वाराणसी: काम नहीं कराने से खफा जिला पंचायत सदस्य, हंगामे के बीच सदन में जमीन पर बैठे सदस्य
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी जिला पंचायत की बैठक के दौरान खूब हंगामा हो गया। जिला पंचायत अध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्यों में काफी नोंकझोंक हो गई। पंचायत सदस्य अपने वार्डों में काम नहीं होने को लेकर खफा हैं। हंगामा करते हुए सजस्य जमीन पर बैठ गए।
वाराणसी जिला पंचायत सदस्यों ने आपत्ति दर्ज कराई कि जब तक हमारे वार्डों में काम शुरू नहीं होगा तब तक बैठक शुरू नहीं होगी। इस दौरान अटेंडेस रजिस्टर का सदन से बाहर जाने को लेकर और ज्यादा हंगामा बढ़ गया। सदस्यों ने जिला पंचाय अध्यक्ष से सवाल किया कि सदन का रजिस्टर बाहर किस लिए गया।
सदस्यों ने रजिस्टर को अपने हाथों में ले लिया। रजिस्टर पर हस्ताक्षर को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष पंचायत सदस्य में काफी नोकझोंक हुई। इसी का विरोध करते हुए सब सदन में ही जमीन पर बैठ गए। पंचायत अध्यक्ष ने रजिस्टर को वापस करने के लिए कहा और सदस्यों को गरिमा में रहने की हादयत दी।
जिला पंचायत सदस्य संजय मिश्र ने बताया कि पिछली बार वार्डों में काम नहीं होने के सवाल पर जिला पंचायत की बैठक स्थगित हुई थी। एक भी वार्ड में काम शुरू नहीं हुआ है। इसके बाद भी बैठक बुलाई गई है। पिछली बार हंगामे के बाद 47 विभागों की 382.35 करोड़ रुपये की जिला योजना के प्रस्ताव का अनुमोदन हुआ था। तब जिले के प्रभारी नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने इसे मंजूरी दी। उस दौरान बैठक में भाग लेने मंत्री पहुंचे तो वहां पहले से मौजूद जिला योजना समिति के सदस्यों में शामिल जिला पंचायत सदस्य और नगर निगम के पार्षदों ने उनका रास्ता रोका था। सदस्यों ने आपत्ति दर्ज कराई कि पिछले जिला योजना में एक भी प्रस्ताव उनका शामिल नहीं किया गया।
इस बार की जिला योजना को जिला पंचायत से मंजूरी नहीं दी गई है। हम लोग बैठक में भाग नहीं लेंगे। साथ ही कोरम पूरा होने पर ही बैठक कराने को कहा था। इसके बावजूद बैठक हुई और मंजूरी दी गई थी। जिला योजना में सबसे अधिक ग्रामीण स्वच्छता में 59.30 करोड़, सड़क एवं पुल में 46.37 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाया गया था। पिछली बार का हवाला देकर इस बार भी पास करा लें।
पिछली बार की 40 फीसदी मिला धन, 38 फीसदी हुआ काम
विकास कार्य से जुड़े अधिकारियों के अनुसार पिछली बार की जिला योजना का 40 फीसदी धन मिला था। इनमें से 38 फीसदी काम हो गया है। बाकी धन की मांग की गई है। बचे काम को पूरा कराने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है।