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गंगा में प्रदूषण बढ़ने के साथ जलीय जीवों की भी जान जोखिम में, अस्सी से राजघाट के बढ़ रहा खतरा

Tue, 25 Feb 2020 05:07 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 25 Feb 2020 05:07 PM IST
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Diesel motorboat running increasing pollution in ganga ghat varanasi
बीच गंगा में छाया रहा काला धुआं। - फोटो : अमर उजाला।
एक्सपायर हो चुके नाव के लाइसेंस पर गंगा में धड़ल्ले से मोटरबोट चलाई जा रही हैं। एनजीटी के मानकों को ताक पर रखने वाली एक-दो नहीं, 17 सौ से ज्यादा मोटरबोट अस्सी से राजघाट के बीच चल रही हैं। इनका प्रशासनिक आयोजनों में इस्तेमाल किया जा रहा है, लिहाजा न तो नगर निगम और न ही प्रशासन इन पर कार्रवाई कर रहा है।
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नगर निगम ने मार्च 2018 में अस्सी से राजघाट के बीच हस्तचालित 412 नावों को एक साल के लिए लाइसेंस जारी किए थे। इसके बाद लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी गई। जो लाइसेंस जारी किए गए थे, उनकी समय सीमा भी बीत चुकी है। इसके बावजूद लाइसेंस वाली नावों को डीजल इंजन वाली मोटरबोट में तब्दील कर दिया गया।
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इससे गंगा में प्रदूषण तो बढ़ ही रहा है, जलीय जीवों पर भी खतरा मंडरा रहा है। यह हाल तब है जब कछुआ अभयारण्य के लिए एनजीटी और वन विभाग ने भी मोटरबोट का संचालन प्रतिबंधित कर रखा है। 
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धुएं से पूरे क्षेत्र को नुकसान
गंगा में बढ़ रहे प्रदूषण की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार की ओर से नमामि गंगे योजना चलाई जा रही है। इसके बावजूद रविवार को इतनी अधिक संख्या में मोटरबोट चलाई गईं कि गंगा क्षेत्र में धुएं से सांस लेना दूभर हो रहा था।

ये हो रहा नुकसान
मोटरबोट की पंखुड़ियों में फंसकर जलीय जीव घायल हो जाते हैं या मर जाते हैं। 
मोटरबोट से निकलने वाला धुआं भी जीवों और लोगों के लिए हानिकारक है।

ये हैं एनजीटी के मानक
कछुआ सेंचुरी क्षेत्र राजघाट से रामनगर तक बालू खनन पर रोक।
मोटर बोट का संचालन पूरी तरह से बंद होना चाहिए।
सीवेज और गंदगी गंगा में नहीं गिरनी चाहिए।

नगर आयुक्त गौरांग राठी ने बताया कि प्रदूषण फैलाने वाले नाव संचालकों पर कार्रवाई की जाएगी और नावों में सुरक्षा मानकों का ध्यान रखने के लिए नोटिस भी जारी होगा। अतिरिक्त प्रभार डीएफओ महावीर कौजालगी ने बताया कि इस मामले की जानकारी नहीं है। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

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