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काशी में धर्म संसद: पढ़िए गंगा सफाई, राम मंदिर और केंद्र सरकार पर क्या बोले साधु-संत

Mon, 26 Nov 2018 10:31 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Mon, 26 Nov 2018 10:31 AM IST
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Dharma sansad organise in varanasi
धर्म संसद में विकास के लिए मंदिर तोड़ने को अनुचित बताया गया - फोटो : अमर उजाला
 अयोध्या में धर्म सभा के साथ ही काशी के सीर गोबर्धन में शुरू हुई धर्म संसद 1008 के पहले दिन रविवार को पहले सत्र में देशभर में तोड़े जा रहे मंदिरों को बचाने के लिए मंदिर रक्षा विधेयक पारित किया गया। दूसरे सत्र में गंगा और गोरक्षा विधेयक पास हुआ। संसद की तर्ज पर आयोजित धर्म संसद में कार्यवाही के दौरान संसदीय प्रक्रिया अपनाते हुए तीनों विधेयकों को पारित कर दिया गया। राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर चर्चा सोमवार को पहले सत्र में की जाएगी।
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धर्म संसद के पहले सत्र का शुभारंभ शारदा एवं ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के आदेश पर नियुक्त धर्माधीश स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आसन ग्रहण से हुई। इसके बाद पदाधिकारियों, संत-महात्माओं के बाद जनता द्वारा पूछे गए गो, गंगा, राम मंदिर और विकास के नाम पर तोड़े जा रहे मंदिरों का विषय रखा गया।
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इस सत्र में विकास के नाम पर तोड़े जा रहे मंदिरों और सनातनी परंपरा की आस्था को चोट पहुंचाते हुए किए जा रहे विकास कार्यों का मुद्दा गरमाया। साधु-संतों ने इसके लिए सरकार को आड़े हाथ लिया। कहा, विकास उचित है, लेकिन आस्था और धर्म पर प्रहार अनुचित है।
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 पहले सत्र के धर्म संसद की कार्यवाही में स्वामी रामदेवानंद महाराज, कामदगिरि से राजीव लोचन महाराज, जल कुमार साईं मसंद, राजमणि सनातन महाराज, अजय गौतम गुजरात से किशोर दवे, दीपक अत्रे, डॉ. आरएस दुबे सहित 600 से अधिक साधु-संत व करीब 400 धर्म प्रतिनिधि धर्म संसद में पहुंचे हैं। 

गंगा की दुर्दशा पर खुल कर बोले लोग

Dharma sansad organise in varanasi
धर्म संसद - फोटो : amar ujala
दोपहर बाद दूसरे सत्र में गंगा की दुर्दशा पर चर्चा हुई। जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि गंगा की स्थिति इतनी खराब है कि पीना तो दूर आचमन भी नहीं किया जा सकता। अगर कोई इसके लिए आंदोलन करता है तो उसको उसकी हत्या कर दी जाती है। स्वामी सानंद इसके उदाहरण हैं। इस मामले में अनदेखी करने पर सरस्वती और जाह्नवी की तरह गंगा भी विलुप्त हो जाएंगी।

कई साधु-संतों ने भी गंगा की निर्मलता और अविरलता के लिए सरकार के कथनी और करनी में अंतर बताया। इसी सत्र में गंगा की रक्षा और अविरलता के लिए इस पर बनाए गए बांध तोड़ने का विधेयक सर्वसम्मति से पारित कर दिया। तीसरा विधेयक गोरक्षा के लिए पारित किया गया। 

इससे पूर्व धर्म संसद का शुभारंभ चारों वेदों के स्वस्तिवाचन से हुआ। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने साक्षी दीप के सम्मुख समस्त धर्मासदों को शपथ दिलाई। पहले दिन ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद महाराज, महामंडलेश्वर हरि चैतन्यानंद, महामंडलेश्वर ऋषिश्वरानंद, ब्रह्मचारी ब्रह्मस्वरूपनंद, स्वामी नारायणनंद महाराज, स्वामी इंदुभवानंद महाराज, महंत सुभाष दास महाराज, स्वामी राम देवानंद सरस्वती, स्वामी प्रज्ञानंद, स्वामी राम लोचन, स्वामी वेदानंद, महंत अशोक दास सहित परमेश्वर दत्त मिश्र, पूर्व विधायक एवं मंत्री अजय राय, सुरेंद्र पटेल, रामधीरज, संजीव सिंह, स्वामी महाराजमणि शरण सनातन जी, राजेंद्र तिवारी, दीपक आत्रेय, विजयानंद सरस्वती आदि धर्मानुरागियों ने विचार रखे।

कोई भी राजनीतिक दल कभी नहीं बनाएगा मंदिर

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का कहना है कि कोई भी राजनीतिक दल कभी भी अयोध्या में राम मंदिर नहीं बनवाएगा। राम मंदिर के नाम पर राजनीतिक दल अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं। अयोध्या में सदैव से रामलला का मंदिर रहा है और रहेगा। हम न तो मुस्लिमों के विरोधी हैं और न ही मस्जिद के। हम सभी धर्मों को आपस में लड़ा कर द्वेष पैदा नहीं करना चाहते हैं।

धर्म संसद में ये बातें शारदा एवं ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने बतौर परम धर्माधीश के तौर पर संतों, श्रद्धालुओं और अनुयाइयों को संबोधित करते हुए कहीं। कहा, वह सरकार मंदिर क्या बनाएगी, जो विकास के नाम पर मंदिरों को तोड़ने में लगी हुई है। धर्म को भी संप्रदाय बना दिया है। देश में तमाम समस्याएं और कुरीतियां हैं। उन्होंने कहा कि इस धर्म संसद के माध्यम से संतों की बात व वेदना को जनता तक पहुंचाया जाएगा। 

शंकराचार्य ने कहा कि भारत की सभ्यता और संस्कृति प्राचीन है। लोक-परलोक की शांति के लिए परमेश्वर ने वेदों की रचना की है। वेदों की परंपरा का पालन करना जनता का परम कर्तव्य है। हिंदू समाज के लोग मरते समय भी मुंह में गंगाजल और तुलसी पत्ते के साथ डालते हैं लेकिन गंगा की ऐसी स्थिति कर दी गई है कि गंगा आचमन योग्य भी नहीं बची है।

इस सरकार में भी गोमांस का निर्यात बड़ी मात्रा में किया जा रहा है। यही नहीं, सरकार अब चैरिटी एक्ट लाने की तैयारी में है, जिससे मंदिरों पर भी एक तरह से सरकार का कब्जा हो जाएगा। साधु-संतों को मंदिर की धन-संपदा की जानकारी देनी पड़ेगी।
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