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देश-विदेश से पहुंच रहे सैलानी
वाराण्ासी, ब्यूराो
Updated Sun, 07 Dec 2014 01:50 AM IST
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सारनाथ। धम्म चक्र प्रवर्तन मुद्रा में भगवान बुद्ध की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा के दर्शन के लिए शनिवार को सुबह से ही देशी-विदेशी सैलानियों का तांता लगा रहा।
दो दिवसीय लोकार्पण समारोह के अंतिम दिन शनिवार को भूमि दान कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस दौरान संघ पूजा भी हुई। भगवान बुद्ध को चीवर, अगरबत्ती, धूप-दीप आदि अर्पित किया गया।
तत्पश्चात बौद्ध भिक्षुओं का संघ दान हुआ। इस अवसर पर वियतनामी प्रतिनिधिमंडल के 500 सदस्यों के साथ ही सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
शनिवार को आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं जिन्होंने वियतनानी परंपरानुसार भगवान बुद्ध का पूजन-अर्चन किया।
वियतनाम के धर्म संघ प्रमुख गुरु प्रीजोय, भिक्षु बेमेन सहित कुछ भिक्षु हाथी पर सवार होकर पूरे मंदिर प्रांगण का चक्कर चक्कर लगा रहे थे। बौद्ध श्रद्धालुओं ने मंदिर के चक्कर भी लगाए।
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इसके बाद विधिवत पूजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने अपने विचार रखे। वियतनाम के प्रतिनिधियों को स्मृति चिह्न प्रदान किया गया।
वहीं शनिवार की रात में दीपदान का आयोजन किया गया। इस दौरान पूरे मंदिर परिसर को भी दीयों से सजाया गया था।
इनसेट
एक डॉलर से शुरू हुआ था काम
27 बिस्वा में फैले शिवली वियतनामी बौद्ध मंदिर का निर्माण 2009 में शुरू हुआ था। इसके साथ ही चुनार के प्रसिद्ध मूर्तिकार देव नारायण पुजारी के नेतृत्व में चुनाव और आगरा के लगभग 30 कारीगरों ने इस प्रतिमा को भी बनाने का काम शुरू किया था।
लगभग 1.25 करोड़ रुपये और कारीगरों की दिन-रात की मेहनत से यह मूर्ति बनकर तैयार हुई। पूरे मंदिर परिसर में धम्मा हाल, विश्राम के लिए 54 कमरे, हाल व कई और प्रमुख निर्माण है।
इसे भिक्षु दाम लाम तान ने बनवाया जो वर्ष 1997 में भारत आए थे। लगभग दस भारत में रहने के दौरान ही उन्होंने दिल्ली के एक शिक्षण संस्थान से पीएचडी की उपाधि भी प्राप्त की।
इसके बाद 2007 में वह वापस चले गए। वियतनाम धम्म संघ प्रमुख गुरु प्रीजोय ने एक डालर देकर उन्हें मंदिर बनवाने के उद्देश्य के साथ भारत भेजा। उन्होंने भक्तों से दान लेकर इस कार्य को संपूर्ण कराया।
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दो दिवसीय लोकार्पण समारोह के अंतिम दिन शनिवार को भूमि दान कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस दौरान संघ पूजा भी हुई। भगवान बुद्ध को चीवर, अगरबत्ती, धूप-दीप आदि अर्पित किया गया।
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तत्पश्चात बौद्ध भिक्षुओं का संघ दान हुआ। इस अवसर पर वियतनामी प्रतिनिधिमंडल के 500 सदस्यों के साथ ही सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
शनिवार को आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं जिन्होंने वियतनानी परंपरानुसार भगवान बुद्ध का पूजन-अर्चन किया।
वियतनाम के धर्म संघ प्रमुख गुरु प्रीजोय, भिक्षु बेमेन सहित कुछ भिक्षु हाथी पर सवार होकर पूरे मंदिर प्रांगण का चक्कर चक्कर लगा रहे थे। बौद्ध श्रद्धालुओं ने मंदिर के चक्कर भी लगाए।
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इसके बाद विधिवत पूजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने अपने विचार रखे। वियतनाम के प्रतिनिधियों को स्मृति चिह्न प्रदान किया गया।
वहीं शनिवार की रात में दीपदान का आयोजन किया गया। इस दौरान पूरे मंदिर परिसर को भी दीयों से सजाया गया था।
इनसेट
एक डॉलर से शुरू हुआ था काम
27 बिस्वा में फैले शिवली वियतनामी बौद्ध मंदिर का निर्माण 2009 में शुरू हुआ था। इसके साथ ही चुनार के प्रसिद्ध मूर्तिकार देव नारायण पुजारी के नेतृत्व में चुनाव और आगरा के लगभग 30 कारीगरों ने इस प्रतिमा को भी बनाने का काम शुरू किया था।
लगभग 1.25 करोड़ रुपये और कारीगरों की दिन-रात की मेहनत से यह मूर्ति बनकर तैयार हुई। पूरे मंदिर परिसर में धम्मा हाल, विश्राम के लिए 54 कमरे, हाल व कई और प्रमुख निर्माण है।
इसे भिक्षु दाम लाम तान ने बनवाया जो वर्ष 1997 में भारत आए थे। लगभग दस भारत में रहने के दौरान ही उन्होंने दिल्ली के एक शिक्षण संस्थान से पीएचडी की उपाधि भी प्राप्त की।
इसके बाद 2007 में वह वापस चले गए। वियतनाम धम्म संघ प्रमुख गुरु प्रीजोय ने एक डालर देकर उन्हें मंदिर बनवाने के उद्देश्य के साथ भारत भेजा। उन्होंने भक्तों से दान लेकर इस कार्य को संपूर्ण कराया।