाना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने की। इस अवसर पर पूर्व सांसद कमल मुरारका ने संस्कृत के विद्वानों को सम्मानित किया।
इस अवसर पर संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यदुनाथ दुबे, प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी, प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी, प्रो. वागीश शास्त्री, डॉ. विश्वनाथ पांडेय आदि मौजूद थे।
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बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि संस्कृत ब्रह्मांड की जननी है। इसे बढ़ावा दिए बिना विश्व के ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संस्कृत की शिक्षा अनिवार्य करने की पहल करनी चाहिए।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री जोशी ने कहा कि संविधान निर्माण के वक्त जब ये विचार हो रहा था कि भारत की राष्ट्र भाषा कौन हो, उस वक्त डॉ. अंबेडकर समेत दस लोगों ने संस्कृत का प्रस्ताव रखा था। अगर पं. जवाहर लाल नेहरू का हस्तक्षेप न होता तो संस्कृत राष्ट्रभाषा होती।
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उन्होंने वकालत की कि संस्कृत को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिलना चाहिए। मेडिकल इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम में जब तक संस्कृत को शामिल नहीं किया जाएगा, संस्कृत का ज्ञान प्रतिष्ठित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि संस्कृत के अध्ययन अध्यापन की पद्धति में बदलाव की जरूरत है।
इसे आधुनिक विज्ञान और कंप्यूटर से जोड़ा जाना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने की। इस अवसर पर पूर्व सांसद कमल मुरारका ने संस्कृत के विद्वानों को सम्मानित किया।
इस अवसर पर संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यदुनाथ दुबे, प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी, प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी, प्रो. वागीश शास्त्री, डॉ. विश्वनाथ पांडेय आदि मौजूद थे।